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वेनेजुएला में राकेश चौहान की मौत से अंगद सिंह की 10 साल की त्रासदी तक, विदेश में भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल

युवक अपना देश छोड़कर विदेश में ज़्यादा पैसा कमाने के लिए जाते हैं। कई परिवार तो आबाद हो गए, लेकिन कई लोग ग़लत जगह पांव रखने से गुमनामी के अंधेरे में चले गए।
  • 1 महीने बाद भारत पहुंचा शव, तो हुआ शक
  • राकेश चौहान के शरीर में कई जगह लगे थे कट

राकेश चौहान के दोबारा पोस्‍टमार्टम ने खड़े किए सवाल

हाल ही में वेनेजुएला की राजधानी काराकास से एक पीड़ादायक और झकझोर देने वाली ख़बर मिली, जहां उत्‍तर प्रदेश के देवरिया के रहने वाले 33 वर्ष नाविक राकेश चौहान की मौत हो गई थी, जिसके बाद उनके शव को भारत पहुंचने में 1 महीने से ज़्यादा का वक़्त लगा था। भारत में शव पहुंचते ही परिवार ने आशंका में उनका दोबारा पोस्‍टमार्टम किया, जिसमें चौकाने वाली रिपोर्ट सामने आई। इस रिपोर्ट के अनुसार उनके शरीर के कई अंग जैसे गुर्दे, लि‍वर, हृदय, मस्‍तिष्‍क और फेफड़े निकाल लिए गए हैं, जो सीधे तौर पर अंग तस्‍करी की तरफ़ इशारा करता है।

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पत्‍नी रंजना चौहान ने उठाया मामला

राकेश चौहान एक्‍सफ़‍िनिटी मैरिटाइम सर्विसेज में फ़‍िटर के पद पर काम कर रहे थे, जो नवंबर 2025 से ही वेनेजुएला गए हुए थे। बताया जा रहा है, 7 मई 2026 को वेनेजुएला में कार्गो शिप (मालवाहक जहाज) पर उनकी मौत हो गई थी। इसके बाद परिवार वालों को ख़बर दी गई, कि उनकी मौत हार्ट अटैक से हुई है। यह मामला तब सामने आया जब उनके शव को भारत आने में 1 महीने का वक़्त लगा, जिसके बाद उनकी पत्‍नी रंजना चौहान ने इस मामले को उठाया। पति की मौत जिस तरह हुई और शव आने में 1 महीना लगा और दोबारा हुए पोस्‍टमार्टम में उनके कई अंग गायब होने की पुष्‍टि हुई, उसने इस मामले को और गंभीर बना दिया।

मामले की गंभीरता के बाद जागी सरकार

पत्‍नी के आरोपों के बाद भारतीय दूतावास ने इस गंभीर मामले को लेकर वहां के अधि‍कारियों से संपर्क किया है और राकेश चौहान की मौत की जांच करने की मांग उठाई है। पत्‍नी रंजना ने सरकार से भी इंसाफ़ दिलाने की अपील की है। पत्‍नी ने यह भी आरोप लगाया है, कि कंपनी ने मौत के सही कारणों को पेश नहीं किया, बल्‍कि कारणों को छिपाया जा रहा है। रंजना की मांग को लेकर सरकार देर से ही सही, लेकिन जागी है और मामले के तूल पकड़ते ही विदेश मंत्रालय ने बयान भी जारी किया है, जिसमें उन्‍होंने राकेश की मौत व अंग ग़ायब होने का मामला उठाते हुए अधि‍कारियों से तुरंत जांच करने को कहा है।

विदेश में भारतीयों की सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने एक बार फ‍िर आमदनी के लिए भारत से विदेश जा रहे लोगों के सामने विदेश में सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। विदेश में जाकर कमा रहे युवकों के लिए देश सुरक्षि‍त आना एक चुनौती ही है। ऐसी कई घटनाएं हैं, जहां युवक कभी वापस नहीं आ पाए या उनके शव घर लौटे और कारण अलग-अलग बताए गए और मामला ख़त्‍म कर दिया गया। कई युवक पैसा कमाने के चक्‍कर में जिस काम के लिए सेलेक्‍ट होकर विदेश जाते हैं, लेकिन वहां जाते ही पता चलता है, कि उनसे कुछ और ही काम कराया जा रहा है और आवाज़ उठाने पर उनके साथ ग़लत किया जाता है। पासपोर्ट उनसे ले लिया जाता है, जिससे वह भारत वापस लौटने पर असमर्थ हो जाते हैं।

