- अपने ही अपनों के ख़ून के प्यासे
- लालच, धन-दौलत और बेईमानी रिश्तों पर हावी
क्या हो गया है आज के इंसानों को, वो ऐसे घिनौने कृत्य करने लगा है, जिसे देख व सुन कर मानवता हर दिन शर्मशार होती जा रही है। किसी ज़माने में बंदर से धीरे-धीरे इंसान का रूप लेने वाला इंसान अब धीरे-धीरे जानवर से भी बद्दतर होता जा रहा है। इसके उदाहरण हमें हर रोज़ देखने, सुनने और पढ़ने को मिल रहे हैं, जहां क्रूरता की सारी हदें पार कर दी जाती हैं।
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अपने ही बन गए हैं दुश्मन
कभी घर के बाहर रहने वालों से हम सतर्क होकर रहते थे, लेकिन आज घर के अंदर अपने ही दुश्मन बनते जा रहे हैं। अपने परिवार के लोग की ही जो हमारे सबसे विश्वासपात्र होते हैं, जब वो धोखेबाजी करने लगे, तो इससे बड़े शर्म की बात कुछ नहीं। अपने ही दुश्मन बन जाए, तो गैरों से किसी प्रकार की अपेक्षा करना बेईमानी होगी। आज लालच और बेईमानी इस क़दर सर चढ़कर बोल रही है, कि आज के युग में अपनों से बड़ा दुश्मन कोई और नहीं हैं।
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नाबालिग ने बड़े भाई, भाभी और भतीजे का किया क़त्ल
हाल ही में गोरखपुर के बांसगांव थाना क्षेत्र से शर्मशार करने वाली ख़बर सामने आई थी, जिसमें 16 वर्ष के एक नाबालिग लड़के ने अपने बड़े भाई अमित गुप्ता, अपनी भाभी रंजना गुप्ता और मासूम तीन वर्षीय भतीजे रेयांश की धारदार हथियार से हत्या कर दी। इसमें एक और गोद ली गई भतीजी थी, जिसकी मौक़े पर नींद खुल गई और वो उसे नहीं मार पाया। यह वारदात रात को 3 बजे के आसपास की गई, जब सब लोग गहरी नींद में सो रहे थे और हत्यारा सबका गहरी नींद में जाने का इंतजार करता रहा। गोद ली गई भतीजी भाग कर अपने दादा जी के पास गई, जिसके बाद वो हत्यारा पकड़ा गया।
क्या मिला हत्यारे को?
सोचिए 16 वर्ष की आयू में उस नालायक लड़के के दिमाग में इतनी बड़ी दरिंदगी कहां से पैदा हो गई। इसका कारण भी वही है, धन-दौलत। आख़िर उस हत्यारे को यह करके कौन-सी जायदाद मिल गई। आज वो पुलिस के हाथों में है और उसका आगे का जीवन तहस-नहस हो गया है। आज ऐसे हत्यारे और नालायक लोग नाबालिग होने की आड़ में बड़े-गुनाहों को अंजाम दे रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है, कि हमारे देश में नाबालिग के लिए अलग क़ानून हैं। वो गुनाह तो बड़ा करते हैं, लेकिन उन्हें सजा ना देकर रिहैब सेंटर भेज दिया जाता है। ऐसे में ये समझदार नाबालिग, जिन्हें चाकू-छूरी चलाने व मर्डर करने की पूरी जानकारी है, वो ऐसे क़ानून की आड़ में फ़ायदा उठाकर प्रॉपर्टी के लालच में अपने सगे का क़त्ल कर देते हैं।
विश्वास का क़त्ल करती ये घटनाएं
पिछले कुछ वर्षों से ऐसे अपराधों की संख्या में लागातार बढ़ोतरी देखने को मिली है, जहां इंसानियत को तार-तार कर दिया जाता है, विश्वास का गला घोंट दिया जाता है। ये जुर्म करने वाले अपने हैं, जिनपर हम विश्वास करते हैं। आज का दौर इतना ख़राब हो गया है, कि अपने भी अपने नहीं रहे। आज इन घटनाओं ने विश्वास का क़त्ल कर दिया है। कोई प्रेमी अपनी प्रेमिका का, कोई प्रमिका अपने प्रेमी के टुकड़े-टुकड़े करवा देती है। कोई सगे भाई पर गोली चला देता है, कोई बेटा मां-बाप का गला घोंट देता है। सोचिए हमारा समाज किस मानसिकता का शिकार हो गया है। हम इंसान कितना गिर गए हैं? जिन हाथों ने हमें पाला-पोसा, जिसकी गोद में हम खेले, उसी का क़त्ल कर देने में हम तनिक क्षण का भी इंतज़ार नहीं करते।
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ईश्वर ने हमें इसान बनाया, मगर अर्थ भूल गए
ज़रूरत है, आज इस समाज को दोबारा रिफ्रेश करने की। जहां अपनापन, प्रेम, सादगी, विश्वास और संतुष्टि हो। जहां रिश्तों को प्राथमिकता दी जाए। जहां लोग मिलजुल कर एक साथ बैठे और अपने विचारों को साझा करें। मिलकर एक वक़्त की रोटी तो खाएं। हमें ईश्वर ने इंसान का रूप देकर धरती पर भेजा है, ताक़ि हम कुछ पुण्य का काम कर सकें, लेकिन हमने आधुनिकरण में खुद को इतना आधुनिक बना दिया, कि हम रिश्तों की मान-मर्यादा सब भूलते जा रहे हैं और हम पर हावी होता जा रहा है लालच, बेईमानी और दोहरा चरित्र। इंसान से अच्छे तो आज जानवर हो गए हैं।






