पांच राज्यों में मतदान के बाद क्या कहता है एग्जिट पोल?
देश को इन पांचों राज्यों के परिणाम का इंतज़ार है, जो वैसे तो 4 मई को ही आधिकारिक रूप से घोषित किए जाएंगे, लेकिन इससे पहले कई एजेंसियों ने एग्जिट पोल जारी कर दिया है।
Your blog category
देश को इन पांचों राज्यों के परिणाम का इंतज़ार है, जो वैसे तो 4 मई को ही आधिकारिक रूप से घोषित किए जाएंगे, लेकिन इससे पहले कई एजेंसियों ने एग्जिट पोल जारी कर दिया है।
उत्तर प्रदेश में अब जंगलराज और गुंडाराज नहीं, बल्कि यहां अब ऊंची-ऊची इमारते, एक्सप्रेस-वे, चौड़ी सड़के और दौड़ती मैट्रो नज़र आती हैं।
SRH ने मुंबई इंडियन्स (MI) के ख़िलाफ़ 244 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा कर सबको चौंका दिया।
294 सीटों की लड़ाई में यह आज़ादी के बाद से अब तक की सबसे ज़्यादा रिकॉर्ड वोटिंग है। सरकार बनाने के लिए पार्टी को 148 सीट जीतने होंगे।
पहले चरण की तरह ही मतदाताओं में उत्साह देखने को मिला है।
हिंसक माहौल में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना चुनाव आयोग के लिए इस बार चुनौती से कम नहीं था।
23 अप्रैल को हुए पहले चरण के चुनाव में 93.19 प्रतिशत की रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी।
IPL 2026 में राजस्थान रॉयल्स (RR) पहली टीम है, जिसने पंजाब को हराया है।
अमित शाह स्पष्ट रूप से कहा, कि बंगाल की जनता अब बदलाव चाहती है और पहले चरण में रिकॉर्डतोड़ मतदान होना इसका प्रमाण है।
तीनों भाई-बहन घर से 1 किमी दूर जंगल में आम खाने के लिए गए थे, लेकिन शाम 6 बजे तक जब वह वापस घर नहीं लौटे।
चौके-छक्को के इस दौर में जब गेंदबाजी अपने चरम पर हो, तो आंखे विश्वास नहीं करती, कि यह वही IPL है।
निकोलस पूरन तो अपने बूरे फ़ॉर्म से गुज़र रहे हैं। ख़राब प्रदर्शने के चलते अब प्लेइंग 11 में उनके खेले जाने पर ही सवाल उठाए जाने लगे हैं।
इन दावों के बाद देखना होगा, कि 4 मई का परिणाम बदलाव की क्रांति लेकर आएगा या ममता सरकार पर ही जनता का भरोसा बरक़रार रहता है।
संजू सैमसन का जादुई बल्ला नहीं चला और नतीजा यह रहा, कि चेन्नई की पूरी टीम पूरे 20 ओवर रन बनाने के लिए संघर्ष करती रही।
यह दशकों पहले वाला गोरखपुर नहीं रहा, जहां सड़क पर गड्ढे और कूड़े के ढेर देखने को मिलते थे।
इस IPL में दूसरी दफ़ा दोनों का आमना-सामना हुआ, लेकिन दोनों बार SRH ने बाज़ी मार ली है।
पंजाब का यह प्रदर्शन यह बताता है, कि पंजाब इस बार ख़िताब जीतने के पक्के इरादे से मैदान में उतरी है।
पिछले कुछ महीनों में बिहार की बयार में काफ़ी बदलाव देखने को मिला है। क़रीब 2 दशक तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने जब अचानक राज्यसभा मे जाने का फ़ैसला किया
I-PAC रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मामले में दखल देने की कोशिश की, जिससे सुप्रीम कोर्ट कड़ी नाराजगी जताई है।
स्थानीय लोगों का कहना है, कि हाथियों का आतंक इतना बढ़ गया है, कि यहां सब डर के माहौल में जी रहे हैं।