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कारगिल के रण से ऑपरेशन सिंदूर तक, अब राम मंदिर के CEO; जानिए कौन हैं पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा

पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला CEO बनाया गया है। जानिए कारगिल युद्ध, ऑपरेशन सिंदूर और उनके सैन्य करियर से जुड़ी खास बातें।
  • श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बने पहले CEO
  • क़रीब 40 वर्षों तक भारतीय वायूसेना में रहकर की देश की सेवा

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपना पहला CEO रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को चुन लिया है। पिछले कई महीनों से अयोध्‍या का राम मंदिर चंदा चोरी के विवाद से घि‍रा रहा। पूरे देश के राम भक्‍तों की निगाहें राम मंदिर पर लगी हुई थी। चोरी का मामला सामने आने के बाद कई इस्‍तीफ़े हुए, जांच-पड़ताल और गिरफ़्तारियां हुईं। विवादों में आने के बाद ट्रस्‍ट के सामने चुनौती भी थी और प्रश्‍न भी था, कि अब राम मंदिर का सही संचालन कैसे हो और आगे की बागडोर किस होथों में सौंपी जाए? इसके बाद ट्रस्‍ट ने अपने बैठक में पहली बार अयोध्‍या राम मंदिर में CEO को नियुक्‍त करने की बात चली।

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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पहले CEO

इसके बाद CEO पद के लिए आवेदन के अनुसार इंटरव्‍यू लिए गए। इंटरव्‍यू के बाद रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला CEO नियुक्त किया गया। जीतेंद्र मिश्रा, देवरिया के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं और उन्‍होंंने भारतीय वायुसेना में क़रीब चार दशक तक सेवा दी। इन चार दशकों के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण सैन्य ज़‍िम्मेदारियां संभालीं हैं। अब देश की सेवा के बाद जीतेंद्र मिश्रा को श्रीराम मंदिर की सेवा करने का अवसर मिला है, जहां वह मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, संचालन, सुरक्षा और सुविधाओं का ध्‍यान रखेंगे।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अहम योगदान

पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले को देश कैसे भूूलसकता है। उस निंदनीय और शर्मनाक आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्‍तान और वहां छिपे आतंकवदी संगठन को करारा जवाब देते हुए, वहां के आतंकी ठिकानों को तबाह कर दिया था और पाकिस्‍तान को झुकने पर मजबूर कर दिया था। इसी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा की भी अहम भूमिका रही थी, जिसमें उन्‍होंने पश्चिमी वायु कमान की कमान संभाली थी।

एयरफ़ोर्स में मिली बड़ी-बड़ी ज़‍िम्‍मेदारियां

जितेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायु सेना की फ़ाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफ़‍िसर कमांडिंग-इन-चीफ़ के तौर पर भी काम किया। इंटीग्रेटेड डिफ़ेंस स्टाफ़ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ़ भी रहे। इसके अलावा इंटीग्रेटेड डिफ़ेंस स्टाफ़ में डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग के डिप्टी चीफ़ के पद पर रहे।

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करगिल युद्ध में भी जि‍तेंद्र मिश्रा की अहम भूमिका

जितेंद्र मिश्रा को 3000 घंटे से ज़्यादा का फ़्लाइट एक्सपीरियंस है। उन्होंने 18 से ज़्यादा समय तक फ़ाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ़्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर मिराज 2000 एयरक्राफ़्ट टीम का हिस्सा भी रह चुके हैं। करगिल युद्ध में भी जितेंद्र मिश्रा ने अहम भूमिका निभाई थी। युद्ध के दौरान उन्‍होंने लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था। उन्‍होंने टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर सफल हमले किए थे।

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