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जब रक्षक ही बन जाए भक्षक: गोरखपुर की घटना ने पुलिस की वर्दी पर खड़े किए बड़े सवाल

गोरखपुर में 10 साल की बच्ची की मौत के मामले में सिपाही पर दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगा है। घटना ने पुलिस की वर्दी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
  • आरोपित सिपाही ने 10 वर्ष की बच्‍ची के साथ दुष्‍कर्म कर की हत्‍या
  • CCTV फ़ुटेज की मदद से पकड़ा गया सिपाही

हाल ही में गोरखपुर से एक शर्मनाक घटना सामने आई थी, जिसने एक बार फ‍िर पुलिस की वर्दी को कलंकित करने का काम किया है। पुलिस की वर्दी दी जाती है, ताक़‍ि लोगों की रक्षा हो, क़ानून व्‍यवस्‍था दुरुस्‍त हो और अपराध को रोका जा सके, लेकिन अगर सही लोग अपराधी बन जाएं तो, समझना पड़ेगा, कि हमारा समाज किस तरफ़ चल पड़ा है।

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जब पुलिसकर्मी रक्षक की जगह बन जाए भक्षक

कुछ दिन पहले ही गोरखपुर में एक 10 वर्षीय छोटी बच्‍ची के साथ डायल 112 में तैनात सिपाही अभि‍षेक यादव ने दरिंदगी की। सोचकर हैरानी होती है और शर्म भी आती है, कि एक पुलिस वाला जिसे हम समाज का रक्षक कहते हैं, वही भक्षक बन जाए, तो हम अपनी बेटियों को किस भरोसे घर से बाहर जाने देंगे। सरकार भले ही सुरक्षा की बात करती है, लेकिन सुरक्षा देने वाला ही दरिंदा निकले, तो विश्‍वास को ठेस पहुंचती है। सिर्फ़ महिला सशक्‍तिकरण की बात करने और बेटी पढ़ाओं-बेटी बढ़ाओं योजना से कुछ नहीं होगा। आख़‍िर इनकी सुरक्षा की गैरंटी कौन लेगा, क्‍योंकि पुलिस के भेष में रक्षक ख़ुद दरिंदगी करने पर उतर आए हैं।

आम आदमी नहीं चाहता पुलिस का चक्‍कर

यह कोई पहला मौक़ा नहीं है, जब हमारे देश की पुलिस पर सवाल उठा हो, जबकि पुलिस पर दाग पहले भी लगते आए हैं। यहीं कारण है, कि आज हमारे देश का हर आम आदमी पुलिस के सामने असहज महसूस करता है। पुलिस से मदद मांगने के बजाए, उसे लगता है, कि कहीं मैं पुलिस के चक्‍कर में फंस न जाऊं। कहने का मतलब यह है, कि‍ पुलिस के सामने निडरता से अपनी बात रखने के बजाए, हमें डर लगता है। आख़‍िर ऐसा क्‍यों हैं?

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CCTV फ़ुटेज के चलते पकड़ा गया सिपाही

यह बात 27 जुलाई की है, जब एक युवक की बड़ी बेटी की तबीयत ज़्यादा ख़राब होने से उसे ज़‍िला अस्‍पताल में भर्ती कराना पड़ा। 28 जुलाई की रात को युवक की 10 वर्ष की बेटी रात क़रीब 8 बजकर 30 मिनट पर अस्‍पताल में भर्ती बहन को खाना देने गई। बहन के पास कुछ समय बिताकर वह अस्‍पताल से निकली, लेकिन घर नहीं पहुंच पाई। इसके बाद बच्‍ची के घर वाले उसकी तलाश में लग गए, लेकिन बेटी का कुछ न पता चलने पर उन्‍होंने रात में ही पुलिस में शि‍कायत दर्ज की। इसके बाद पुलिस ने CCTV फ़ुटेज के माध्‍यम से बच्‍ची का पता लगाने की कोशि‍श की। CCTV फ़ुटेज में साफ़ दिख रहा था, कि एक सिपाही 10 वर्ष की बच्‍ची को अपनी बाइक पर बैठाकर ले जा रहा है। इसी के आधार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उस सिपाही को गिरफ़्तार किया।

पूछताझ पर पता चला हुआ क्‍या था

बड़ी बहन से पूछताछ करने पर पता चला, कि दोनों बहनों ने साथ में खाना खाया था। तभी पुलिस की वर्दी में एक व्‍यक्‍ति उनके पास आकर उनसे पता पूछने लगा। इसके बाद उसने कहा, कि‍ अगर कोई घर जाएगा, तो मैं उसे छोड़ दुंगा, लेकिन हमने मना कर दिया। इसके बाद बहन घर के लिए निकल गई। इस बयान से साफ़ जाहिर होता है, कि सिपाही जबरन बच्‍ची को बाइक में बैठाकर ले जा रहा था, जो CCTV फ़ुटेज में भी दिखा।

अगले दिन बच्‍ची का मिला शव

30 जुलाई को तलाशी के दौरान बच्‍ची का शव मिला, जिसे पोस्‍टमार्टम के लिए भेज दिया गया। इसके बाद रिपोर्ट शर्मशार करने वाली थी। रिपोर्ट में पता चला, कि बच्‍ची के साथ दुष्‍कर्म हुआ है और उसके बाद उसकी हत्‍या कर दी गई। बच्‍ची के शरीर पर चोटों के निशान भी मिले थे। इसके बाद पुलिस ने आरोपित सिपाही अभि‍षेक यादव को बर्खास्‍त कर कोर्ट में पेश किया गया, उसके बाद उसे जेल भेज दिया। आरोपित को पुछताछ के लिए पुलिस कस्‍टडी में भी भेजा गया, जहां उससे इस मामले की पूछताछ की गई।

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पुलिस की वर्दी सुरक्षा के लिए या महज रोजगार

यह मामला पुलिस पर बेहद गंभीर सवाल खड़ी करती है, कि आख़‍िर पुलिस की वर्दी हम लोगों को सुरक्षा देने के लिए पहनते हैं या बस हमें तो सरकारी रोजगार चाहिए, जिसे हम अपने अगल-बगल दिखा सकें, कि देखो हमारा बेटा पुलिस में भर्ती हो गया है। अब देखते हैं हमारा कोई क्‍या करता है। क्‍या इस सिपाही को पुलिस की वर्दी पहनते हुए अपने शपथ याद नहीं आए, जो इसने लोगों की सुरक्षा के लिए पहने थे। इन घटनाओं से यही साबित होता है, कि आज भी वर्दी के अंदर कुछ बेईमान लोग बैठे हैं।   

पीड़‍ित परिवार को मिले इंसाफ़

इस मामले के बाद गोरखपुरवासियों में गुस्‍सा साफ़ देखा गया और अब माता-पिता अपने बच्‍चों की सुरक्षा पर चिंता जताने लगे हैं। वहीं गोरखपुर बार एसोसिएशन के अधि‍वक्‍ताओं ने भी प्रदर्शन करते हुए आरोपित सिपाही को फांसी देने की मांग की है। आरोपित सिपाही पर पॉक्सो एक्‍ट के तहत अपहरण, दुष्‍कर्म व हत्‍या का मामला दर्ज हुआ है। अब यह मामला कोर्ट में है। उम्‍मीद है, कि इस दरिंदे को कड़ी से कड़ी सजा मिलगी और पीड़‍ित परिवार और उस बच्‍ची को इंसाफ़ मिलेगा, जिन्‍होंने कभी सोचा नही होगा, कि एक पुलिसवाला ही उसकी बेटी की मौत का कारण बनेगा।

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