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नोएडा अग्निकांड: लापरवाही की आग में कब तक जलती रहेंगी जिंदगियां?

आज छोटी-छोटी जगहों पर बड़ी-बड़ी इमारते बना दी जाती हैं, ताक़‍ि लोगों को किराय पर रूम देकर पैसा कमाया जा सके।
  • सेक्‍टर 66 के ममूरा स्‍थित इमारत में लगी आग
  • 2 लोगों की मौत, 50 लोगों की बची जान

अग्‍निकांड- एक नई चुनौती

लगता है देश के अग्‍निकांड का दौर शुरू हो गया है। आज लोगों के सामने अग्‍निकांड की नई समस्‍या पैदा हो गई है। हाल ही दिल्‍ली और लखनऊ में दिल दहला देने वाले अग्‍निकांड देश ने देखे, जिसमें कई मासूस लोगों और बच्‍चों ने दम घुटने से अपनी जवान गवां दी थी। दिल्‍ली के होटल में लगी आग में एक ही परिवार के 9 लोगो की मौत हो गई थी। मुजफ्फरपुर के एक अस्‍पताल के ICU ही आग लगने से 6 मरीजों की जान चली गई थी।

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इमारत में है 50 से ज़्यादा कमरे

अब नोएडा के सेक्‍टर-66 स्थित ममूरा इलाक़े के गली नंबर-2 के एक 5 मंजिला इमारत में आग्‍निकांड हुआ है, जिसमें 2 लोगों की जान चली गई है और 50 से अधि‍क लोगों को काफ़ी मुश्‍क़‍िलों के बाद सुरक्षि‍त बाहर निकाला जा सका। वहां आसपास के लोगों से पता चला है, कि इस इमारत में 50 से ज्यादा कमरे हैं और क़रीब 150 लोग यहां रहते हैं।  

बेसमेंट में इलेक्‍ट्रिक स्‍कूटी में चार्जिंग के दौरान लगी आग

मिली जानकारी के अनुसार आग लगने का कारण इलेक्‍ट्रिक स्‍कूटी थी, जो बेसमेंट में चार्जिंग के लिए लगाई गई थी और उसी दौरान उसमें स्‍पार्क हुआ और उसमें आग लगी। बेसमेंट में अगल-बगल और भी पेट्रोल वाली गाड़‍ियां खड़ी थी। स्‍पार्क के चलते दूसरी गाड़‍ियों में भी आग तेज़ी से फ़ैलने लगा और देखते ही देखते आग ने भीषण रूप ले लिया। कई वाहन आग की चपेट में आने से जलकर राख हो गई। बेसमेंट से आग ऊपरी मंजिलों में फ़ैलने लगी और चारों तरफ़ धुआं-धुआं हो गया।

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बड़ी मशक्‍कत के बाद बचाए गए 50 लोग

सूचना मिलते ही ही फ़ायर सर्विस की सात दमकल गाड़ियां और पुलिस मदद के लिए मौक़े पर पहुंची। दमकल विभाग ने बड़ी मशक्‍कत के बाद आग पर काबू पाया और 50 लोगों की जान बचा ली, लेकिन 2 धुएं से दम घुटने के कारण 2 लोगों की जान चली गई, जिसमें एक पुरुष और एक महिला है। जब आग लगी तब काफ़ी लोग सुबह के समय काम पर निकल चुके थे, जिससे की इमारत में आग लगने के समय लोगों की संख्‍या कम हो गई थी।

हर अग्निकांड की एक वजह- लापरवाही

इस अग्‍निकांड में भी लापरवाही साफ़ देखी गई है। वहां मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और आसपास के लोगों ने बताया, कि इस 5 मंजिला इमारत में सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे और इनके पास अग्‍निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र (Fire NOC) भी नहीं था। हमने यहीं दिक्‍़कत पिछले दिनों हुए कई अन्‍निकांड में देखा है। इससे यह तो पता चलता है, कि आग से सुरक्षा पर लोगों का ध्‍यान नहीं है। ऐसी इमारतों में यह भी देखा गया है, कि इसमें आने-जाने के रास्‍ते एक ही हैं, जबकि ऐसी इमारतों में आग से बचने के लिए 2 रास्‍ते होने ही चाहिए, जिससे की आग लगने पर लोगों को दूसरे रास्‍ते से सुरक्षि‍त बाहर निकाला जा सके।

पैसा कमाने के लिए बना देते हैं, किसी तरह का घर   

आज छोटी-छोटी जगहों पर बड़ी-बड़ी इमारते बना दी जाती हैं, ताक़‍ि लोगों को किराय पर रूम देकर पैसा कमाया जा सके। ऐसी बिल्‍डिंगों में छोटे-छोटे कमरे होते हैं, वहीं ना तो ढंग का वेंटिलेशन होता है, ना ही खि‍ड़की होती है। आने-जाने का रास्‍ता भी एक ही होता है। अगर कुछ हो जाए तो लोग बाहर तक ना निकल पाएं। पैसा कमाने के चक्‍कर में हम कैसा भी घर बनाकर ज़रूरममंदो को अपने फ़ायदे के लिए किराए पर दे देते हैं। ऐसे मालिक़ों को किसी के जान की कोई परवाह नहीं होती। उन्‍हें बस यही ख़्याल होता है, कि किसने समय से किराया दिया और किसने नहीं।

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सरकार का सुरक्षा अभियान कितना सफल

यह सिर्फ़ उसी इमारत की दिक़्कत नहीं है, बल्‍कि वहां स्‍थित और भी बिल्‍डिंगों में यही परेशानी होगी। चूकी आग इस इमारत में लगी है, तो बाक़ी सब बचना चाहेंगे। वैसे उत्‍तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ अग्‍निकांड के बाद सुरक्षा से जुड़ा अभि‍यान तो चलाया है, जिसमें कई कोचिंग सेटर्स को सुरक्षा नियमों का पालन न करने पर सील कर दिया था, लेकिन उसमें अब तक कितनी सफलता मिली है या मिलेगी कुछ कहा नहीं जा सकता। खैर पुलिस ने मकान मालिक/लीज धारक के खिलाफ़ मुकदमा दर्ज कर लिया है और आरोपी को हिरासत में ले लिया है। आगे की जांच जारी है।

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