- आग में जलने से 6 लोगों की मौत
- ICU में आग लगते ही भाग निकले स्टाफ़
दिल्ली के बाद मुजफ्फरपुर में अग्निकांड
अभी दिल्ली के मालवीय नगर की आग ठंडी भी नहीं हुई थी, कि बिहार के मुजफ्फरपुर में एक और अग्निकांड हो गया। एक निजी अस्पताल, जिसका नाम प्रसाद हॉस्पिटल है उसके ICU में आग लगने से 6 लोगों की मौत हो गई और क़रीब 20 लोग घायल हो गए। लोग अस्पताल में नया जीवन पाने के लिए जाते हैं, ठीक होकर घर वापस आते हैं, लेकिन इस अस्पताल में इसके विपरित हुआ और कुछ लोगों के लिए यह अस्पताल मौत की वजह बन गया।
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आग लगता देख भागे स्टाफ़
इस दर्दनाक अग्निकांड के बाद 29 मई से अस्पताल में भर्ती एक मरीज के परिजन शशांक ने दावा किया, कि सुबह क़रीब चार बजे के आसपास ICU में आग लगी और उस समय ICU में 20 से 25 मरीज भर्ती थे। उन्होंने आरोप लगाया कि, आग लगने के बाद ICU में मौजूद स्टाफ़ वहां से भाग निकले। अगर परिजन और स्थानीय लोग नहीं होते, तो इससे भी ज़्यादा बुरा हाल हो सकता था, इनकी मदद से मरीजों को बाहर निकालने में मदद मिल सकी। दिल्ली की घटना में भी मानवाता का गला घोंटकर होटल का मालिक़ वहां से भाग निकला था।
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अस्पताल का लाइसेंस रद्द
अस्पताल में स्टाफ़ को मरीज़ो का ध्यान रखने के लिए रखा जाता है, ना की उनको मुसीबत में देख छोड़ के भाग जाने के लिए। ऐसे अस्पताल का क्या फ़ायदा जो सिर्फ़ पैसों के लिए चलता है, ना कि मरीजो के देखभाल के लिए। ख़ैर बिहार सरकार ने एक्शन लेते हुए इस सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने के लिए इस अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया है। इसके अलावा अस्पताल के ख़िलाफ़ नोटिस भी जारी किया गया है, जिसमें आग लगने के कारणो को स्पष्ट रूप से बताना होगा। प्रसाद हॉस्पिटल को अब इस लापरवाही की क़ीमत चुकानी पड़ेगी और ऐसा बिल्कुल होना चाहिए, क्योंकि परिजनों ने अपनों को खोया है, जिसकी भरपाई अस्पताल नहीं कर सकता।
पैसा कमाना इंसान से बढ़कर
निजी अस्पताल ICU में इलाज के लिए भारी फ़ीस लेता है, लेकिन पैसा कमाने के इस दौड़ में वो मरीजों को सुरक्षा देने से चूक जाते हैं। आज पैसा कमाना इंसान की जान से बढ़कर हो गया है और तभी दिल्ली और मुजफ्फरपुर जैसी घटनाएं बार-बार हमारे सामने आती हैं। हादसे के बाद बिहार के मुख्यमंत्री ने हादसे पर शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
सुरक्षा से लापरवाही क्यों?
दिल्ली से लेकर मुजफ्फरपुर तक इस अग्निकांड में समानता ही समानता नज़र आएगी। यहां भी लापरवाही और सुरक्षा इंतज़ाम की अनदेखी के कारण लोगों की मौत हो गई। किसी की स्थिति गंभीर हो, तो उसे ICU में रखा जाता है। बताइए यह कितनी बड़ी लापरवाही है, कि ICU जैसी जगह पर आग लग जाती है और देखते ही देखते पूरे ICU को राख में बदल देती है। क्या इस हॉस्पिटल के ICU में भी आग से बचने के सुरक्षा इंतज़ाम नहीं थे। ग़जब हैं ऐसे अस्पताल, जो आम आदमी से पैसा तो झोली भरकर लेते हैं, लेकिन सुरक्षा नहीं दे सकते।
पैसा वसूलते निजी अस्पताल
निजी अस्पताल यूं तो हज़ारों और लाखों का बिल वसूल लेते हैं, लेकिन सुरक्षा की गारंटी नहीं देते। अगर ऐसे लापरपाह अस्पतालों को लोगों की ज़िंदगी मजाक लगती है, तो उन्हें इस पेशे को छोड़ देना चाहिए। प्रसाद हॉस्पिटल में जिस तरह से सुरक्षा को मजाक बनाया गया, वही स्थिति दिल्ली अग्निकांड की भी है, जहां सुरक्षा ना होने की वजह से 21 लोगों की आग से मौत हो गई। हमारे देश में मौत आज सस्ती हो गई है, जो लालच, बेईमानी और भ्रष्टाचार का शिकार बनी हुई हैं। कहीं आग लग जाती है, तो कहीं बिल्डिंग की इमारते गिर जाती हैं।
ICU में आग लगना गंभीर
ICU में आग लगना कोई मामूली बात नहीं है और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। इस दर्दनाक घटना ने अस्पतालों की सुरक्षा पर सवालिया निशान उठा दिए हैं। इससे लोगों का विश्वास लगातार नीचे जा रहा है। ज़रूरत है, कि प्रशासन हर निजी अस्पतालों की जांच करे और पता लगाए, कि ये सभी अस्पताल सुरक्षा मानकों पर फ़िट हैं, कि नहीं। यदि सुरक्षा का ध्यान नहीं रखा जा रहा, तो ऐसे अस्पतालों का लाइसेंस रद्द कर देना चाहिए।



