जमात-ए-इस्‍लामी को पच नहीं रही बीएनपी की जीत, चुनाव को बताया धोखाधड़ी

किसी ने सच ही कहा है, कि बोय पेड़ बबूल का तो आम कहां से होय। तख्‍़तापलट के बाद बांग्‍लादेश में राज करने वाली पार्टियां हार का सामना नहीं कर पा रही हैं। उनके मनसूबों पर जैसे किसी ने पानी फेर दिया है। लेकिन सच से मूंह नहीं मोड़ा जा सकता, कि उनहोंने देश को आग में झोकने का काम किया है, जिसे परेशान जनता ने बुझाने का काम किया।

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बांग्‍लादेश आम चुनाव में बीएनपी की ज‍ीत, जनता ने कहा हमें शांति चाहिए

वो कहते हैं ना जनता से बढ़कर कुछ भी नहीं। जनता ही आपको हीरो बनाती है और वही आपको ज़ीरो भी बनाती है। इसलिए अहंकार से नहीं प्रेम से चलिए। बांग्‍लादेश आम चुनाव में यह बात पूरी तरह स्‍पष्‍ट होती है। इस परिणाम से पता चलता है, कि जनता ऐसे कट्टरवादी लोगों से त्रस्‍त आ चुकी थी।

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राजपाल यादव: ये फ़‍िल्‍मी दुनिया है, जैसी दिखती है, वैसी है नहीं

बड़ी-बड़ी फ़ि‍ल्‍मों में काम करने वाला कलाकार जब कहे, कि इतनी बड़ी रक़म चुकाने के लिए मेरे पास पैसे नहीं थे, तो यह फ़ि‍ल्‍मी दुनिया की चकाचौंध के पीछे छिपे अंधकार को बयां करती है। बड़े बड़े प्रोडक्‍शन हाउस आज व्‍यापार के अलावा कुछ नहीं देखते, उन्‍हें दमदार किरदार नहीं, बल्‍कि पैसा कमा कर कौन देगा यह ज़रूरी है। आज आइटम सॉन्‍ग को तो पसंद किया जाता है, लेकिन कहानी देखने कोई नहीं जाता।

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कहां गया योगी जी का बुलडोजर? अमीरज़ादे घूम रहे हैं मस्‍ती में

एक आम आदमी जीवनभर संघर्ष करता है और जीवन भर बनाए गए नियमों पर चलते-चलते एक दिन थक जाता है, लेकिन अमीर घर के लड़के रोज़ क़ानून को अपनी मुठ्ठी में लेकर चलते हैं। इनके जीवन में अय्याशी के अलावा कुछ नहीं होता और एक देश का सैनिक है, जो इस देश की मिट्टी के लिए कुर्बान हो जाता है।

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पाकिस्‍तान का नाटक ख़त्‍म, खेलेगा भारत से

कई दिनों के हलचल के बाद पाकिस्‍तान को आया होश, कहा भारत से खेलेंगे। आईसीसी मीटिंग में भी दिखी पाकिस्‍तान और बांग्‍लादेश की दोस्‍ती।

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रिश्‍तों की डोर कमज़ोर करती डिजिटल दुनिया

हमें समझना होगा डिजिटल दुनिया और अपनों के बीच के रिश्‍तों का भेद। डिजिटल होना अच्‍छी बात है, लेकिन उसे नशा बना कर अपनों से दूर हो जाना ठीक नहीं।

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फ़‍िल्‍मी दुनिया के ख़ामोश अंधेरे को बयां करता अरिजीत सिंह का सन्‍यास

अरिजीत सिंह ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्‍ट किया था, जिसमें उन्‍होंने प्‍लेबैक सिंगिंग से सन्‍यास लेने की घोषणा की थी। इसका मतलब यह है, कि वो अब फ़‍िल्‍मों के लिए गाना नहीं गायेंगे। यह ख़बर आते ही उनके चाहने वाले फ़ैन्‍स काफ़ी दुखी हुए। यह उनके फ़ैन्‍स के लिए चौक़ाने वाली…

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अटकाना, लटकाना और भटकाना वाली राजनीति ने ख़राब की देश की छवि: नरेंद्र मोदी

राज्‍यसभा में अभिभाषण में चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री ने लोकसभा में विपक्ष द्वारा किए गए बर्ताव पर कहा, कि यह राष्‍ट्रपति जैसे सर्वोच्‍च पद का अपमान है। राष्‍ट्रपति एक ग़रीब परिवार से आई महिला हैं। कांग्रेस ने ग़रीबों का अपमान किया है। आदिवासी समाज का और महिलाओं का अपमान किया है। उन्‍होंने कहा, कि लोकतंत्र…

