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NEET पेपर लीक से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ तक: क्या छात्रों का आंदोलन राजनीति की भेंट चढ़ गया?

NEET पेपर लीक के बाद चर्चा में आई 'कॉकरोच जनता पार्टी' क्या है? जानिए इस आंदोलन की शुरुआत, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और राजनीति की चर्चा की पूरी कहानी

NEET पेपर लीक पर सवाल उठना लाज़मी था

देश में NEET पेपर लीक का मामला काफ़ी गंभीर मुद्दा रहा। इसके बाद परीक्षा एजेंसी NTA, शि‍क्षा मंत्रालय और शि‍क्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर सवाल उठने लगे। सवाल उठना लाज़मी था, क्‍योंकि NEET जैसा पेपर आसानी से लीक हो जाए और कोइ सवाल भी ना करे, ऐसा तो बिल्‍कुल नहीं हो सकता। पेपर लीक के बाद 20 लाख से ज़्यादा छात्रों को निराशा का सामना करना पड़ा था और यह बड़ा ही दुर्भाग्‍यपूर्ण रहा, कि इस हताशा के चलते 21 विद्यार्थि‍यों ने आत्‍महत्‍या कर ली, जो नहीं होना चाहिए था।

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NEET पेपर लीक बड़ी विफ़लताओं में से एक

छात्रों व युवाओं के भविष्‍य के साथ खि‍लवाड़ हो तो आवाज़ उठनी चाहिए और इसके ज़‍िम्‍मेदार जो लोग भी हैं, उन्‍हें तो सजा मिलनी ही चाहिए। यह सरकार की विफ़लता रही, कि NEET का पेपर लीक हुआ। यह अच्‍छी बात रही, कि सरकार ने इसकी ज़ि‍म्‍मेदारी लेते हुए, मामले को CBI के हवाले किया। इसके बाद तो ऐसे-ऐसे खुलासे हुए, जो हैरान करने वाले थे। परीक्षा एजेंसी NTA के अपने ही लोग दग़ाबाज़ निकले। इनको सरकार ने निष्‍पक्ष परीक्षा कराने का ज़‍ि‍म्‍मा सौंपा था। पता चला, कि छात्रों के भविष्‍य का सौदा लाखों रुपये में हुआ था।

और ऐसे बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’  

इसी दौरान एक बात काफ़ी वायरल हुई थी, जिसमें भारत के मुख्‍य जस्‍टिस सूर्यकांत ने बेराजगार और युवाओं की तुलना कॉकरोच और परजीवी से किया था। हालांकि उन्‍होंने बाद में ये साफ़ किया था, कि उनकी बातों का ग़लत मतलब निकाला जा रहा है और उन्‍होंने यह बात उन बेरोजगार युवाओं के लिए कही थी, जो फ़र्ज़ी डिग्री लेकर घूम रहे हैं। जस्‍टिस सूर्यकांत ने भले ही अपनी बातों को स्‍पष्‍ट रूप से पेश किया, लेकिन यहीं से जन्‍म लेती है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’, जिसके संस्‍थापक अभि‍जीत दीपके, इसके बाद चर्चा में आए।

चर्चा में अभि‍जीत दीपके, रखी पार्टी से जुड़ने की ये शर्त

अभि‍जीत दीपके के अनुसार उन्‍हें बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच शब्‍द से जोड़कर देखना बूरा लगा और उन्‍होंने तुरंत ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नाम से सोशल मीडिया पेज बनाया और लिखा, कि अगर इतने सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं तो क्‍या होगा? बस फ‍िर क्‍या था, कुछ ही देर में लाखों युवा ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़ गए। अभि‍जीत दीपके कॉकरोच वाली बात से इतना आहत थे, कि उन्‍होंने इस पार्टी में जुड़ने के लिए पात्रता ही तय कर दी, जिसमें उन्‍होंने कहा, कि अगर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़ना है, तो आपको बेरोजगार, आलसी और आपको ज़्यादातर ऑनलाइन ही रहना होगा। युवा व छात्र ऐसे भी पेपर लीक होने के चलते नाराज़ थे और अपनी नाराज़गी जताने के लिए वो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ से जुड़े।

