- दक्षिण अफ्रीका के बाद ऑस्ट्रेलिया से भी हारी टीम
- उच्च कोटी की नहीं रही बल्लेबाजी
ऑस्ट्रेलिया और साउथ अफ्रीका सेमीफ़ाइनल में
भारतीय महिला क्रिकेट टीम T20 विश्वकप से बाहर हो गई है। वन-डे विश्व विजेता भारतीय महिला टीम इस T20 विश्वकप के ग्रुप स्टेज में तीसरे स्थान पर रही और आगे के लिए क्वॉलिफ़ाई नहीं कर पाई, क्योंकि ग्रुप स्टेज की टॉप 2 टीमें ही सेमिफ़ाइनल के लिए क्वॉलिफ़ाई कर पाती। भारत ग्रुप B में थी, जहां से ऑस्ट्रेलिया व साउथ अफ्रीका सेमीफ़ाइनल में प्रवेश कर चुकी हैं। ऑस्ट्रेलिया 10 अंक के साथ ग्रुप की टॉप टीम रही। ग्रुप A से इंग्लैंड और वेस्टइंडीज सेमीफ़ाइनल के लिए क्वॉलिफ़ाई कर गई हैं।
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साउथ अफ्रीका से हारना पड़ा भारी
भारतीय टीम को साउथ अफ्रीका से हारना खल गया। एक समय भारत ने दक्षिण अफ्रीका टीम पर शिकंजा जमा लिया था, लेकिन मारिज़ान कैप और ताज़मिन ब्रिट्स के बीच 97 रन की साझेदारी ने भारतीय महिलाओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया और 159 रन के लक्ष्य का पीछा कर मैच को 6 विकेट से जीत लिया। यहीं से भारतीय टीम पर दबाव बना, क्योंकि उसकी अगली चुनौती ऑस्ट्रेलिया थी, जिसे हर हाल में भारत को हरना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

ऑस्ट्रेलिया के सामने जूझती भारत
ऑस्ट्रेलिया के साथ हुए मैच में भारत ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी की और कप्तान हरमनप्रीत कौर की 56 रन की पारी की मदद से बोर्ड पर 170 रन लगाए और इस स्कोर पर ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम से लड़ा जा सकता था, लेकिन इस मैच में गेंदबाजी उच्च स्तर की नहीं रही। विकेट लेने के लिए गेंदबाज तरसते रहे, लेकिन ऑस्ट्रलिया के बल्लेबाजा शॉट लगाते रहे और इस मैच को आसानी से 7 विकेट से जीत लिया। एलिस पैरी ने 56 और एश गार्डनर के शानदार 53 रन की पारी खेली। यह मैच हारते ही भारत विश्वकप से बाहर हो गया।
बड़े बल्लेबाज रहे फ़्लॉप
भारत को दो बड़ी टीमों के सामने हार का सामना करना पड़ा। पहले भी देखा गया है, कि भारतीय महिला टीम को बड़ी टीमों के सामने जीतने में परेशानी रही है। इस विश्वकप में भी वही हुआ। बल्लेबाजी भी उस स्तर की नहीं रही, जैसी पहले देखी गई है। स्मृति मंधाना, जेमिमा रोड्रिग्स और कप्तान हरमनप्रीत कौर जैसे बड़े बल्लेबाज उच्च प्रदर्शन नहीं कर पाए और यह बड़ी वजह से हार की। इसके अलावा भारतीय गेंदबाजी में भी वह पैनापन नहीं दिखा और बड़ी टीमों के सामने विकेट लेने में जूझती नज़र आई।
मिले-जुले प्रदर्शन से नहीं चलता काम
कुल मिलाकर प्रदर्शन मिला-जुला रहा, लेकिन ऐसे स्तर पर बड़ी टीमों के सामने मिले-जुले प्रदर्शन से जीतना आसान नहीं होता। इसके अलावा जब 6 टीमों का ग्रुप हो और सिर्फ़ दो ही टीमें आगे जाने वाली हों, तो मुक़ाबले और भी ज़्यादा कड़े हो जाते हैं। यहां प्रदर्शन उच्च कोटी का होना आवाश्यक हो जाता है, वो भी तब जब ऑस्ट्रेलिया व साउथ अफ्रीका जैसी टीमें ग्रुप में हों।
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