- शुरू हुई विमानों की उड़ान
- आर्थक तौर पर मज़बूत होगा प्रदेश
उत्तर प्रदेश का बदलता रूप
आजकल जिस तेज़ी के साथ उत्तर प्रदेश में काम हो रहा है, एसी तेज़ी से देश के और किसी राज्य में काम हो रहा होगा। वर्षों से पिछड़ा रहे उत्तर प्रदेश में जिस तेज़ी से काम हो रहा है, अगर उस तेज़ी से दशकों पहले काम हुआ होता, तो यूपी का सूरतेहाल कुछ और ही होता। किसी ज़माने में माफ़ियाओं के शिकंजे में रहा यह प्रदेश अंधेरी गलियों से निकलकर कामयाबी के नए आयाम छू रहा है। इसका एक और उदाहरण है- नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट। इससे पहले नई दिल्ली में इंटरनेशनल एयरपोर्ट था, लेकिन नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तैयार होने से अब भीड़-भाड़ वाली समस्या भी ख़त्म हो जाएगी। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर यात्रियों को सुविधा भी होगी। अब उन्हें हवाई यात्रा करने के लिए दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा।
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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का ऐतिहासिक क्षण
बता दें, कि नोएडा एयरपोर्ट के लिए वो क्षण बेहद ऐतिहासिक रहा जब इंडिगो की पहली फ़्लाइट लखनऊ से उड़ान भरकर नोएडा एयरपोर्ट पहुंची, वहीं फिर इसी ने फ़्लाइट नोएडा से बेंगलुरु के लिए उड़ान भरी। इसके अलावा नोएडा एयरपोर्ट का जो मुख्य आकर्षण रहा, वो 172 किसानों के साथ विधिवत उड़ान भरने वाला फ़्लाइट रही, जिसने नोएडा से लखनऊ के लिए उड़ान भरी। यह मौक़ा इसलिए भी ख़ास था, क्योंकि यह वही 172 किसान है, जिन्होंने जेवर में एयरपोर्ट के लिए अपनी ज़मीने सरकार को दी थी। यह फ़्लाइट उनके सम्मान में लखनऊ पहुंची, जहां उन सभी किसानों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुलाक़ात की और उन्हें सम्मान दिया।

कार्गो से मिलेगी आर्थिक तेज़ी
नोएडा से कार्गों विमान ने भी उड़ान भरी है इसके अलावा चेन्न्ई से एक कार्गो विमान नोएडा एयरपोर्ट पहुंचा। बता दें, कि 1 जुलाई से एयरपोर्ट से कमर्शियल व कार्गो सेवाएं नियमित रूप से शुरू हो जाएंगी। कार्गो सेवा के माध्यम से उत्तर प्रदेश के साथ-साथ उत्तर भारत के आर्थिक स्थिति में भी तेज़ी आएगी।
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नोएडा एयरपोर्ट की विशेषता
28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का उद्घाटन किया था, जिसे 11,200 करोड़ रुपये के निवेश के साथ तैयार किया गया है। एयरपोर्ट को मल्टी-मॉडल केंद्र के रूप में तैयार किया गया है, जो सड़क, रेल, मेट्रो और लोकल ट्रासपार्ट को आसानी से कनेक्ट करता है। यहां मल्टी-मॉडल कार्गो हब भी मौजूद है, जिसकी माल ढुलाई की क्षमता प्रति वर्ष 2.5 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा है। शुरुआती दौर में इस हवाई अड्डे पर क़रीब 1 करोड़ 20 लाख सालाना यात्रियों के संचालन की व्यवस्था की गई है, जिसे प्रति वर्ष 7 करोड़ यात्री तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।






