- SIT ने प्रारंभिक रिपोर्ट पर दर्ज की FIR
- भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज
ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने की थी शिकायत
अयोध्या के राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी को लेकर चल रही जांच के अंतर्गत SIT ने प्रारंभिक रिपोर्ट जारी कर दी है, जिसका इंतज़ार बेसब्री से किया जा रहा था। दरअसल अयोध्या में चढ़ावा चोरी का मामला पूरे देश में एक अहम मुद्दा बन गया है और सब जानना चाहते हैं, कि राम मंदिर से आख़िर चढ़ावा चोरी करने वाले ये लोग कौन हैं? ख़ैर प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने 8 लोगों पर FIR दर्ज कर गिरफ़्तार कर लिया है। बता दें, कि यह मुकदमा श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर दर्ज किया गया।
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कौन हैं आस्था पर चोट करने वाले ये 8 लोग?
FIR के बाद 1) रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, 2) अनुकल्प मिश्र, 3) अविनाश शुक्ला, 4) करुणेश पांडेय, 5) लवकुश मिश्र, 6) रमाशंकर मिश्र, 7) सुभाष श्रीवास्तव, 8) मनीष कुमार यादव, इन 8 लोगों के खिलाफ़ जालसाजी, धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के तहत मामला दर्ज किया है। इसके अलावा कुछ और अज्ञात लोगों पर भी FIR दर्ज किया गया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316(5), 317 (4) सहित अन्य धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। मिली जानकारी के अनुसार इन आरोपियों को जल्द ही रिमांड में लेने के लिए फ़ैजाबाद के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अदालत में पेश किए जाएंगे।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफ़ा
इसके अलावा जो बड़ी ख़बर सामने आई है वो है, कि राम मंदिर ट्रस्ट से चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफ़ा दे दिया है। पिछले कई दिनों से दोनों के नाम की चर्चा जोरों पर थी, वहीं इनके इस्तीफ़े की मांग लगातार की जा रही थी। राम मंदिर में हुई चढ़ावा चोरी कोई मामूली घटना नहीं है। यह आस्था पर चोट और राम भक्तों से सीधे तौर पर विश्वासघात का मामला है। दोनों के इस्तीफ़े से यह तो साफ़ है, कि आरोपी बख़्शे नहीं जाएंगे। 8 लोगों के नाम आने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा भी शक के घेरे में हैं। SIT आरोपियों के बैंक खाते, संपत्ती, और मोबाइल रिकॉर्ड की लगातार जांच कर रही है और भविष्य में हो सके, तो इस मामले में और बड़े नाम निकलकर सामने आएंगे।
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मुख्यमंत्री ने कहा था- ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो जाएगा
चढ़ावा चोरी विवाद आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर 13 जून को SIT का गठन किया गया था। साथ ही मुख्यमंत्री ने कहा था, कि इस जांच के बाद ‘दूध का दूध और पानी का पानी’ हो जाएगा। इस SIT जांच के तहत लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन को शामिल किया गया है। इसके अलावा संतों ने मांग की है, कि SIT की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, जिससे दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो सके।






