दिल्‍ली अग्‍निकांड: क्‍यों हुई 21 लोगों की मौत, क्‍या कोई देगा जवाब?

21 लोगों की मौत के अलावा 45 से ज़्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सवाल यही उठता है, कि जांन गंवाने वाले और घायल हुए लोगों का कसूर क्‍या था?
  • अवैध रूप से बनाए गए थे 25 कमरे
  • लालच के आगे आम लोगों की जान सस्‍ती

इनका कसूर क्‍या था?

दिल्‍ली के मालवीय नगर के एक होटल में लगी भीषण आग ने 21 मासूम लोगों की जान ले ली। यह हादसा इतना दर्दनाक था, कि लोगों को अपनी जान बचाने के लिए 5वीं मंज़‍िल से खि‍ड़की से कूदना पड़ा, क्‍योंकि वहां आने जाने के लिए सिर्फ़ एक ही रास्‍ता था और जो लोग भाग नहीं पाए उन्‍होंने दम घूटने से अपनी जान गंवा दी। 21 लोगों की मौत के अलावा 45 से ज़्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सवाल यही उठता है, कि जांन गंवाने वाले और घायल हुए लोगों का कसूर क्‍या था? मिली जानकारी के अनुसार 8 घायल ICU में भर्ती हैं और 7 अन्य गंभीर रूप से वेंटिलेटर पर हैं।

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हर हादसे के पीछे होती है एक कहानी

हादसे के बाद सरकार ने मृतकों और घायलो के लिए मुआवजे का ऐलान तो कर दिया, लेकिन इतना काफ़ी नहीं है। सच तो यह है, कि इस हादसे की भरपाई कोई नहीं कर सकता। पैसे से हम मरहम लगाने का काम कर सकते हैं, लेकिन उन 21 लोगों की जान वापस नहीं लाई जा सकती। उनके सपनों को दोबारा ज़‍िंदा नहीं कर सकते। इस अग्‍निकांड का सबसे दर्दनाक हादसा तो तब हुआ, जब एक ही परिवार के 9 लोग इस आग में जल गए। क्‍या यह मुआवजा इस परिवार को दोबारा बसा सकता है। इसका सीधा जवाब मिलेगा नहीं, लेकिन कोई हादसा होने वाला है, इसके पीछे अपनी एक कहानी होती है और इस कहानी में आपको भ्रष्‍टाचार, पैसा कमाने का लालच, झूठ और बेईमानी साफ़ नज़र आएगी।

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ख़ामियाज़ा भुगदता आम आदमी

इस होटल में, जिसका नाम फ्लोरिश स्टे है, वहां सिर्फ़ 6 कमरे बनाने की ही अनुमति दी गई थी, लेकिन यहां अवैध रूप से 25 कमरे बना दिए गए थे। आख़‍िर इस होटल के मालिक़ लवकेश बजाज को किसने अनुमति दी थी 25 कमरे बनाने की। आदमी चंद पैसे कमाने के लिए नियम तोड़ता रहता है और यहीं से पैदा होती है बेईमानी, लालच, झूठ और भ्रष्‍टाचार। यहां बिल्‍कुल भी ख्‍़याल नहीं रखा जाता, कि इसका आम आदमी पर क्‍या असर पड़ेगा? सच तो य‍ह है, कि हर लालच और भ्रष्‍टाचार का ख़ामियाज़ा आम आदमी को भुगतना पड़ता है। चाहे वो क़ीमत किसी की जान ही क्‍यों न हो। इस हादसे के पीछे केवल इसका मालिक़ आरोपी नहीं है, बल्‍कि इस अवैध निर्माण से जुड़ा हर व्‍यक्‍ति इसका ज़‍िम्‍मेदार है। नगर निगम, पुलिस व प्रशासन की कमी इस अग्‍निकांड का दोषी है।

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सुरक्षा नियमों की अनदेखी ले गई मासूमों की जान

सुरक्षा को दांव पर रखकर इस होटल को चलाया जा रहा था। आग लगने पर यहां आग पर काबू पाने का कोई इंतज़ाम नहीं था। यहां तक की जब आग लगी, तब सारी ख़‍िड़किया पूरी तरह से पैक थे। खि‍ड़की बंद होने की वजह से आग और धुआं इतनी तेज़ी से फ़ैला, कि लोगों को समय ही नहीं मिला। किसी तरह आस-पास के लोगों ने वहां नीचे गद्दे रखे और तब होटल की खि‍ड़कियों से लोग ने कूदकर जान बचाई। इस दौरान फ़ायर ब्रिगेड ने क़रीब 47 लोगों को रेस्‍क्‍यू कर उनकी जान बचाई। ख़ास बात यह है, कि इस होटल के पास फ़ायर ब्रिगेड द्वारा फ़ायर सेफ़्टी के लिए जारी किया जाने वाला ‘नो ऑब्‍जेक्‍शन सर्टि‍फ़़‍िकेट’ (NOC) भी नहीं था। अब आप बताइये, कि इतनी बड़ी चूक के बाद भी होटल प्रशासन की आंखों के सामने चलाया जा रहा था और यह सोचा जा रहा था, कि जब ऐसा कुछ होगा, तब देखा जाएगा। अब जब 21 लोग इस लापरवाही के शि‍कार हुए है, तब क्‍या ये लोग इसका जवाब देने के लिए सामने आएंगे।  

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आरोपी लवकेश बजाज को 4 दिन की पुलिस रिमांड     

इस मामले में मुख्‍य आरोपी लवकेश बजाज को दिल्ली पुलिस ने बुधवार को ही गिरफ़्तार कर लिया था। पुलिस ने इस दर्दनाक अग्‍निकांड में गैर इरादतन हत्या, आग से संपत्ति को नुक़सान पहुंचाने, लोगों की जान ख़तरे में डालने और आग के मामले में लापरवाही समेत कई गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की है। इसके बाद आरोपी को साकेत कोर्ट में पेश किया, जहां कोर्ट ने लवकेश को 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। पुलिस ने अदालत में दलील दी, कि होटल से जुड़े दस्तावेजों और अन्य अहम जानकारियों को जुटाने के लिए हिरासत जरूरी है। इस अग्‍निकांड में दिल्ली पुलिस कई स्तरों पर जाकर जांच कर रही है। जांच के दौरान पता चला है, कि होटल में आग शॉर्ट सर्किट की वजह से लगी थी। जांच की प्रक्रिया अभी जारी है।

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