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केतन हत्याकांड: रिश्तों के विश्वासघात ने उजागर किया इंसानियत का खोता चेहरा

हम इंसान बनने की कोशिश करें। हम इंसानियत और प्रेम की भाषा को समझें। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो ‘अपने’ शब्द की रौशनी धीरे-धीरे बुझ जाएगी।
  • केतन को लोहागढ़ किले से दे दिया था धक्‍का
  • केतन-सिया की होने वाली थी शादी

नए अपडेट के साथ जीती दुनिया

हां दुनिया काफ़ी बदल गई है, एड्वांस हो गई है, नए-नए तौर-तरीक़ों से जीने लगी है ये दुनिया। हर दिन नए ट्रेंड और अपडेट के साथ जीने वाली दुनिया, सच में बहुत बदल गई है, लेकिन इस बदलाव की ख़ास बात यह है, कि इसमें धोखेबाजी, बेईमानी, रिश्‍तों के साथ विश्‍वासघात, झूठा स्‍टेटस और झूठी हंसी का बोलबाला होता जा रहा है। केतन हत्‍याकांड में बदलती दुनिया के इन ख़ास बातों एक सटीक उदाहरण देखने को मिल जाते हैं।

यह भी पढ़ें: “गोरखपुर हत्याकांड: अपने ही बन रहे क़ातिल, आख़‍िर कहां जा रहा है समाज?”

अपने ही अपनों के ख़ून के प्‍यासे

केतन हत्‍याकांड ने बता दिया, कि आज के रिश्‍ते, जो स्‍टेटस व सोशल मीडिया प्‍लेटफ़ॉर्म पर मजबूत दिखते है, यह सब महज दिखावा है। सच तो यह है, कि आज के बदलते दौर में अपने ही रिश्‍ते कमजोर होते जा रहे हैं। आज रिश्‍तों को समझने-परखने की शक्‍ति कम होती जा रही है। अगर ऐसा ना होता, तो आज के इस बदलते दौर में अपने ही अपनों के ख़ून के प्‍यासे ना हो जाते। यह विडंबना है, कि जिसे हम आधुनिक युग कहते हैं, वहां भाई-बहन, माता-पिता, पति-पत्‍नी और प्रेमी-प्रेम‍िका सबके मन में एक-दूसरे के प्रति नफ़रत पैदा होती जा रही है।

रिश्‍तों में विश्‍वासघात की परिभाषा

किसी ज़माने में कहा जाता था, कि हमारा ख़ून का रिश्‍ता है और उस खून के रिश्‍तों पर हम आंख बंद करके विश्‍वास किया करते थे, लेकिन यह किसी ज़माने की बात थी। अब हम मॉर्डन हो गए हैं। हमारे देश में रिश्‍तों में विश्‍वासघात की अलग-अलग परिभाषा हर दिन देखने को मिल रही है और इससे बड़ा कष्‍ट और कुछ हो ही नहीं सकता, कि आज अपने ही अपने नहीं रहे, जिनपर हम आंख मूंद कर विश्‍वास करते हैं। केतन अग्रवाल ने अपनी मंगेतर सिया गोयल पर ऐसा ही विश्‍वास किया था, लेकिन सिया ने क्‍या किया? अपने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर केतन के मर्डर की योजना बनाई और पुणे स्‍थि‍त लोहागढ़ किले में घूमने के इरादे से ले जाकर किले से ही ढकेल दिया और उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में लगी हुई है और जल्‍द ही इसका पर्दाफ़ाश हो जाएगा।  

कई उदाहरण, जिन्‍होंने रिश्‍तों को किया कलंकित

यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्‍कि इससे पहले भी मेरठ की घटना कई दिनों तक चर्चा में रही थी, जहां अपनी ही पत्‍नी ने अपने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर पति के टुकड़े-टुकड़े करवा दिए थे। साथ ही दिल्‍ली की दिल दहला देने वाली श्रद्धा वालकर मर्डर केस, जहां लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे प्रेमी ने अपनी ही गर्लफ्रेंड की हत्‍या कर उसके शव के 35 टुकड़े कर फ्रिज में रख दिया था। यही नहीं देशभर से यह ख़बर आती रहती है, कि बेटे ने ही अपने पिता को मार डाला, भाई ने अपने ही बड़े भाई व भाभी को धन के लालच में मार डाला। कहना का मतलब यह है, कि आज इंसान इतना गिर गया है, कि ऐसी घिनौने कृत्‍य को करने से पहले एक बार भी नहीं सोचता।

घर तो बनवाया था सुरक्षा के लिए

हम अपनी सुरक्षा के लिए घर बनवाते हैं, ताक़ि‍ ह‍म बाहरी लोगों से महफ़ूज रह सकें, लेकिन जब घर के अंदर बैठे ही अपने दुश्‍मन बन जाएं तब कौन सी सुरक्षा काम आएगी। उसके लिए कौन-सा घर बनवाएं। आज के तेज़ी से भागते इस दौर में लोग के पास समय का अभाव है, लोगों के पास धैर्य नहीं रहा, बर्दाश्‍त करने की क्षमता नहीं रही, लालच, दिखावा, बेईमानी, क्रोध इस क़दर बढ़ गया है, कि ये रिश्‍तों पर हावी होते जा रहे हैं। इनके सामने अपने भी दुश्‍मन बन गए हैं। आज ज़रूरत है, कि हम अपने आप पर काम करें। हम इंसान बनने की कोशिश करें। हम इंसानियत और प्रेम की भाषा को समझें। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो ‘अपने’ शब्द की रौशनी धीरे-धीरे बुझ जाएगी।

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