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“लखनऊ अग्निकांड: आग में झुलसता भारत, आखिर ज़‍िम्मेदार कौन?”

जो कोचिंग सेंटर से छात्र हर रोज़ पढ़कर वापस चले आते थे, उन्‍हें क्‍या पता था, कि वो कोचिंग सेंटर एक दिन उनकी जान की वजह बन जाएगी।
  • अलीगंज के ऐनिमेशन कोचिंग सेंटर में लगी भयंकर आग
  • दर्दनाक हादसे में 15 छात्रों की मौत

हमारे देश की नई जानलेवा समस्‍या- अग्‍निकांड

आज हमारे देश में एक नई समस्‍या पैदा हो गई है और इस समस्‍या को जानलेवा का नाम दिया जाए तो ग़लत नहीं होगा। इस जाननेवा समस्‍या का नाम है- अग्‍निकांड, जो आए दिन नाजाने कितने मासूमों को अपना शि‍कार बना रही हैं। हाल ही में दिल्‍ली के मालवीय नगर में एक अवैध होटल में लगी आग ने 21 लोगों की जान ले ली थी, जिसमें एक ही परिवार के 9 लोग इस आग में झुलस गए थे। इसके तुरंत बाद मुजफ्फरपुर स्‍थित प्रसाद हॉस्‍पिटल के ICU में आग लगने से 6 लोगों की मौत हो गई थी। अब लखनऊ के अलीगंज ऐनिमेशन कोचिंग सेंटर में एक और दर्दनाक व भयावह अग्‍निकांड हुआ है, जो 15 विद्यार्थि‍यों की जान ले गया और 9 बूरी तरह घायल हुए।

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नहीं पता कब क्‍या होगा!

दिल्‍ली हादसे की तरह यहां भी वहीं मंजर दिखा और कु छात्र ऊपर से तार की मदद से नीचे आते दिखे और अपनी जान किसी तरह बचाई। कुछ तो ऊपर से कूदते नज़र आए और उन्‍हें बूरी तरह चोटें आई। ऐसी ख़बरे सुनने के बाद दिल सहम सा जाता है। जो कोचिंग सेंटर से छात्र हर रोज़ पढ़कर वापस चले आते थे, उन्‍हें क्‍या पता था, कि वो कोचिंग सेंटर एक दिन उनकी जान की वजह बन जाएगी। जीवन में कुछ नहीं पता कब क्‍या हो जाए, लेकिन हमें ऐसी घटनाओं से सीखने की ज़रूरत है, पर हम सीखना नहीं चाहते।

सुरक्षा नहीं, पैसा कमाने के ज़्यादा इंतज़ाम

दिल्‍ली के होटल में आग लगने के बाद जांच में पता चलता है, कि इसमें 6 कमरों के बजाय 25 कमरे बनाए गए थे और आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्‍ता था। साथ ही यहां कि‍सी भी सुरक्षा मानक का पालन नहीं किया जा रहा था। ऐसे ही हमारे देश में नाजाने कि‍तने होटल, अस्‍पताल और कोचिंग सेंटर्स हैं, जहां सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं है, लेकिन पैसा कमाने के हर इंतजाम किए जाते हैं। लोगों की जान इतनी सस्‍ती हो गई है, कि कोई सेफ़्टी के बारे में सोचता तक नहीं और तो और किसी के पास फ़ायर ब्रिगेड का नो ऑब्‍लिगेशन सर्टिफ़‍िकेट (NOC) भी नहीं होता। मतलब आग को इतना मामूली समझा जाता है, कि आग बूझाने के कोई भी इंतजाम नहीं कि‍ए जाते और जब आग कई ज़‍िंदगियों को बुझा देती है, उसके बाद हम होश में आते हैं।

हर अग्‍निकांड में शॉर्ट-सर्किट, प्रशासन को जागने की ज़रूरत

लखनऊ अग्‍निकांड में भी लापरवाही की ख़बरे सामने आ रही हैं। कहा जा रहा है, कि इस बिल्‍डिंग को 10 साल पहले ही गिराने के ऑर्डर दिए गए थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। नतीजा यह हुआ, कि 10 वर्ष बाद इसी बिल्‍डिंग ने 15 मासूम लोगों की जान ले ली और उनके घर को अंधकार से भर दिया है। क्‍या इस अंधकार की कोई रौशनी है? क्‍या वो 15 मासूम वापस आएंगे? जवाब तो बस एक ही है- नहीं। दरअसल हमारे देश को लालच, बेईमानी और भ्रष्‍टाचार ने ऐसा घेर लिया है, कि इसकी क़ीमत मासूम व आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

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चार अधि‍कारी सस्‍पेंड, 6 पर FIR  

ख़ैर लखनऊ अग्‍निकांड के बाद मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने आग लगने के कारणों का पता लगाने के लिए स्‍पेशन इंवेस्‍टिगेशन टीम (SIT) गठित की गई है। इसके अलावा अग्‍निशमन, विद्युत विभाग और लखनऊ विकास प्राधिकरण के चार अधिकारियों को सस्‍पेंड कर दिया है। इसके अलावा अलीगंज पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और उत्तर प्रदेश अग्नि सेवा अधिनियम की धाराओं के तहत 6 नामजद आरोपियों और कुछ अन्‍य व्‍यक्तियों के खिलाफ़ FIR दर्ज की कर ली है। इस दर्दनाक घटना के बाद इमारत को लेकर विकास प्राधिकरण की पहले की कार्रवाई और पुराने रिकॉर्ड जांच के दायरे में आ गए हैं।

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