हैप्पी बर्थडे सौरव गांगुली: मैच फिक्सिंग के काले दौर से विश्व क्रिकेट की ताकत बनने तक ‘दादा’ की कहानी
सबने सौरव गांगुली ‘दादा’ की कप्तानी में आक्रमकता, जीतने का जज़्बा और अंत तक लड़ते रहने का जुझारूपन देखा।
सबने सौरव गांगुली ‘दादा’ की कप्तानी में आक्रमकता, जीतने का जज़्बा और अंत तक लड़ते रहने का जुझारूपन देखा।
IPL में हमने देखा था, कि 250 रन बनाकर भी टीम सेफ़ महसूस नहीं कर पा रही थी, ऐसे में 202 का लक्ष्य कहीं ज़्यादा आसान लग रहा होगा, लेकिन
इंग्लैंड फ़ाइनल मुकाबले में एक दम धीमा रही। उसका प्रदर्शन टॉप क्लास के बजाए सुस्त दिखा। न बल्लेबाली में दम नज़र आया और नहीं गेंदबाजी घूमती दिखी।
अब तक भारत को लगातार 3 मैच में हार मिल चुकी है और अब उस पर जीत दर्ज करने का दबाव होगा। भ
T20 विश्वकप में दोनों टीमों के प्रदर्शन को देखते हुए यह कहा जा सकता है, कि मुक़ाबला काफ़ी टक्कर का होगा।
वन-डे विश्वकप जीतकर आई भारतीय महिलाओं ने इस T20 विश्वकप में अपने प्रदर्शन से निराश किया।
आशुतोष त्रिपाठी ने ताइक्वांडो जीत को कोच व माता-पिता को समर्पित किया।
कुल मिलाकर प्रदर्शन मिला-जुला रहा, लेकिन ऐसे स्तर पर बड़ी टीमों के सामने मिले-जुले प्रदर्शन से जीतना आसान नहीं होता
शुरू में जिस तरह का दबाव दक्षिण अफ्रीका पर था, यदि उस समय भारत का कोई गेंदबाज विकेट निकाल लेता तो परिणाम भारत के पक्ष में जा सकता था।
कुरासाओ के लिए बेहद गर्व का क्षण रहा, क्योंकि FIFA में क्वॉलिफ़ाई करने वाला सबसे कम जनसंख्या वाला देश है।
पहले विकेट के लिए डैनी व्याट हॉज और एमी जोन्स ने 82 गेंदों में 135 रन जोड़ दिए।
USA ने फ़ुटबॉल विश्वकप में ज़बरदस्त जीत के साथ मजबूत दावेदारी पेश कर दी है।
इस बार भी उसी जोश और इरादे के साथ भारतीय महिलाएं इंग्लैंड की धरती पर T20 विश्व कप की ट्रॉफ़ी उठने पहुंच गई हैं।
FIFA के उद्घाटन समारोह में बड़े-बड़े दिग्गज कलाकारों ने अपने प्रस्तुती से सबका दिल जीत लिया और लोग झूमते नज़र आए।
इस IPL सीज़न में भी RCB के अंदर IPL टाइटल का जीतने का जज़्बा साफ़ दिखाई दिया और उनका ऑलराउंडर परफ़ॉर्मेंस इसका बड़ा उदाहरण है।
इस सीज़न की सबसे बेहतरीन टीम बनकर उभरी RCB ने हर प्रारूप में अपना उच्चतम प्रदर्शन किया। बेंगलुरु सही मायने में चैम्पियन की तरह खेली।
देखना दिलचस्प होगा, कि GT किस तरह से RCB के पक्के इरादों का सामना कर पाती है, क्योंकि अब शोर मचने लगा है, कि इस बार भी RCB।
मुल्लांपुर के मैदान में सिर्फ़ वैभव सूर्यवंशी के बल्ले की गूंज थी। वैभव का बल्ला सिर्फ़ रन उगल रहा था और हैदराबाद के गेंदबाजों की जमकर पिटाई कर रहा था।
पाटीदार की बल्लेबाजी ने बोर्ड पर इतने रन लगा दिए, कि गुजरात की बल्लेबाजी भी लक्ष्य का पीछा करने में पस्त हो गई।
धर्मशाला के मैदान में पंजाब कोई भी मुक़ाबला नहीं जीत पाई। वोआख़िरी मैच ज़रूर जीती, लेकिन किसी के भरोसे रहना ठीक नहीं, पंजाब को इसका ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ा।