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बांग्‍लादेश की राग़ गा रहा पाकिस्‍तान, भवि‍ष्‍य में चुकानी होगी क़ीमत

बांग्‍लादेश और पाकिस्‍तान की दोस्‍ती पिछले कुछ समय से काफ़ी बढ़ गई है। इतनी की दोनों भारत का विरोध करने से बाज़ नहीं आ रहे। पहलगाम हमले के बाद भारत ने जिस तरह से आपॅरेशन सिंदूर के माध्‍यम से पाकिस्‍तान को सबक सिखाया और आतंकवाद के ठिकानों को उखाड़ फ़ेका और उनकी जड़ो को हिला…

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विकसित भारत के लिए ज़रूरी है महिला सशक्‍तिकरण

आम बजट में महिला सशक्‍तिकरण को और मजबूती देने के लिए कई ज़रूरी घोषणाएं की गई हैं। दरअसल देश में महिला सशक्‍तिकरण बहुत बड़ा मुद्दा है। अगर हम विकसित भारत की बात कर रहे हैं, तो महिलाओं को हर तरह से सशक्‍त बनाना होगा, क्‍योंकि अगर महिलाएं पीछे रह जाएंगी, तो विकसित भारत बेइमानी होगी।…

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील- ‘आत्‍मविश्‍वास में होती है शक्‍ति’

अभी कुछ दिन पहले ही भारत ने यूरोप के साथ ‘मदर ऑफ़ ऑल डील्‍स’ के नाम से चर्चा में रही इतिहास का सबसे बड़ा मुक्‍़त व्‍यापार समझौता किया। यह ऐतिहासिक समझौता पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी रही, वहीं अमेरिका इस डील को लेकर ज़्यादा ख़ुश नहीं दिखा। उसकी तरफ़ से लगातार प्रतिक्रिया आ…

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नीट छात्रा की मौत एक रहस्‍य- क्‍यों चुप रही पुलिस?

चुनाव में महिला सशक्‍तिकरण के नाम पर वोट तो ले लिया जाता है, महिलाओं के अकाउंट में पैसे भेजकर उनका विश्‍वास तो जीत लिया जाता है, लेकिन महिला सुरक्षा की गैरेंटी कौन लेगा? कौन घर-घर घोषणा पत्र लेकर वोट मांगने जाएगा, जिसमें बेटियों की हिफ़ाज़त की बात लिखी होगी? लेकिन आज के दौर में महिला,…

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वंदे मातरम् के 150 साल, हिल गई थी कभी इस गीत से अंग्रेज़ों की नींव

1875 में जब बंकीमचंद्र चटर्जी ने वंदे मातरम् गीत की रचना की थी, तब किसी ने सोचा तक नहीं होगा, कि यह गीत भारत की आज़ादी में ऐसी भूमिका निभाएगी, कि अंग्रेज़ों की नीव हिला देगी। अंग्रेज़ इस गीत की ताक़त से इतना डर गए थे, कि अंग्रेज़ों ने वंदे मातरम् के नारे पर रोक…

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लोकल ट्रेन में हुई हत्‍या, मुंबई की लाइफ़लाइन आसान नहीं

मुंबई की लाइफ़लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन मे मामूली से वादविवाद में किसी की हत्‍या कर दी जाए, तो यह बेहद गंभीर मामला है। पूरी मुंबई हर तरह से इस लोकल ट्रेन पर निर्भर करती है। सुबह और शाम के वक्‍़त भीड़ इस क़दर होती है, कि कभी-कभी चढ़ना और उतरना संभव नहीं हो…

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अपने ही पैर पर कुल्‍हाड़ी मारता बांग्‍लादेश, भूल गया 1971

1971 के लिबरेशन वॉर में भारत की मदद से जब बांग्‍लादेश का जन्‍म हुआ, जो कभी पूर्वी पाकिस्‍तान के नाम से जाना जाता था, तब किसी ने सोचा नहीं होगा, कि एक दिन यही बांग्‍लादेश अपनी पहचान मिटाकर दोबारा पाकिस्‍तान के नक्‍़शे क़दम पर इस तरह चल पड़ेगा, कि वो भारत को ही आंख दिखाने…

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शर्मनाक है समाजसेवा के नाम पर बेज़ुबान जानवरों की हत्‍या

इंसान की उत्‍पत्‍ती जबसे हुई उसने अपनी सुविधा के लिए वो सब कुछ किया जिससे उसका जीवन ज़्यादा से ज़्यादा आसान बन सके। इसके लिए उसने कई अविष्‍कार किए, खोजें की और इसी बढ़ती लालसा में वो इतना डूब गया, कि उसे इतना ध्‍यान भी नहीं र‍हा, कि उसने प्राकृतिक का कितना नुकसान किया। उसे…

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