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अभिषेक बनर्जी: TMC के डॉन से डॉउनफ़ॉल तक की कहानी

पार्टी में एंट्री हुई नए चेहरे व भतीजे अभि‍षेक बनर्जी की, जिसके बाद कहानी में नया मोड़ आया और आज TMC को 15 वर्षों बाद बुरी तरह हार मिली, उसकी पठकथा वहीं से लिखनी शुरू हो गई थी।
  • TMC के दो-तिहाई नेता हुए बाग़ी
  • अभिषेक बनर्जी के रवैये से नाराज़ हैं नेता

चोर-पुलिस के खेल में फंसे अभिषेक बनर्जी

किसी ज़माने में TMC के डॉन रहे अभि‍षेक बनर्जी आजकल चोर-पुलिस के खेल में फंस गए हैं।  हाल ही में हुए बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी के भतीजे अभि‍षेक बनर्जी चुनावी रैलियों में शेर की तरह दहाड़ रहे थे। पूरे चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह बंगाल में ही रकिर चुनावी रैलियां कर रहे थे। उस समय अभि‍षेक बनर्जी ने तो यहां तक कह दिया था, कि ‘‘देखते हैं 4 तारिख़ को 12 बजे के बाद किस जल्‍लाद में कितनी ताक़त है और दिल्‍ली से इनको कौन बचाने आता है।’’ लोग सत्‍ता में इतने अंधे हो जाते हैं, कि वो यह भूल जाते हैं, कि सत्‍ता हाथ से निकलती भी है। शायद अभिषेक बनर्जी यह सोचते थे, कि यह बंगाल हमारा है और हम यहां के हमेंशा राजा रहेंगे। हम जो चाहे कर सकते हैं और हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। यहीं घमंड अभिषेक बनर्जी को महंगा पड़ गया।

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TMC को डूबोने में अभि‍षेक बनर्जी बड़ी वजह

इसके अलावा आज TMC का जो हाल है, इसके पीछे अभि‍षेक बनर्जी एक बड़ी वजह है। आज TMC पूरी तरह से बिखर गई है, उसके नेता आज बाग़ी हो गए हैं। हर बाग़ी नेता अभि‍षेक बनर्जी के रवैये से परेशान भी था और अपने नेता के रूप में भी नहीं देखना चाहता था। अब तक बाग़ी नेता ऋतब्रत बनर्जी जैसे जितने भी बड़े नेता है, उन्‍होंने साफ़ शब्‍दों में कहा है, कि हमको अभि‍षेक बनर्जी नहीं चाहिए। अगर वो पार्टी में हैं, तो हम पार्टी में नहीं रहेंगे। इस पर ममता बनर्जी ने अब तक चुप्‍पी साध रखी है और मानों वो अब भी पार्टी को डूबोने वाले अभि‍षेक बनर्जी के साथ खड़ी है, महज इसलिए,कि वो भतीजा है। ममता ने पार्टी के दिग्‍गज नेताओं को हमेशा भतीजे को आगे रखा, जबकि इन नेताओं ने TMC की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई है, इसलिए दर्द होता है।

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ममता बनर्जी के भतीजे का अड़‍ियल स्‍वभाव

ऐसा नहीं है, कि अभि‍षेक बनर्जी के अड़‍ियल स्‍वभाव की कहानी नई है। किसी ज़माने में शुभेंदु अधि‍कारी भी TMC और ममता बनर्जी के क़रीबी थे। नंदीग्राम आंदोलन में वो प्रमुख चेहरा बनकर उभरे और साल 2011 में ममता बनर्जी की जीत और मुख्‍यमंत्री बनने में अहम भूमिका निभाई थी। यहीं से जन्‍म हुआ था, नारा ‘मां-माटी-मानुष’ का जिसने ममता बनर्जी को सत्‍ता पर बैठाया था, लेकिन बाद में धीरे-धीरे वो इस नारे को भूलती चली गई और पार्टी में नए चेहरे व भतीजे अभि‍षेक बनर्जी की, जिसके बाद कहानी में नया मोड़ आया।

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वर्ष 2020 में रखी गई TMC के पतन की नींव

आज TMC को 15 वर्षों बाद बुरी तरह हार मिली, उसकी पठकथा वहीं से लिखनी शुरू हो गई थी। अभि‍षेक बनर्जी के आने से शुभेंदु अधि‍कारी का स्‍तर पार्टी में नीचे जाता रहा और सारे बड़े फ़ैसले अभि‍षेक बनर्जी लेने लगे, जो राजतीति का ‘र’ भी ठीक से नहीं जानते थे। शुभेंदु अधि‍कारी को हर बड़े कार्यक्रम से दूर रखा जाने लगा और न ही कोई राय उनसे लिया जाता। अपने कद को नीचा जाता देख और भतीजे के रवैये के चलते शुभेंदु अधि‍कारी ने वर्ष 2020 में पार्टी को छोड़ने का फ़ैसला किया। 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में अधि‍कारी बीजेपी की तरफ़ से ममता बनर्जी के ख़‍िलाफ़ लड़े और ममता को हरा दिया। 2026 में भी TMC और ममता बनर्जी को हराने के लिए नंदीग्राम और भवानीपुर से चुनाव लड़ा और ममता बनर्जी को एक बार फ‍िर पटखनी दी। इसके अलावा TMC की भी बुरी तरह हार हुई और इसका कारण अभि‍षेक बनर्जी और TMC की हिंसक और तुष्‍टिकरण की राजनीति।    

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घमंड नहीं करना चाहिए

वो कहते हैं ना जैसी करनी वैसी भरनी। हाल ही में जनता ने त्रस्‍त होकर अभि‍षेक बनर्जी की सड़क पर उनकी पिटाई की थी। यह बताता है, कि बंगाल की जनता को डरा-धमका कर उनकी आज़ादी छीन ली गई थी। उनके विकास का हर रास्‍ता बंद कर दिया गया था। जनता ने इस चुनाव में TMC से हिसाब लिया। ममता के भतीजे की हालत अब यह हो गई है, कि वो कभी हिरासत , तो कभी अदालत के चक्‍कर काट रहे हैं। हाल ही में फ़र्ज़ी हस्‍ताक्षर के चलते CID के सामने पेश होना पड़ा। इसके अलावा कई घोटाले (जैसे शि‍क्षक भर्ती घोटाला) में ED उनसे लगातार पूछताछ कर रही है। अभि‍षेक बनर्जी सत्‍ता के भूख में इतने अंधे हो गए थे, कि उनको पता ही नहीं चला, कि वो अंधे होते जा रहे हैं और यही अंधापन भतीजे को डूबो ले गया, इसलिए जब ताक़त हो तो घमंड नहीं करना चाहिए, बल्‍कि झुककर ज़्यादा से ज़्यादा सेवा करते रहने में ही परोपकार है।      

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