नोएडा अग्निकांड: लापरवाही की आग में कब तक जलती रहेंगी जिंदगियां?
आज छोटी-छोटी जगहों पर बड़ी-बड़ी इमारते बना दी जाती हैं, ताक़ि लोगों को किराय पर रूम देकर पैसा कमाया जा सके।
आज छोटी-छोटी जगहों पर बड़ी-बड़ी इमारते बना दी जाती हैं, ताक़ि लोगों को किराय पर रूम देकर पैसा कमाया जा सके।
अगर ऐसे हादसे आगे भी होते रहे, तो लोगों का इन स्पीडबोट से जल्द ही विश्वास उठ जाएगा, जो पर्यटन के लिहाज से बिल्कुल सही नहीं होगा।
खैंर अभी जैसा माहौल है उसे देखकर कहना मुश्कि़ल है, कि दोनों देशों के बीच बातचीत हो भी पाएगी या नहीं। जैसा, कि हमने 60 दिन युद्धविराम वाले समझौते में देखा था।
इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है, कि आज TMC में बग़ावत का दौर है। वही ममता बनर्जी, जिनका फ़ैसला पत्थर की लकीर माना जाता था, आज उनके फ़ैसलों का कोई मान नहीं रहा।
सबने सौरव गांगुली ‘दादा’ की कप्तानी में आक्रमकता, जीतने का जज़्बा और अंत तक लड़ते रहने का जुझारूपन देखा।
युवक अपना देश छोड़कर विदेश में ज़्यादा पैसा कमाने के लिए जाते हैं। कई परिवार तो आबाद हो गए, लेकिन कई लोग ग़लत जगह पांव रखने से गुमनामी के अंधेरे में चले गए।
हम इंसान बनने की कोशिश करें। हम इंसानियत और प्रेम की भाषा को समझें। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो ‘अपने’ शब्द की रौशनी धीरे-धीरे बुझ जाएगी।
अमेरिका-ईरान के बीच दोबारा हमले शुरू हो गए हैं, उससे पूरा विश्व एक बार फिर चिंता से घिर गया है।
आज की तारिख़ में पढ़ना जितना ज़रूरी है, वैसे ही हमारी सुरक्षा भी बेहद ज़रूरी है, क्योंकि जब हम ही सुरक्षित नहीं रहेंगे, तो आगे के बारे में सोचना सब व्यर्थ है।
हम रिश्तों की मान-मर्यादा सब भूलते जा रहे हैं और हम पर हावी होता जा रहा है लालच, बेईमानी और दोहरा चरित्र। इंसान से अच्छे तो आज जानवर हो गए हैं।
जो कोचिंग सेंटर से छात्र हर रोज़ पढ़कर वापस चले आते थे, उन्हें क्या पता था, कि वो कोचिंग सेंटर एक दिन उनकी जान की वजह बन जाएगी।
कबीर ने हमारे समाज में पनपति लालच, बेईमानी व भ्रष्टाचार को बड़े गौर से समझा है और इसे दोहे का रूप दिया।
इस युद्ध में जिस तरह तेल रिफ़ाइनरी पर हमले हुए उसने कच्चे तेल की क़ीमतों में आग लगाने का काम किया।
पार्टी में एंट्री हुई नए चेहरे व भतीजे अभिषेक बनर्जी की, जिसके बाद कहानी में नया मोड़ आया और आज TMC को 15 वर्षों बाद बुरी तरह हार मिली, उसकी पठकथा वहीं से लिखनी शुरू हो गई थी।
खान सर: वो शिक्षक, जिसको बिहार को बदलने का श्रेय दिया गया हो, वो एक दम से ‘फैज़ल खान’ बनकर फ़रार कैसे हो सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ख़ुद एक पुस्तकालय की तरह हैं, जिसमें एक युग से भी ज़्यादा भारत के विकास, चुनौती और संघर्ष की कहानी दिखती है।
पिछले कई दिनों से यह प्रश्न भी उठ रहे थे, कि क्या खान सर की गिरफ़्तारी होगी?
ग़जब हैं ऐसे अस्पताल, जो आम आदमी से पैसा तो झोली भरकर लेते हैं, लेकिन सुरक्षा नहीं दे सकते।
विकसित मतलब बड़ी-बड़ी बिल्डिंग तैयार करना नहीं है, बल्कि विकसित ईमानदारी, सच्चाई, मानवता और विचारधारा की नींव है।
हमारे देश में ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे, जहां अवैध रूप से ऐसे होटल चलाए जा रहे हैं। ऐसे होटलों में पैसा बचाने और मुनाफ़ा अधिक कमाने के लिए आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जाता है।