अंगद सिंह के 10 साल की त्रासदी की कहानी

उत्‍तर प्रदेश, ज़ि‍ला महाराजगंज के पनियरा गांव के रहने वाले अंगद सिंह के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था। वो यहां ट्रक ड्राइवर के रूप काम किया करते थे और अच्‍छा-ख़ासा काम चल रहा था। वर्ष 2015 में वो अपने पहचान के दोस्‍त के बहकावे में आकर साउदी की तरफ़ नई उम्‍मीदों को लेकर बढ़े, लेकिन वहां जाने के बाद अंगद को पता चला, कि वो तो फंस गए हैं। उनसे ड्राइवरी का काम कराने के बजाए जानवरों को चराने का काम दिया जाने लगा और दूसरे ग़लत काम कराए जाने लगे। विरोध करने पर उनके साथ क्रूरता का व्‍यवहार किया जाने लगा। भागने की कोशिश में अंगद को जेल तक जाना पड़ा। विदेश में फ़ंसा बेचारा अंगद दिन-रात यही सोचता था, कि वह अपने मुल्‍क कब लौटेगा या कभी ज़िंदा वापस जा पाएगा, कि नहीं और 10 साल तक वह विदेश में फंसा रहा।

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परिवार वालों ने तो अंगद को मान लिया था मृत

परिवार वालों ने तो अंगद को मृत तक मान लिया था, कि इतने दिन हो गए अब अंगी कभी नहीं लौटेगा, लेकिन छोटा भाई बाली सिंह उसने उम्‍मीद नहीं छोड़ी। 10 वर्षों की तपस्‍या के बाद और ज़मीन-जायदाद बचेने के बाद भाई को वापस भारत लाने में सफ़ल रहा। अंगद सिंह तो घर वापस आ गए, लेकिन उनके 10 साल की पीड़ा पर मरहम कौन लगाएगा? वो 10 साल जो उन्‍होंने गंवाए उसकी भरपाई कौन करेगा? वो आदमी जिसने अंगद के साथ धोखा किया और जीवन ख़राब किया उस धोखेबाज को सजा कौन देगा?  

कई युवक नहीं लौट पाते वतन

इस कहानी के पीछे और जो देवरिया के राकेश चौहान के साथ हुआ, यह बताता है, कि विदेश में जाकर काम करना आज भी चुनौती बनी हुई है। विदेश में ऐसी कई कंपनियां है, जो फ्रॉड हैं और बाहर के देशो से युवकों को बुलाकर ग़लत काम करवाते हैं। एक बार इनके चंगुल में फंस गए, तो निकलना आसान नहीं होता और जो निकलकर अपने वतन लौट आया उसे लगता है, कि उसने दूसरा जन्‍म लिया है। हमारी सरकार को इन मामलों पर ध्‍यान देना चाहिए, कि कोई फ्रॉड लोग या कंपनी किसी आम आदमी व उनके परिवार का जीवन ख़राब न करे। भारत से विदेश जाने वाले अधि‍कतर लोग गांव से होते हैं और ग़रीबी के चलते अपना देश छोड़कर विदेश में ज़्यादा पैसा कमाने के लिए जाते हैं। इसमें कई परिवार तो आबाद हो गए, लेकिन कई लोग ग़लत जगह पांव रखने से गुमनामी के अंधेरे में चले गए।  

भारत सरकार करे मदद

भारत सरकार आज बड़े-बड़े विकसित देशों के साथ बड़ी-बड़ी डील कर रही है, जिसमें देश को विकसित बनाने के कई समझौते कर रही है। सरकार विदेश में काम कर रहे भारतीय युवाओं की सुरक्षा की भी चर्चा करे। जो लोग वहां जाकर फंस जाते हैं और कई झंझटो के चलते भारत आने में असमर्थ हो जाते हैं, उनकी मदद के लिए सरकार को आगे आना होगा। उसके लिए कुछ नियम तय करने होंगे, जिससे की भारत के कर्मचारियों के साथ किसी प्रकार का शोषण ना किया जा सके। साथ ही जो भी फ्रॉड लोग या कंपनियां हैं, उनपर भी कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।

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