- हिरासत में आरोपी से होगी पूछताछ
- एक ही परिवार के 9 लोगों की हो गई थी मौत
तब जागता है हमारा प्रशासन
दिल्ली के मालवीय नगर में जिस तरह का दर्दनाक हादसा हुआ और 21 लोगों ने आग में झुलस कर अपनी जान गवां दी और कई लोग बूरी तरह घायल हुए, यह हमारे सिस्टम की बहुत बड़ी नाक़ामी में एक है। चंद पैसों के लिए कुछ लोग भ्रष्ट बन जाते हैं और उनका साथ देने के लिए 4 लोग और अपने फ़ायदे के लिए बेईमान बन जाते हैं। हमारे देश में ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे, जहां अवैध रूप से ऐसे होटल चलाए जा रहे हैं। ऐसे होटलों में पैसा बचाने और मुनाफ़ा अधिक कमाने के लिए आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जाता है। जब हादसे हो जाते हैं और लोगों की मौत हो जाती है, तब जागता है हमारा प्रशासन।
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बेईमानी की ईंट से बने होटलों की जांच-पड़ताल शुरू
इस हादसे से सबक लेकर अब प्रशासन जाग उठा है और इस मामले को ध्यान में रखकर सख्त कार्रवाई कर रही है। इस इलाक़े में अब लगातार जांच अभियान जारी है और पता लगाया जा रहा है, कि ऐसे अवैध होटल कहां-कहां पर हैं। साथ ही आसपास मौजूद कई होटलों के बोर्ड हटाए जा रहे हैं, जबकि इस हादसे के बाद कई होटल बंद पड़ें हैं और कोई डरकर इन होटलों को खोल नहीं रहा, क्योंकि ये ऐसे होटल हैं, जो कब मौत के होटल बन जाएं कुछ कहा नहीं जा सकता, क्योंकि इन होटलों में बेईमानी और लालच की ईंट लगी हुई हैं।
लोगों को जलता देख भागा मालिक़ अब पुलिस की गिरफ़्त में
होटल में आग लगा और लोगों को जला देख, जिस रह से होटल का मालिक़ आरोपी लवकेश बजाज जिस तरह से भाग निकला, यह बताता है, कि इनको आम लोगों की जान से कुछ लेना-देना नहीं, क्योंकि ऐसे लोगों के अंदर मानवता नहीं होती और सेवा के नाम पर ऐसे लोग भर-भर के पैसा कमाते हैं। इस आरोपी लवकेश बजाज को दिल्ली पुलिस ने अग्निकांड के दिन ही गिरफ़्तार कर लिया था। इसके बाद इसे साकेत कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने सख्त क़दम उठाते हुए आरोपी को 4 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, जहां उससे इस मामले की पूछताछ की जाएगी। इसके अलावा होटल से जुड़े दस्तावेजों को खंगाला जाएगा।

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क्या थी होटल की ख़ामिया?
इस मामले की जांच लगातार जारी है और अभी तक आग लगने की जो वजह सामने आई है, वो है- शॉर्ट-सर्किंट। अग्निकांड के बाद पता चला, कि यह होटल अवैध है और जहां सिर्फ़ बेड एंड ब्रेकफ़ास्ट (BNB) नियम के तहत सिर्फ़ 6 कमरे ही होने चाहिए थे, वहां अधिक से अधिक कमाई करने के लिए 25 कमरे बना दिए गए, जहां कुछ कमरे बेसमेंट में भी बनाए गए थे। इसके अलावा इस पांच मंजिला इमारत में फ़ायर डिपार्टमेंट द्वारा फ़ायर सेफ़्टी के लिए कोई ‘नो ऑब्जेक्शन’ (NOC) भी जारी नहीं की गई थी, जिससे साफ़ ज़ाहिर होता है, कि यहां आग से बचने के कोई इंतज़ाम नहीं थे, वहीं आने जाने के लिए भी सिर्फ़ एक ही रास्ता था।

8 लोगों ने कूदकर बचाई थी अपनी जान
बता दें, कि 3 जून को दिल्ली के मालवीय नगर के फ्लोरिश स्टे होटल में अचानक लगी भीषण आग में 21 लोगों की जलकर मौत हो गई थी। मृतकों में ज्यादातर विदेशी नागरिक थे। इसके अलावा अपने पिता का इलाज करने आए एक ही परिवार की इस घटना में दुखद मौत हो गई, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती। हादसे के दौरान 45 से अधिक लोगों को फ़ायर ब्रिगेड ने रेस्क्यू किया, वहीं 8 लोगों ने होटल की खिड़की से कूदकर अपनी जान बचाई थी।
क्या बच नहीं सकती थी 21 लोगों की जान?
पुलिस ने घटना के बाद FIR दर्ज किया, जिसमें गैर इरादतन हत्या, आग से संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, लोगों की जान ख़तरे में डालने और आग के मामले में लापरवाही जैसे कई गंभीर धाराएं शामिल हैं। सवाल यही उठता है, कि इस अवैध होटल में बने 25 कमरे की जानकारी क्या किसी को नहीं थी और अगर थी, तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई? अगर समय रहते कुछ क़दम उठाए गए होते तो आज वो 21 लोग इस दुनिया में मौजूद होते।



