- कभी TMC के प्रमुख नेता थे शुभेंदु अधिकारी
- ममता बनर्जी को 15 हज़ार के ज़्यादा वोटो के अंतर से हराया
शुभेंदु अधिकारी बंगाल का नया अध्याय
शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में अब नए युग की शुरुआत होने जा रही है। इस चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी एक ऐसा नाम है, जो इतिहास के पन्नों में एक ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिसने अपने संघर्ष से एक ऐसी पार्टी के जड़ को हिला दिया, जो पिछले 15 वर्षों से सत्ता का सुख भोग रही थी, जिसके चक्रव्यूह को भेदना नामूमकीन सा लगता था।
यह भी पढ़ें: अपना ही किला नहीं बचा पाई ममता बनर्जी, भवानीपुर सीट पर शुभेंदु अधिकारी का विजय तिलक
ममता बनर्जी को घर में हराया
हाल ही के पश्चिम बंगाल चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने तृणमुल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी को चुनौती देते हुए उनके ही गढ़ भवानीपुर में जाकर 15 हज़ार से अधिक वोटों के अंतर से हरा दिया। यह महज एक जीत नहीं है, बल्कि यह जीत बताता है, कि अहंकार का अंत निश्चित है। ममता बनर्जी को घर में हराने के बाद शुभेंदु अधिकारी का औहदा बढ़ गया है। पूरी दुनिया में इस जीत की चर्चा है। यही नहीं शुभेंद्र अधिकारी ने नंदीग्राम सीट से भी चुनाव लड़ा और इस सीट को जीतकर यह बता दियस, कि बंगाल में उनसे बड़ा नेता और मुख्यमंत्री पद के लिए सही उम्मीदवार भी हैं।
शुभेंदु अधिकारी बने ममता सरकार के पतन की कहानी
ममता सरकार के पतन की कहानी आज नहीं, बल्कि 6 साल पहले लिखी जाने लगी थी। कभी शुभेंदु अधिकारी TMC के प्र मुख नेता और ममता बनती के क़रीबी माने जाते थे, लेकिन ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी के पार्टी में आने के बाद चीज़े बदलने लगी। अब शुभेंदु अधिकारी का क़द पार्टी में पहले की तरह पहीं रहा, क्योंकि अभिषेक बनर्जी का प्रभाव ज़्यादा बढ़ने लगा था और शुभेंदु अधिकारी धीरे-धीरे TMC के प्रमुख नेता से हाशिये की तरफ़ बढ़न लगे और पार्टी से दरकिनार किए जाने लगे। तब नाराज़ शुभेंदु अधिकारी ने वर्ष 2020 में पार्टी को हमेंशा के लिए अलविदा कर बीजेपी के साथ जुड़ गए और अपनी अलग पहचान बनाई।
यह भी पढ़ें: आख़िर क्यों हार गई बंगाल की इतनी बड़ी पार्टी TMC?



