“खान सर की गिरफ़्तारी पर रोक, क्या शिक्षा अब कोचिंग कारोबार की जंग बन चुकी है?”
पिछले कई दिनों से यह प्रश्न भी उठ रहे थे, कि क्या खान सर की गिरफ़्तारी होगी?
पिछले कई दिनों से यह प्रश्न भी उठ रहे थे, कि क्या खान सर की गिरफ़्तारी होगी?
आज के उत्तर प्रदेश में माफ़िया राज नहीं, बल्कि विकास देखने को मिलता है। अमन, चैन और विकास ही नए उत्तर प्रदेश की पहचान है।
एजेंसी नहीं चाहती, कि इस बार कोई भी व्यवधान पैदा हो, क्योंकि छात्र अभी भी पेपर रद्द होने वाले सदमें से उभर नहीं पाए हैं।
नई टियागो पहले से ज़्यादा स्टाइलिश और एड्वांस फ़ीचर्स के साथ बाज़ार में उतरी है।
15 वर्षों की राजनीति में लोगों ने बंगाल में ख़ौफ़ और डर को देखा। ये ऐसा डर था, जिसने बंगाल में लगातार हिंसा को बढ़ावा दिया।
ग़जब हैं ऐसे अस्पताल, जो आम आदमी से पैसा तो झोली भरकर लेते हैं, लेकिन सुरक्षा नहीं दे सकते।
विकसित मतलब बड़ी-बड़ी बिल्डिंग तैयार करना नहीं है, बल्कि विकसित ईमानदारी, सच्चाई, मानवता और विचारधारा की नींव है।
हमारे देश में ऐसे कई उदाहरण मिल जाएंगे, जहां अवैध रूप से ऐसे होटल चलाए जा रहे हैं। ऐसे होटलों में पैसा बचाने और मुनाफ़ा अधिक कमाने के लिए आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जाता है।
21 लोगों की मौत के अलावा 45 से ज़्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सवाल यही उठता है, कि जांन गंवाने वाले और घायल हुए लोगों का कसूर क्या था?
बीजेपी लगातार राज्य में नई और रुकी हुई योजनाओं को लागू कर रही है। पिछली सरकार से जनता त्रस्त आ गई थी, जिसका असर वोट में दिखा।
रेस्टोरंट में आग इतनी तेज़ी से फैली, कि वह दृश्य काफ़ी भयावह था।
NTA को यूं तो निष्पक्ष परीक्षा कराने के लिए तैयार किया गया था, लेकिन जब वो ही गद्दार निकले, तब सोचने पर मजबूर होना पड़ता है, कि विश्वास किस पर करें?
इस IPL सीज़न में भी RCB के अंदर IPL टाइटल का जीतने का जज़्बा साफ़ दिखाई दिया और उनका ऑलराउंडर परफ़ॉर्मेंस इसका बड़ा उदाहरण है।
इस सीज़न की सबसे बेहतरीन टीम बनकर उभरी RCB ने हर प्रारूप में अपना उच्चतम प्रदर्शन किया। बेंगलुरु सही मायने में चैम्पियन की तरह खेली।
ममता सरकार के युग में वहां के नागरिक केंद्र की कई योजनाओं से वंचित थे। बीजेपी की सरकार आते ही पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू किया गया है।
देखना दिलचस्प होगा, कि GT किस तरह से RCB के पक्के इरादों का सामना कर पाती है, क्योंकि अब शोर मचने लगा है, कि इस बार भी RCB।
सवाल पुलिस और क़ानून व्यवस्था पर भी उठता है, कि हमारा क़ानून आज भी ताक़त देखता है।
मुल्लांपुर के मैदान में सिर्फ़ वैभव सूर्यवंशी के बल्ले की गूंज थी। वैभव का बल्ला सिर्फ़ रन उगल रहा था और हैदराबाद के गेंदबाजों की जमकर पिटाई कर रहा था।
इस समय ज़रूरत है संस्था में बैठे ऐसे कचरों को साफ़ करने की और यह एक-दो दिन का नहीं, बल्कि वर्षों से इकट्ठा होकर पेपर लीक करके छोत्रों की आत्महत्या का कारण बन रहे हैं।
पाटीदार की बल्लेबाजी ने बोर्ड पर इतने रन लगा दिए, कि गुजरात की बल्लेबाजी भी लक्ष्य का पीछा करने में पस्त हो गई।