- पेट्रोल-डीज़ल में क़रीब 90 पैसे की हुई वृद्धि
- इससे पहले 3 रुपये तक बढ़े थे दाम, CNG भी 2 रुपये हुआ था महंगा
लगातार बढ़ रहे है कच्चे तेल के दाम
अभी कुछ दिन पहले ही तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में क़रीब 3 रुपये की बढ़ोतरी की थी। अब एक बार फिर क़ीमतों में इज़ाफ़ा करते हुए पेट्रोल-डीज़ल में 90 पैसे तक की बढ़ोतरी कर दी है। है। कच्चे तेल का आयात, जो फरवरी में 69 डॉलर प्रति बैरल किया जा रहा था, वह अब 113 से 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। तेल कंपनियों को रोज़ाना क़रीब 1,500 करोड़ रुपये का घाटा हो रहा था। तेल कंपनियों का कहना था, कि इस बढ़ोतरी से कंपनी के घाटे में कुछ हद तक कमी आएगी। बता दे, कि ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते कच्चे तलों के दाम धीरे-धीरे आसमान छू रहे हैं। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले दिनों में सबको महंगाई की मार आम आदमी को झेलनी पड़ सकती है।
यह भी पढ़ें: पेट्रोल और डीज़ल के बढ़े दाम, CNG भी हुआ महंगा
90 पैसे तक की बढ़ोतरी के बाद क्या है क़ीमत?
क़रीब 90 पैसे क़ीमतें बढ़ने के बाद दिल्ली में पेट्रोल के दाम 97.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गया है, वहीं डीज़ल के दाम 90.67 रुपये प्रति लीटर से 91.58 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गए हैं। मुंबई में पेट्रोल अब 107.59 रुपये और डीज़ल 94.08 रुपये प्रति लीटर हो गई है। कोलकाता में पेट्रोल की कीमत में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है। यहां तेल के दामों में 96 पैसे की बढोतरी हुई है, जिससे पेट्रोल अब 109.70 रुपये प्रति लीटर हो गई, वहीं डीज़ल की कीमत 96.7 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। चेन्नई में पेट्रोल के दाम सबसे कम 82 पैसे की वृद्धि हुई है। यहां पेट्रोल 104.49 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की कीमत 86 पैसे बढ़ोतरी हुई, जो अब 96.11 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है।
ईरान-अमेरिका युद्ध तेल की क़ीमतों के बढ़ने का मुख्य कारण
वर्ष 2022 के बाद तेल की क़ीमतों में बढ़ोतरी की गई है, वो भी तब जब पूरा विश्व ईरान-अमेरिका के युद्ध के चलते परेशान है। तेल की क़ीमतों में लगातार इज़ाफ़ा होने का मुख्य कारण स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज है, जिसे ईरान अमेरिका के साथ हो रहे युद्ध में हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। ऊपर से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का अड़ियल रवैये ने कच्चे तेल की क़ीमतों को 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया है। फिलहाल इस युद्ध के ख़त्म होने की कोई संभावना नहीं दिख रही है, जो पूरे विश्व के लिए जिंता का विषय है, जहां पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था डबमगाती हुई दिखाई दे रही है।
2022 में इसी तरह हुई थी बढ़ोतरी
वर्ष 2022 में भी जब रूस और यूक्रेन का युद्ध शुरू हुआ था, तो तेल की कमी हुई थी, जिसके बाद तेल कंपनियों ने उस दौरान कई बार तेल की क़ीमतों में पैसे के हिसाब से इज़ाफ़ा किया था। इस बार के संकट को देखते हुए जिस तरह तेल कंपनी अब तक दो बार तेल के दाम बढ़ा चुकी है। इसे देखते हुए साल 2022 का पैटर्न फिर याद आता है। तेल कंपनिया जिस तरह घाटे में चल रही हैं और ऊपर से ये युद्ध, तो भविष्य में इसी तरह पेट्रोल और डीज़ल के दाम बढ़ते हुए दिखाई देंगे।
यह भी पढ़ें: देश में LPG की क़िल्लत! कितना सच?
भारत में अबतक सबसे कम बढ़ोतरी
हालांकि भारत अकेला ऐसा देश था, जहां पेट्रोल-डीज़ल के दाम में अभी तक बढ़ोतरी नहीं हुई थी और अभी भी पूरे विश्व की तुलना में भारत में पेट्रोल व डीज़ल की क़ीमतों में सबसे कम बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इससे पता चलता है, कि भारत ने इस युद्ध के बीच भी अपने प्रबंधन के चलते आम आदमी को संकट से बचाने के उपाय लगातार किए हैं। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण यही है, कि जब स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से किसी के तेल व गैस के जहाज नहीं आ पा रहे थे, ऐसे में भारत ईरान से लगातार वार्ता करते हुए अपने जहाज धीरे-धीरे निकलवा रहा था।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से की थी अपील
यही कारण है, कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने भविष्य को देखते हुए देश से जहां-जहां हो सके ऊर्जा बचाने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने पेट्रोल-डीज़ल बचाने से लेकर अगले 1 साल तक तक सोना ख़रीदने से भी मना किया था। इस अपील की शुरुआत प्रधानमंत्री ने ख़ुद अपने साथ चलने वाले काफ़िले को कम करके की। इसके बाद देशभर में इस अपील का असर देखने को लगामार मिल रहा है। इस अपील में वर्क फ्रॉम होम से लेकर ऑनलाइन मीटिंग की बात कही गई थी, जिसे कंपनिया अपना रही हैं।



