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NEET पेपर लीक से ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ तक: कैसे छात्र आंदोलन देश का सबसे बड़ा मुद्दा बना

क्‍या सरकार उनकी मांगे मानेगी या कोई और रास्‍ता निकालेगी? यह आने वाले दिनों में पता चल पाएगा। ख़ैर सरकार लगातार कह रही है, कि वह बातचीत करने और संसद में NEET की चर्चा के लिए तैयार है।    
  • NEET पेपर लीक होना सरकार पर पड़ा भारी
  • सोनम वांगचुक लगातार अनशन पर

देश का सबसे बड़ा मुद्दा छात्र आंदोलन

इस समय देश की राजधानी नई दिल्‍ली में चल रहा छात्र आंदोलन देश का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है, जो NEET पेपर लीक के चलते पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन के मुखिया अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नाम से अकाउंट बनाया, जिसमें देश के लाखों युवा, छात्र और बेरोजगार जुड़े और इस आंदोलन में भी अभिजीत दीपके ने इन्‍हीं युवा व छात्रों के दम पर आंदोलन शुरू किया और उनके पास NEET पेपर लीक सबसे बड़ा मुद्दा था, जिसको लेकर वो सरकार को घेर सकती थी।

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सोनम वांगचुक- छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा

इसी बीच इस आंदोलन में एंट्री होती है शि‍क्षा सुधारक और इंजीनियर सोनम वांगचुक की, जो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के साथ मिलकर इस छात्र आंदोलन के माध्‍यम से छात्रों और युवाओं की मांग को सरकार के सामने रखना चाहते थे और उनकी मांगे सुनी जाएं, इसके लिए वो अनशन पर बैठे और आज क़रीब 21 दिन से सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर हैं और यह कोई मामूली बात नहीं है। उनके गिरते स्‍वास्‍थ्‍य के चलते दिल्‍ली उच्‍च न्‍यायालय के आदेश पर मेदांता हॉस्‍पिटल में भेज दिया गया है। उनकी हालत और प्रदर्शन को देखते हुए सरकार को उनसे बात करनी चाहिए।

शि‍क्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सवालों के घेरे में

CJP की मांग है, कि शि‍क्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से इस्‍तीफ़ा दें और ये मांग अचानक से नहीं उठी, बल्‍कि इसके पीछे कई कारण हैं। जैसे कुछ महीने पहले आपने सुना होगा, यूजीसी के नए क़ानून के चलते कितने विरोध प्रदर्शन हुए थे और इस क़ानून से जातिगत भेदभाव का आरोप भी लगा था। हाल ही में CBSE की 12वीं बोर्ड परीक्षा की ऑन स्क्रीन मार्किंग में गड़बड़‍ियां पाई गई थी। बड़े पैमाने पर NEET का पेपर लीक हुआ, जिसमें परीक्षा कराने वाली एजेंसी NTA के लोग ही पेपर लीक में शामिल थे। UGC-NET, CUET और JEE Main की परीक्षा भी लीक हुई। साथ ही NCERT का मामला, जिसमें कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले अध्‍याय के चलते सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई थी।

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जंतर-मंतर से शिक्षा मंत्री के इस्‍तीफ़े की मांग

धर्मेंद्र प्रधान वर्ष 2021 से दोबारा 2024 में सरकार बनने के बाद से अब तक शि‍क्षा मंत्री के पद पर बने हुए हैं। इस दौरान शि‍क्षा मंत्री के पद पर रहते हुए वो कई बार सवालों के घेरे में रहे। पेपर लीक छात्रों के भविष्‍य से जुड़ा एक संवेदनशील मुद्दा है। वर्ष 2024 में भी NEET पेपर लीक का मुद्दा उठा था और अब 2026 में जब बड़े पैमाने पर NEET का पेपर लीक हुआ, तब छात्रों का गुस्‍सा फूटना लाज़मी था। देखा जाए तो शिक्षा मंत्री रहते हुए पेपर लीक के बढ़ते मामलों को देखते हुए CJP ने जंतर-मंतर पर उनके इस्‍तीफ़े की मांग की, जिसने पूरे देश में जोर पकड़ लिया। इसके अलावा NEET पेपर लीक से हताश-परेशान जिन छात्रों ने आत्‍महत्‍या करली उनके परिजनों को 1 करोड़ रुपये मुआवज़ा देने की मांग भी उठाई गई है।

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आंदोलन को देखकर लगता है, कि छात्र काफ़ी नाराज़ हैं

‘संसद चलो’ मार्च के दौरान बड़ी संख्‍या में छात्रों और युवाओं का आना यह बताता है, कि युवा सरकार से शि‍क्षा और रोजगार को लेकर वाकई नाराज़ हैं। इस दौरान विपक्षी पार्टियां भी खुलकर सामने आईं। ख़ासतौर पर कांग्रेस का प्रदर्शन पूरे देश में चर्चा का विषय रहा। राहुल गांध से लेकर प्र‍ियंका गांधी वाड्रा तक बड़े नेता ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के छात्र आंदोलन में छात्रों के भविष्‍य की मांगों को लेकर शामिल हुए। हालांकि प्रधानमंत्री आवास पर जाते समय सभी नेताओं को दिल्‍ली पुलीस ने पकड़कर बस में बैठाकर वहां से लेकर चले गए। ख़ैर ये सब एक राजनीति मुद्दा है और हर विपक्षी पार्टी चाहती है, कि वो चर्चा में रहे। बात छात्रों और युवाओं की होनी चाहिए। इस बात पर भी ध्‍यान दिया जाना चाहिए, कि प्रदर्शन के दौरान पत्‍थर चलाना, देश विरोधी नारे लगाना और लाठियां बरसाना बिलकुल भी सही नहीं है और ऐसा बिल्‍कुल नहीं होना चाहिए।  

छात्रों के भविष्‍य के लिए सरकार को करनी चाहिए बात

सरकार को छात्रों और 21 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक से बात करनी चाहिए। उनकी मांगों पर विचार करना चाहिए, क्‍योंकि आप हर बार पेपर लीक करवा कर युवाओं के भविष्‍य के साथ नहीं खेल सकते। अगर 21 दिन से सोनम वांगचुक अनशन पर बैठे हैं, तो यह कोई मामूली बात नहीं है। यह आंदोलन यदि चर्चा में है, तो इसमें सोनम वांगचुक के 21 दिन के संघर्ष का बहुत बड़ा हाथ है। देखते ही देखते CJP का आंदोलन अब बड़ा रूप ले चुका है, अब इसमें हज़ारो-लाखों छात्र जुड़ चुके हैं और अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। अब देखना होगा, कि सरकार कैसे इस आंदोलन को शांत करवाती है? क्‍या सरकार उनकी मांगे मानेगी या कोई और रास्‍ता निकालेगी? यह आने वाले दिनों में पता चल पाएगा। ख़ैर सरकार लगातार कह रही है, कि वह बातचीत करने और संसद में NEET की चर्चा के लिए तैयार है।    

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