नालंदा के शीतला मंदिर की भगदड़, आस्था की परिभाषा पर उठाता है सवाल!
सबके अंदर आस्था होती है, परंतु आस्था के नाम पर भीड़ इकट्ठा करना और हादसे का शिकार होना ये कहां तक उचित है।
सबके अंदर आस्था होती है, परंतु आस्था के नाम पर भीड़ इकट्ठा करना और हादसे का शिकार होना ये कहां तक उचित है।
हाल ही में चुनावी घमासान के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल का दौरा किया और सड़क, रेलवे और बंदरगाह जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।
जबसे पश्चिम एशिया में महासंग्राम शुरू हुआ है। तब से पूरी दुनिया इससे प्रभावित है। हर तरफ़ बस अर्थव्यवस्था, कच्चे तेल और एलपीजी गैस की चर्चा हो रही है। ऐसे में कहा जा रहा है, कि देश में गैस की कमी हो रही है, लेकिन यह कितना सच है?
बिहार की राजनीति अब करवट बदलने जा रही है। नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद छोड़ना, भविष्य के लिए एक चुनौती है।
फ़ाइनल में भारत को जीतने के लिए गेंदबाजी में सुधार करना होगा, वहीं न्यूज़ीलैंड ICC ट्रॉफ़ी के सूखे को ख़त्म करने के लिए बेताब होगी।
प्रधानमंत्री का जिस गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया, इससे ना सिर्फ़ प्रधानमंत्री की लोकप्रियता को पता चलता है, बल्कि यह भी पता चलता है, कि आज भारत विश्व में एक ताक़त के रूप में ऊभर रहा है।
बड़े ही शर्म की बात है, कि कांग्रेस आज अपना भड़ास निकालने के लिए विश्व मंच पर भी देश का सर झुकाने से भी नहीं चूक रही। AI इम्पैक्ट समिट में यूथ कांग्रेस का अर्धनंग प्रदर्शन इसका उदाहरण है।
एआई समिट में जो कुछ भी हुआ, ये विश्व मंच को देखते हुए यह देश के लिए बड़े शर्म की बात है। गलगोटिया जैसे प्राइवेट यूनिवर्सिटी तकनीक के नाम पर बड़ी-बड़ी बातें करते तो हैं, लेकिन वो धरातल पर कितना सच्चाई रखती है, ये तो वो ख़ुद जानते हैं। वो कहते हैं ना, कि कुछ भी कर लो सच एक दिन सामने आ ही जाता है और गलगोटिया यूनिवर्सिटी के साथ वही हुआ।
हाल ही में सरकार ने आम बजट पेश किया। उसके बाद युरोनियन देशों के साथ FTA. अमेरिका के साथ व्यापार समझौता। एक तरफ़ सरकार विकसित भारत की बात करती है, वहीं विपक्ष संसद में मुद्दों पर सवाल जवाब करने के बजाए हंगामा करने में लगी है। ऐसे हंगामें जिसका तर्क नज़र नहीं आता। ये देश की जनता के साथ धोखा ही तो है।
यूजीसी के नए कानून ने छात्रों के बीच जाति भेदभाव पैदा कर दिया है। दिल्ली विश्वविद्यालय में जो कृत्य हुआ वो नहीं होना चाहिए था।
किसी ने सच ही कहा है, कि बोय पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय। तख़्तापलट के बाद बांग्लादेश में राज करने वाली पार्टियां हार का सामना नहीं कर पा रही हैं। उनके मनसूबों पर जैसे किसी ने पानी फेर दिया है। लेकिन सच से मूंह नहीं मोड़ा जा सकता, कि उनहोंने देश को आग में झोकने का काम किया है, जिसे परेशान जनता ने बुझाने का काम किया।
वो कहते हैं ना जनता से बढ़कर कुछ भी नहीं। जनता ही आपको हीरो बनाती है और वही आपको ज़ीरो भी बनाती है। इसलिए अहंकार से नहीं प्रेम से चलिए। बांग्लादेश आम चुनाव में यह बात पूरी तरह स्पष्ट होती है। इस परिणाम से पता चलता है, कि जनता ऐसे कट्टरवादी लोगों से त्रस्त आ चुकी थी।
बड़ी-बड़ी फ़िल्मों में काम करने वाला कलाकार जब कहे, कि इतनी बड़ी रक़म चुकाने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे, तो यह फ़िल्मी दुनिया की चकाचौंध के पीछे छिपे अंधकार को बयां करती है। बड़े बड़े प्रोडक्शन हाउस आज व्यापार के अलावा कुछ नहीं देखते, उन्हें दमदार किरदार नहीं, बल्कि पैसा कमा कर कौन देगा यह ज़रूरी है। आज आइटम सॉन्ग को तो पसंद किया जाता है, लेकिन कहानी देखने कोई नहीं जाता।
एक आम आदमी जीवनभर संघर्ष करता है और जीवन भर बनाए गए नियमों पर चलते-चलते एक दिन थक जाता है, लेकिन अमीर घर के लड़के रोज़ क़ानून को अपनी मुठ्ठी में लेकर चलते हैं। इनके जीवन में अय्याशी के अलावा कुछ नहीं होता और एक देश का सैनिक है, जो इस देश की मिट्टी के लिए कुर्बान हो जाता है।
कई दिनों के हलचल के बाद पाकिस्तान को आया होश, कहा भारत से खेलेंगे। आईसीसी मीटिंग में भी दिखी पाकिस्तान और बांग्लादेश की दोस्ती।
हमें समझना होगा डिजिटल दुनिया और अपनों के बीच के रिश्तों का भेद। डिजिटल होना अच्छी बात है, लेकिन उसे नशा बना कर अपनों से दूर हो जाना ठीक नहीं।
अरिजीत सिंह ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट किया था, जिसमें उन्होंने प्लेबैक सिंगिंग से सन्यास लेने की घोषणा की थी। इसका मतलब यह है, कि वो अब फ़िल्मों के लिए गाना नहीं गायेंगे। यह ख़बर आते ही उनके चाहने वाले फ़ैन्स काफ़ी दुखी हुए। यह उनके फ़ैन्स के लिए चौक़ाने वाली…
राज्यसभा में अभिभाषण में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने लोकसभा में विपक्ष द्वारा किए गए बर्ताव पर कहा, कि यह राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद का अपमान है। राष्ट्रपति एक ग़रीब परिवार से आई महिला हैं। कांग्रेस ने ग़रीबों का अपमान किया है। आदिवासी समाज का और महिलाओं का अपमान किया है। उन्होंने कहा, कि लोकतंत्र…
बांग्लादेश और पाकिस्तान की दोस्ती पिछले कुछ समय से काफ़ी बढ़ गई है। इतनी की दोनों भारत का विरोध करने से बाज़ नहीं आ रहे। पहलगाम हमले के बाद भारत ने जिस तरह से आपॅरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान को सबक सिखाया और आतंकवाद के ठिकानों को उखाड़ फ़ेका और उनकी जड़ो को हिला…
आम बजट में महिला सशक्तिकरण को और मजबूती देने के लिए कई ज़रूरी घोषणाएं की गई हैं। दरअसल देश में महिला सशक्तिकरण बहुत बड़ा मुद्दा है। अगर हम विकसित भारत की बात कर रहे हैं, तो महिलाओं को हर तरह से सशक्त बनाना होगा, क्योंकि अगर महिलाएं पीछे रह जाएंगी, तो विकसित भारत बेइमानी होगी।…