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झारखंड छात्र आंदोलन पर सियासी चुप्पी, क्या सरकार देखकर उठाए जाते हैं छात्रों के मुद्दे?

झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के ख़‍िलाफ़ छात्र आंदोलन जारी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या छात्रों के मुद्दे सरकार देखकर उठाए जाते हैं?
  • झारखंड परीक्षा धांधली में छात्रों ने की CBI जांच की मांग
  • JPSC और JSSC परीक्षा में धांधली के आरोप

दिल्‍ली का जंतर-मंतर आंदोलन तो सबको याद होगा, जहां कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्‍व में छात्रों ने नीट पेपर लीक को मुद्दा बनाते हुए बड़े पैमाने पर आंदोलन किया। नतीजा यह हुआ, कि पूर्व शि‍क्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को छात्रों की मांग पर इस्‍तीफ़ा देना पड़ा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर उनको आश्‍वासन देते हुए फ़ास्‍ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा करनी पड़ी। बात यहीं तक नहीं थमी, इसके बाद पेपर लीक का मुद्दा संसद तक पहुंचा, जहां पेपर लीक को रोकने के लिए लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पारित किया गया।

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जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में एक साथ दिखे विपक्षी दल

इस दौरान कांग्रेस, आम आदमी पार्टी से लेकर समाजवादी पार्टी और RJD जैसे कई विपक्षी दल छात्रों के आंदोलन में क़ूद पड़े और केंद्र सरकार को जमकर घेरा और शि‍क्षा मंत्री के इस्‍तीफ़े की मांग की। यह हंगामा संसद में भी देखने को मिला, जिसके चलते कई दिन संसद की कार्रवाई को बिना चर्चा स्‍थग‍ित करना पड़ा। राहुल गांधी, प्र‍ियंका गांधी वाड्रा, अरविंद केजरीवाल, अखि‍लेश यादव और तेजस्‍वी यादव जैसे बड़े नेता सरकार के ख़‍िलाफ़ खुलकर सामने आए।

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झारखंड में छात्रों के मुद्दों पर विपक्ष चुप क्‍यों?

दिल्‍ली के जंतर-मंतर के बाद अब झारखंड में छात्रों व युवाओं ने वहां की सरकार को पेपर लीक और भर्ती घोटाले में घेर लिया है। इस समय में झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की गठबंधन वाली सरकार है, जिसमें कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख हैं। सवाल यह है, कि जो विपक्षी पार्टियां जंतर-मंतर पर छात्रों की मांगों को जमकर उठा रही थी और आंदोलन में शामिल हुई थी, वो झारखंड में छात्रों के मुद्दों पर शांत क्‍यों हैं, क्‍या उन्‍हें यहां के छात्रों से कोई हमदर्दी नहीं है या वो इसलिए चुप हैं, क्‍योंक‍ि वहां पर उन्‍हीं की सरकार है।

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JPSC और JSSC परीक्षा में गड़बड़ी को लेकर छात्र नाराज़

इस समय झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी, छात्र व युवा मुख्य रूप से राज्य की भर्ती परीक्षाओं (JPSC और JSSC) में कथित गड़बड़ी, पेपर लीक और अनियमितताओं के विरोध में राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ा आंदोलन कर रहे हैं। दुख की बात यह है, कि इस आंदोलन में विपक्ष का कोई बड़ा नेता शामिल नहीं है और न ही इस मामले में कुछ बोलने को तैयार है, जो जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ खड़े रहकर उनकी भविष्‍य की चिंता कर रहे थे। सोशल मीडिया पर उनका एक भी पोस्‍ट झारखंड के इन छात्रों के पक्ष में नहीं है।

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इस आंदोलन के प्रमुख कारण

1) 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और कर्मचारी चयन आयोग की कई परीक्षाओं में कथित धांधली।

2) OMR शीट में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोप लगे हैं।

3) परिणामों के साथ वर्ग के अनुसार कट-ऑफ़ मार्क्‍स जारी न करना और अभ्यर्थियों के मार्क्स सार्वजनिक न करना।   

4) छात्रों का आरोप है, कि राज्य सरकार ने परीक्षा के आयोजन के लिए ब्लैकलिस्टेड निजी एजेंसियों (जैसे TDPL) को परीक्षा की ज़‍िम्मेदारी दी।

क्‍या हैं छात्रों की मुख्‍य मांगें?

1) 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाए और दोबारा निष्‍पक्ष रूप से परीक्षा आयोजित की जाए।

2) CID जांच के बजाय पूरे भर्ती घोटाले की निष्पक्ष CBI और ED जांच कराई जाए।

3) परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थियों के OMR अंक और वर्ग के अनुसार कट-ऑफ मार्क्‍स दिखाए जाएं।

4) भविष्य की सभी भर्ती परीक्षाओं को निष्‍पक्ष रूप से कराने के लिए सख्त कानून बनाए जाएं।

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यह कैसी दोहरे चरित्र की राजनीति?

सवाल यह है, कि कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थक और तमाम विपक्षी पार्टि‍यां झारखंड वाले मुद्दे पर सामने क्‍यों नहीं आ रहे? क्‍या यहां के छात्र उनके लि‍ए छात्र नहीं हैं? क्‍या यहां के छात्रों के मुद्दे वाजिब नहीं लगते? क्‍या छात्र सिर्फ़ दिल्‍ली में ही हैं? इसी दोहरे चरित्र की राजनीति ने देश को कभी विकसित नहीं होने दिया। जहां हमारी पार्टी है, वहां हम नहीं बोलेंगे और जहां हम विपक्ष में हैं, वहां हम इस्‍तीफ़े की मांग करने लगते हैं।

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