- अमेरिका-ईरान युद्ध से पूरे विश्व की इकोनॉमी पर असर
- 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी क़ीमत
पूरा विश्व हिला इस युद्ध से
ईरान-अमेरिका युद्ध जबसे शुरू हुआ, तब से लेकर अब तक पूरा विश्व इस युद्ध का शिकार हुआ है। 110 दिनों से भी अधिक चले इस युद्ध ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। इस युद्ध में जिस तरह तेल रिफ़ाइनरी पर हमले हुए उसने कच्चे तेल की क़ीमतों में आग लगाने का काम किया। युद्ध से पहले जहां कच्चे तेल की क़ीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, वहीं युद्ध के बाद यह क़ीमत 120 से 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जिसके बाद दुनियाभर में तेल की कमी तो हुई ही, वहीं देश में पेट्रोल व डीज़ल की क़ीमत दिन-रात बढ़ने लगे और नतीज़ा महंगाई के रूप में सामने आया।
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स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ रहा चर्चा में
इस युद्ध में जिसकी सबसे ज़्यादा चर्चा रही है, वो थी- स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़। ईरान ने युद्ध में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में जिस तरह से घेराबंदी लगाकर रखी, उसने दुनियाभर के जहाजों के आवागमन पर पूरी तरह से रोक लगा दी, जिससे तेल और गैस का मंज़िल तक पहुंचना मुश्क़िल हो गया था। इसके अलावा सामनों से लदे जहाजों पर भी अटैक हुए, जिससे तेल, गैस और वस्तुओं की कमी होने लगी। इस युद्ध में स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ ईरान के लिए ताक़तवर साबित हुआ और यही कारण था, कि ईरान इस युद्ध में लंबे समय से टीका हुआ है। यही नहीं अमेरिका व इंज़रायल के ताबड़तोड़ हमलों के बीच ईरान भी मिसाइलों से हमले करता रहा।
ईरान के टारगेट पर रहे पड़ोसी देशों के ऑयल प्लांट्स
ईरान पर हो रहे हमलों में ईरान ने पलटवार करते हुए मिडिल ईस्ट के दूसरे देशों जैसे यूएई, ओमान, क़तर, अबू धाबी, रियाद, साऊदी अरब, कुवैत और बहरीन देशो में लगातार हमले करता रहा और ईरान के हमले का मुख्य केंद्र ऑयल प्लांट्स रहे, जिसमें दुनिया की सबसे बड़ी तेल रिफ़ाइनरी आरामको को भी नुक़सान पहुंचा। ऐसे हमले तेल की कमी और बढ़ते दामों का मुख्य कारण बने। इसके चलते पूरा विश्व ईरान-अमेरिका युद्ध की जल्द समाप्त होने की कामना कर रहा था, क्योंकि अब पानी सर के ऊपर जाने लगा था।
दुनिया को राहत देता युद्धविराम, कच्चा तेल अब कितने डॉलर?
क़रीब 110 दिन से अधिक चले इस युद्ध के बाद राहत की ख़बर आई है। ईरान-अमेरिका के बीच 60 दिनों के लिए युद्धविराम हो गया है और अमेरिका ने ईरान पर जो भी प्रतिबंध लगाए थे वो अस्थायी रूप से हटा लिए हैं। साथ ही अमेरिका ने जो भी समुद्र नाकाबंदी की थी एसे भी हटाया जा रहा है। यह ख़बर आते ही पूरे विश्व ने लंबी सांस ली है और कच्चे तेल के दाम में लगातार गिरावट आने लगी और एक समय जो क़ीमत 120 डॉलर के पार पहुंच गई थी, उसमें 1.4 प्रतिशत की कमी आई है। अभी कच्चे तेल की क़ीमत 78.41 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। इससे युद्ध से परेशान दुनिया ज़रूर ही राहत की सांस ले रही होगी।
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दुनिया के लिए खुला स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़
सबसे बड़ी बात यह रही, कि शांति समझौते के बाद स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ का रास्ता खुल गया है और धीरे-धीरे तेल व गैस से भरे जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ विवाद को लेकर क़रीब 4 महीने के आस-पास हो गए हैं। इस बीच अमेरिका ने ईरान के सामने युद्ध रोकने की कई शर्ते भी रखी, लेकिन ईरान ने कई शर्तों में अपनी असहमती ज़ाहिर करता रहा और युद्ध चलता रहा। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ रास्ता खुलना पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के नज़रिए से काफ़ी राहत की बात है। ऐसा माना जा रहा है, इससे बढ़ती महंगाई और पेट्रोल व डीज़ल के बढ़ते दामों में लगाम लगाने में मदद मिल सकती है।







