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वेनेजुएला में राकेश चौहान की मौत से अंगद सिंह की 10 साल की त्रासदी तक, विदेश में भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल

युवक अपना देश छोड़कर विदेश में ज़्यादा पैसा कमाने के लिए जाते हैं। कई परिवार तो आबाद हो गए, लेकिन कई लोग ग़लत जगह पांव रखने से गुमनामी के अंधेरे में चले गए।

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UPTET 2026: कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुई परीक्षा, 44 फ़र्ज़ी अभ्यर्थी गिरफ़्तार

यह परीक्षा प्रदेश के 60 ज़‍िलों के अंतर्गत 955 केंद्रों में आयाजित की गई थी। आयोग ने UPTET को पारदर्शी बनाने के लिए कड़ी सुरक्षा के इंतज़ाम किए थे।

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महिला T20 विश्व कप: फ़ाइनल में मेजबान इंग्लैंड की 6 बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से टक्कर

T20 विश्‍वकप में दोनों टीमों के प्रदर्शन को देखते हुए यह कहा जा सकता है, कि मुक़ाबला काफ़ी टक्‍कर का होगा।

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केतन हत्याकांड: रिश्तों के विश्वासघात ने उजागर किया इंसानियत का खोता चेहरा

हम इंसान बनने की कोशिश करें। हम इंसानियत और प्रेम की भाषा को समझें। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो ‘अपने’ शब्द की रौशनी धीरे-धीरे बुझ जाएगी।

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UP के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए ख़ुशख़बरी, जुलाई के बिजली बिल में मिलेगी राहत

पिछले 15 महीनों में पहली बार उत्‍तर प्रदेश की जनता को बिजली बिल में इतनी बड़ी राहत मिलने जा रही है।

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महिला T20 विश्वकप: किन बड़े कारणों ने भारत को कर दिया बाहर?

कुल मिलाकर प्रदर्शन मिला-जुला रहा, लेकिन ऐसे स्‍तर पर बड़ी टीमों के सामने मिले-जुले प्रदर्शन से जीतना आसान नहीं होता

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वेनेजुएला भूकंप: 1,450 मौतें, भारत ने ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ से बढ़ाया मदद का हाथ

‘ऑपरेशन अमिस्‍ताद’ भारत और वेनेजुएला की मित्रता को भी दर्शाता है। अमिस्‍ताद एक स्‍पेनिश शब्‍द है, जिसका अर्थ ही होता है- मित्रता।

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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: 8 आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफ़े की पुष्टि

राम मंदिर ट्रस्‍ट ने साफ़-साफ़ शब्‍दों में कहा है, कि मामला गंभीर है और कोई भी बख्‍़शा नहीं जाएगा।

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अयोध्या चढ़ावा चोरी: SIT रिपोर्ट में 8 आरोपी बेनकाब, चंपत राय ने सौंपा इस्तीफ़ा

अयोध्या में चढ़ावा चोरी कोई मामूली घटना नहीं है। यह आस्‍था पर चोट और राम भक्‍तों से सीधे तौर पर विश्‍वासघात का मामला है।

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लखनऊ अग्‍निकांड: क्‍योंकि सुरक्षा जरूरी है

आज की तारिख़ में पढ़ना जितना ज़रूरी है, वैसे ही हमारी सुरक्षा भी बेहद ज़रूरी है, क्‍योंकि जब हम ही सुरक्षि‍त नहीं रहेंगे, तो आगे के बारे में सोचना सब व्‍यर्थ है।

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“गोरखपुर हत्याकांड: अपने ही बन रहे क़ातिल, आख़‍िर कहां जा रहा है समाज?”

हम रिश्‍तों की मान-मर्यादा सब भूलते जा रहे हैं और हम पर हावी होता जा रहा है लालच, बेईमानी और दोहरा चरित्र। इंसान से अच्‍छे तो आज जानवर हो गए हैं।        

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