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क्‍या खान सर आरोपी हैं? कोचिंग सेंटर्स की पोल खोलता खान सर विवाद!

खान सर: वो शि‍क्षक, जिसको बिहार को बदलने का श्रेय दिया गया हो, वो एक दम से ‘फैज़ल खान’ बनकर फ़रार कैसे हो सकता है।

खान सर बनाम रौशन सर

हाल ही में बिहार के पटना में एक नया विविद खड़ा हुआ था, जिससे पूरा देश वाकिफ़ है। यह मामला है खान ग्‍लोबल स्‍टडीज़ (KGS) पर हुए तोड़फ़ोड़, हमले और उसके बाद हुई फ़ायरिंग का, जिसमें खान सर के साथ-साथ रौशन सर का नाम सामने आया था। इसके बाद हंगामा इतना बढ़ गया, कि नौबत गिरफ़्तारी तक पहुंच गई। खान सर ने इस हमले का ज़‍िम्‍मेदार रौशन सर को ठहराया, जिसके बाद रौशन सर की गिरफ़्तार हुई। पुलिस ने इसके बाद CCTV फ़ुटेज को खंगाला, जिसके बाद यह बात सामने आई, कि फ़ायरिंग खान सर के गार्ड्स के माध्‍यम से हुई थी, जिसके बाद पुलिस खान सर की गिरफ़्तारी का मन बनाने लगी, लेकिन खान सर का बयान था, कि उन्‍होंने अपने सेल्‍फ़ डिफ़ेस के लिए फ़ायरिंग कराई थी।

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गिरफ़्तारी पर रोक से सब चौंक गए

इस विवाद के बाद कई जगह से ये आवाज़े उठने लगी, कि खान सर का झूठ सामने आ गया है और अब उन्‍हें गिरफ़्तार होने से कोई रोक नहीं पाएगा। इसी बीच यह भी ख़बर सामने आई थी, कि खान सर गिरफ़्तारी से बचने के लिए फ़रार हो गए हैं, लेकिन मामला कोर्ट तक पहुंचा, जहां अदालत ने दलीले सुनने के बाद खान सर को अंतरिम जमानत दे दी, वहीं रौशन सर अभी भी जेल में हैं और अगली सुनवाई तक इंतज़ार करना होगा। दूसरी तरफ़ खान सर के वकील ने अदालत में केस डायरी प्रस्‍तुत की है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह वही खान सर हैं

यह वही खान सर हैं, जिन्‍हें बिहार के राज्‍यपाल आरिफ़ मोहम्‍मद खान ने ‘चैंपियंस ऑफ चेंज बिहार अवार्ड 2024’ से सम्मानित किया था। यह वही खान सर हैं, जो कभी ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में बिग बी अमिताभ बच्‍चन के सामने नज़र आए थे। उस समय इतनी अच्‍छी छवि रखने वाले खान सर को अचानक अपराधी बताया जाने लगा, यह उचित नहीं लगता। वो शि‍क्षक, जिसको बिहार को बदलने का श्रेय दिया गया हो, वो एक दम से ‘फैज़ल खान’ बनकर फ़रार कैसे हो सकता है? यह वही खान सर हैं, जो कल तक बिहार से लेकर देश के दूसरे राज्‍यों तक विद्यार्थि‍यों के प्रेरणा बने हुए थे, वो आज कैसे सबको खटकने लगे। हम ऐसी घटना, जिसके बारे में पूर्ण रूप से जानते तक नहीं, लेकिन एक ख़बर चलाई जाती है, जिसके बाद खान सर को ‘फैज़ल खान’ के रूप में पेश किया जाता है।

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ऐसा नहीं होना चाहिए

हमारे देश में ऐसा बिल्‍कुल नहीं होना चाहिए, जिसे हम विकसित भारत के रूप में देख रहे हैं, वहां मुस्‍लिम होने पर अपराधी तय नहीं होने चाहिए। हमें देखना होगा, कि उस इंसान का व्‍यक्‍तित्‍व क्‍या रहा है, उसका समाज में क्‍या योगदान रहा है? एक व्‍यक्‍ति जि‍सने बिहार के ग़रीब विद्यार्थि‍यों को शि‍क्षा में नई पहचान दिलाई हो, उसकी गिरफ़्तारी का इंतज़ार करना हमारे अहंकार को दर्शाता है, कि कैसे कोई हमसे आगे निकल सकता है?

लाखों में बिकती शिक्षा

यह विवाद एक तरह से हमारे देश में जो कोचिंग सेंटर्स की भीड़ लगी है, उसकी भी पोल खोलता है। हर कोचिंग सेंटर में आपस में ही नंबर वन बताने की प्रतिस्पर्धा लगी हुई है। कोई कोचिंग इंस्‍टीट्यूट किसी से कम नहीं है। आज के दौर में ये कॉम्‍पिटिशन इतना बढ़ गया है, कि हर इंस्‍टीट्यूट के पास टॉपर्स हैं। हर कोचिंग सेंटर ये दावा करने में लगे रहते हैं, कि टॉपर्स हमारे ही हैं। अख़बारों में पूरा एक पन्‍ना टॉपर्स से भरा होता है। सड़क पर टॉपर्स की बड़ी-बड़ी होर्डिंग लगा दी जाती है। आख़‍िर क्‍यों, इसके पीछे का मक़सद क्‍या है? इसका एक ही मतलब है और वो है छात्रों को आकर्षित करना और भविष्‍य को उज्‍जवल बनाने के लिए उनसे लाखों की फ़ीस लेना। इसी आगे निकलने और ख़ुद का बेस्‍ट बताते-बताते कोचिंग सेंटर्स के बीच जन्‍म लेती है- दुश्‍मनी। एक ज़माना था जब शि‍क्षा को ज्ञान की देवी सरस्‍वती से जोड़कर देखा जाता था, लेकिन आज शि‍क्षा को लाखों रुपये में ख़रीद लिया जाता है।

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हमारी सोच पर सवाल

खान सर और रौशन सर के बीच हुए विवाद का यही कारण सामने आया है। खान सर ग़रीबों को लेकर जिस तरह साथ चले, उससे देश के लाखों छात्र जिनके पास फ़ीस भरने के लिए पैसे नहीं थे, खान सर से लगातार जुड़ते चले गए और इसी जुड़ाव ने धीरे-धीरे बिहार के अंदर एक बड़ा रूप ले लिया। यही कारण है, कि उनके जो कोर्सेस हैं, वो सस्‍ते हैं। उनके इन उपलब्‍धियों‍ को आरोपों के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके अलावा खान सर ने ग़रीबों के लिए अस्‍पताल भी खोला है, ताकि ग़रीब सस्‍ते इलाज करवा सकें। इस विज़न के साथ चलने वाले खान सर को अपराधी बता देना हमारी सोच पर भी सवाल खड़े करता है।

Photo Credit: KGS

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