मेरठ नीला ड्रम हत्याकांड: एक कत्ल, कई सवाल… आख़िर क्या खोया, क्या पाया?
आपको किसी के साथ नहीं रहना, तो खुलकर बोलो, लेकिन हत्या मत करो, उससे कुछ हासिल नहीं होता, लेकिन जेल के दरवाज़े ज़रूर खुल जाते हैं।
आपको किसी के साथ नहीं रहना, तो खुलकर बोलो, लेकिन हत्या मत करो, उससे कुछ हासिल नहीं होता, लेकिन जेल के दरवाज़े ज़रूर खुल जाते हैं।
यदि हम छात्रो को रहने के लिए एक घर नहीं दे सकते, तो हमें विकसित भारत का सपना छोड़ देना चाहिए।
सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत ने दिल्ली की इमारतों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ज़िम्मेदार कौन?
नोएडा के इकोटेक-3 क्षेत्र में 6 साल की बच्ची की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी बलराज उर्फ बल्ला पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। फायरिंग में हेड कांस्टेबल घायल हुए।
NTA की लापरवाही पर फिर उठे सवाल! UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के पेपर गंभीर खामियों के चलते रद्द कर दिए गए हैं। जानिए पूरी वजह।
गोरखपुर में 10 साल की बच्ची की मौत के मामले में सिपाही पर दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगा है। घटना ने पुलिस की वर्दी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बांकीपुर उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा को 19,324 वोटों से हराया। जानिए इस जीत के राजनीतिक मायने और बिहार की राजनीति पर इसके संभावित असर।
झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षा विवाद और कथित पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज है। इस संपादकीय में सरकार, राजनीतिक दलों और छात्र आंदोलनों पर उठ रहे सवालों का विश्लेषण किया गया है।
झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के ख़िलाफ़ छात्र आंदोलन जारी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या छात्रों के मुद्दे सरकार देखकर उठाए जाते हैं?
सोनम वांगचुक ने 26 दिन बाद अपना अनशन समाप्त कर दिया। छात्रों की मांगों, शिक्षा सुधार और NEET पेपर लीक के मुद्दे पर उनका संघर्ष देशभर में चर्चा का विषय बना।
क्या सरकार उनकी मांगे मानेगी या कोई और रास्ता निकालेगी? यह आने वाले दिनों में पता चल पाएगा। ख़ैर सरकार लगातार कह रही है, कि वह बातचीत करने और संसद में NEET की चर्चा के लिए तैयार है।
NEET पेपर लीक के बाद चर्चा में आई ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ क्या है? जानिए इस आंदोलन की शुरुआत, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और राजनीति की चर्चा की पूरी कहानी
आज छोटी-छोटी जगहों पर बड़ी-बड़ी इमारते बना दी जाती हैं, ताक़ि लोगों को किराय पर रूम देकर पैसा कमाया जा सके।
अगर ऐसे हादसे आगे भी होते रहे, तो लोगों का इन स्पीडबोट से जल्द ही विश्वास उठ जाएगा, जो पर्यटन के लिहाज से बिल्कुल सही नहीं होगा।
खैंर अभी जैसा माहौल है उसे देखकर कहना मुश्कि़ल है, कि दोनों देशों के बीच बातचीत हो भी पाएगी या नहीं। जैसा, कि हमने 60 दिन युद्धविराम वाले समझौते में देखा था।
इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है, कि आज TMC में बग़ावत का दौर है। वही ममता बनर्जी, जिनका फ़ैसला पत्थर की लकीर माना जाता था, आज उनके फ़ैसलों का कोई मान नहीं रहा।
सबने सौरव गांगुली ‘दादा’ की कप्तानी में आक्रमकता, जीतने का जज़्बा और अंत तक लड़ते रहने का जुझारूपन देखा।
युवक अपना देश छोड़कर विदेश में ज़्यादा पैसा कमाने के लिए जाते हैं। कई परिवार तो आबाद हो गए, लेकिन कई लोग ग़लत जगह पांव रखने से गुमनामी के अंधेरे में चले गए।
हम इंसान बनने की कोशिश करें। हम इंसानियत और प्रेम की भाषा को समझें। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो ‘अपने’ शब्द की रौशनी धीरे-धीरे बुझ जाएगी।
अमेरिका-ईरान के बीच दोबारा हमले शुरू हो गए हैं, उससे पूरा विश्व एक बार फिर चिंता से घिर गया है।