- हाल ही में 60 दिन का हुआ था संघर्ष विराम
- होर्मुज़ से निकलने लगे थे जहाज
अमेरिका-ईरान संघर्ष जारी
कहने के लिए अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन का युद्ध विराम हुआ था, जहां दोनों देश शांति समझौते को लेकर कई अहम मुद्दों पर बात करने के लिए तैयार हुए थे। मगर 60 दिन का युद्ध् विराम 6 दिन भी ठीक से नहीं चला। दरअसल यह पहली बार नहीं है, जब दोनों के बीच शांति समझौते की बात हुई हो। इससे पहले भी कई मुद्दो व शर्तों को लेकर अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत होती रही है, लेकिन नतीजा मंज़िल तक नहीं पहुंच पाया है और युद्ध जारी रहा।
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दुनिया ख़ुश थी युद्ध विराम से
इस बार भी दोनों देशों के बीच 60 दिन तक का युद्ध विराम हुआ, जिससे पूरी दुनिया ने गहरी सांस ली, क्योंकि पूरी दुनिया की नज़रे इस युद्ध पर टीकी हुई थी, क्योंकि इस युद्ध का बुरा असर पूरे विश्व पर भी पड़ रहा था, जिससे अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी। कच्चे तेल की क़ीमत लगातार बढ़ने लगी थी और इससे महंगाई का बढ़ना लाज़मी था। युद्ध विराम का सभी देशों ने स्वागत किया था, लेकिन जिस तरह से अमेरिका-ईरान के बीच दोबारा हमले शुरू हो गए हैं, उससे पूरा विश्व एक बार फिर चिंता से घिर गया है। दुनियाभर के लिए स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज की गुत्थी अभी तक सुलझ नहीं पाई है।
पश्चिम एशिया में मंडराता युद्ध का संकट
पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध का संकट मंडराने लगा है। दरअसल अमरीका ने आरोप लगाया है, कि ईरान ने ड्रोन से एक कमर्शियल तेल टैंकर पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए अमरीका ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज के पास स्थित ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इस हमले के बाद ईरान भी कहां चुप बैठने वाला था, उसने भी कुछ घंटों के भीतर ही कुवैत और बहरीन में स्थित अमरीकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए। इससे कहा जा सकता है, कि पश्चिम एशिया में स्थिती एक बार फिर नाजूक बन गई है। इस हमले के बाद बहरीन ने हवाई रेड सायरन सक्रिय कर दिया है और अपने नागरिकों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह भी दी है। कुवैत की हवाई रक्षा प्रणालियां सक्रिय कर दी गई हैं।
राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने दे दी है चेतावनी
इस बीच अमेरीका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है, कि यदि युद्ध का विराम उल्लंघन होता है, तो इससे भी अधिक सैन्य कार्रचाई की जागएी। बता दें, कि अमेरिका-ईरान दोनों एक-दूसरे पर अंतरिम समझौते का उल्लघंन करने का आरोप लगा रहे हैं। यह विश्व के नज़रिए से ठीक नहीं है। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से अब धीरे-धीरे जहाजों निकलना शुरू हो गया था, लेकिन इस हमले के बाद यह संकट एक बार फिर से पैदा न हो जाए। इस बार होर्मुज़ का संकट पैदा हुआ, तो इसके परिणाम घातक होंगे।
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इस्राएल-लेबनान के हमले जारी
दूसरी तरफ़ इस्राएल-लेबनान के बीच जारी संघर्ष कम होने का नाम नहीं ले रहा। दोनों एक दूसरे पर लगातार हमले कर रहे हैं। कुछ दिन पहले ही 60 दिनों के युद्ध विराम की ख़बर के बाद अमेरिका-ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में शांति वार्ता होनी थी, लेकिन दक्षिण लेबनान पर हुए हमले के बाद इस शांति वार्ता को स्थगित कर दिया गया। दरअसल ईरान शुरू से ही लेबनान का पक्षदर रहा है और वो हमेंशा लेबनान पर हमले रोकने की श़र्त रखता आया है। इस्राएल और हिज़्बुल्लाह की दुश्मनी जगजाहिर है। इसका पता इसी से चल जाता है, कि हाल ही में दोनों के बीच समझौते की ख़बरे आ रही थी, जिसे बाद में सिरे से ख़ारिज कर दिया गया।