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‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की मांग शिक्षा मंत्री इस्‍तीफ़ा दें

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को बनाने का मक़सद छात्रों, युवाओं और बेरोजगारों की बात रखना और ज़मीनी स्‍तर पर उनके हक़ की लड़ाई लड़ना था और लड़ाई की शुरुआत भी दिल्‍ली के जंतर-मंतर से हुई, जिसमें NEET पेपर लीक के मामले को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के समर्थक आंदोनल कर रहे थे और लगातार सरकार से NEET पेपर लीक पर सवाल कर रहे थे और अपनी मांगों को रख रहे थे। उनकी मांग थी, कि वर्तमान शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्‍तीफ़ा दें और जिन छात्रों ने पेपर लीक के हताशा में आत्‍महत्‍या की उनकों इंसाफ़ मिले।

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल क्यों चर्चा में है?

इस आंदोलन के मुख्‍य किररदार सोनम वांगचुक पिछले 20 दिन से अनशन (भूख हड़ताल) पर हैं। उनका स्‍वास्थ्‍य अब दिन प्रति दिन बिगड़ता जा रहा है। दरअसल शि‍क्षा के क्षेत्र में सोनम वांगचुक बड़ा नाम है और वो इंजीनियर भी हैं। ऐसे में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ को आंदोलन के लिए एक प्रमुख चेहरे की ज़रूरत थी, जो उन्‍हें सोनम वांगचुक में दिखी और इनसे बेहतर कोई चेहरा हो भी नहीं सकता था। फ‍िर क्‍या था सोनम वांगचुक हो रहे पेपर लीक के मामले में और शि‍क्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्‍तीफ़े की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर बैठे और उन्‍हें 20 दिन  हो गए हैं अनशन पर बैठे हुए। उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के आदेश पर उन्‍हें अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है।

राजनीतिकरण की भेंट चढ़ता आंदोलन

आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चलती है, लेकिन बाद में पता चला, कि महारास्‍ट्र के रहने वाले अभि‍जीत दीपके आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े रहे हैं और यहीं से शुरू होता है आंदोलन का राजनीतिकरण। चूकी आंदोलन भारतीय जनता पार्टी के ख़‍िलाफ़ है, तो दिल्‍ली में कभी शासन करने वाली पार्टी यानी आम आदमी पार्टी पीछे कैसे रह सकती थी। इसके बाद ‘आप’ के बड़े-बड़े नेता जंतर-मंतर पर दिखने लगते हैं। इसके बाद कांग्रेस और समाजवादी पार्टी भी आंदोलन के समर्थन में दिखने लगती है। अब यहां से मुद्दा भटकना शुरू होता है। जो आंदोलन पेपर लीक और शि‍क्षा के लिए हो रहा था, अब यह पूरी तरह से राजनीति में बदलता जा रहा था। कुछ नेता इस आंदोलन के ज़रिए ख़ुद को छात्रों का मसीहा बताकर अपने चुनावी एजेंडों को पूरा करने में लग गए।    

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इस आंदोलन के पीछे मक़सद क्‍या?

अच्‍छा होता अगर अगर अभिजीत दीपके इस आंदोलन को राजनीति से दूर रखकर युवाओं की लड़ाई लड़ते। आंदोलन में राजनीति का आना सोनम वांगचुक के अनशन का अपमान है। नीट पेपर लीक का मुद्दा, धीरे-धीरे भारत के टुकड़े-टुकड़े करने, भारत को नेपाल और बांग्‍लादेश बनाने तक पहुंच गया। इस आंदोलन‍ ने हिंसा का रूप लिया, पत्‍थर चले व तोड़फ़ोड़ हुई। कितने पुलिस वाले घायल हुए, वहीं कितने लोगों को चोटे आई। तो सवाल यही है, कि यह कैसा आंदोलन है? क्‍या ये आंदोलन महज भारतीय जनता पार्टी की सरकार से है? क्‍या इस आंदोलन का मतलब छात्रों के मुद्दों से नहीं है?

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