”बिहार की बदलती बयार”: ये राजनीति है भईया! यहां कोई ठोर-ठिकाना नहीं  

बिहार की राजनीति अब करवट बदलने जा रही है। नीतीश कुमार का मुख्‍यमंत्री पद छोड़ना, भविष्‍य के लिए एक चुनौती है।

  • नीतीश कुमार जाएंगे राज्‍यसभा
  • दो दशक तक रहे बिहार के मुख्‍यमंत्री

मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार जाएंगे राज्‍यसभा

इस समय बिहार की राजनीति चर्चा का विषय बनी हुई है, क्‍योंकि बिहार की राजनीति में बहुत बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है। 20 साल से बिहार को अपनी सेवा देने वाले बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्‍यमंत्री पद छोड़कर राज्‍यसभा में जाने का फ़ैसला किया है। इतना बड़ा पद छोड़ना आसान नहीं होता, वो भी तब जब दो दशक तक आपने बिहार की कमान संभाली हो और आपने बदलते बिहार के हर क्षण को जीया हो। सबसे बड़ी बात आप जनता दल यूनाइडेड (जेडीयू) जैसी बड़ी पार्टी के मुखिया हो, जिससे बिहार की जनता के बीच आपको पहचान मिली हो और जनता ने आपको मुख्‍यमंत्री बनाया हो।

कारण तो पार्टी जाने!

मुख्‍यमंत्री पद छोड़ राज्‍यसभा में जाने का दो कारण अभी तक सामने आए हैं- पहला, कि उन्‍होंने अपनी तरफ़ से इच्‍छा जताई है, कि वो राज्‍यसभा में अपनी सेवा देना चाहते हैं और दूसरा स्‍वास्‍थ्‍य कारणों के चलते भी ऐसा करना लाज़मी हो सकता है। ख़ैर इसका सही कारण भाजपा और जेडीयू ही जानती होगी। हालांकि जेडीयू प्रमुख ने यह साफ़ किया है, कि राज्‍यसभा में रहते हुए वह पार्टी और अपने नेताओं से जुड़े रहेंगे और पार्टी व सरकार दोनों पर उनकी नज़र बराबर बनी रहेगी।  

क्‍या भाजपा चाहती है, कि नीतीश छोड़े मुख्‍यमंत्री पद?

पिछले साल नवंबर के महीने में बिहार चुनाव सम्‍पन्‍न हुआ था, जिसमें एनडीए ने ज़बरदस्‍त प्रदर्शन करते हुए एकतरफ़ा जीत हासिल की थी, जिसमें बीजेपी को 89 और जेडीयू को 85 सीट मिली थी, यानी की नीतीश कुमार की पार्टी भाजपा से सिर्फ़ 4 सीट ही पीछे रहे थे। इससे साफ़ जाहिर होता है, कि बिहार की जनता ने नीतीश कुमार जैसे बड़े चेहरे पर एक बार फ‍िर विश्‍वास किया है। इसका मतलब यही निकाला जा सकता है, कि नीतीश कुमार भाजपा के दबाव में मुख्‍यमंत्री छोड़ें ऐसा संभव नहीं दिखता, लेकिन चुनाव के बाद नई सरकार में मात्र तीन महीने के बाद ही मुख्‍यमंत्री का पद छोड़ना हैरान भी करता है। इसकी वजह यह भी हो सकती है, कि चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्‍ति पार्टी ने इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर 19 सीटें जीती थी। इसके अलावा विपक्ष वोटों की गिनती में कमजोर रही, इसलिए नीतीश कुमार के लिए यह भी संभव नहीं की वो विपक्ष से हाथ मिला लें।  

Photo: Wikimedia Commons

आसान नहीं है नीतीश कुमार की जगह ले पाना

नीतीश कुमार जैसी शख्‍़सियत की जगह ले पाना इतना भाजपा के लिए इतना आसान भी नहीं होने वाला, वो भी तब जब बिहार के हर वर्ग ने नीतिश कुमार के साथ क़दम-से-क़दम मिला कर 20 साल का सफ़र तय किया हो। ऐसी माना जा रहा है, कि भाजपा मुख्‍यमंत्री पद के लिए अपना उम्‍मीदवार उतार सकती है और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्‍यमंत्री पद के लिए खड़ा कर सकती है। इस बीच लोजपा के नेता चिराग पासवान भी इस रेस में उतर सकते हैं। राज्‍यसभा का चुनाव 16 मार्च को होने वाला है और नीतीश कुमार के अलावा राज्‍यसभा के लिए ‘जेडीयू’ के कृषि‍ मंत्री रामनाथ ठाकुर, हाल में बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष बने नितिन नवीन, प्रदेश मंत्री शि‍वेश राम, राष्‍ट्रीय लोक मोर्चा के अध्‍यक्ष उपेंद्र कुशवाहा और राष्‍ट्रीय जनता दल के सदस्‍य अमरेंद्र धारी सिंह ने राज्‍यसभा के लिए नामांकन भरा है। नामांकन के दौरान देश के गृहमंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे।

बीजेपी के लिए भविष्‍य की चुनौती

देखना दिलचस्‍प होगा, कि बिहार की राजनीति कौन-सी करवट लेती है। राजनीति में ना तो कोई सगा होता है और ना ही कोई पराया। अब भाजपा कैसे बिहार की राजनीति को आगे ले जाएगी और वो कौन-सा चेहरा होगा, जिस पर जनता विश्‍वास का बटन दबाएगी? ऐसे कई प्रश्‍न है, जिनका उत्‍तर ढूंडना बीजेपी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं।  

Nitish Kumar Photo: Bihar Information Department

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