- रुपये बांटने की बात क़बूल
- ख़रीदी गई डिज़ायर कार
SIT ने तीन आरोपियो को अपनी हिरासत में लिया
अयोध्या के राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी मामले में 3 आरोपी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे को पुलिस ने 40 घंटे की रिमांड पर लिया। इससे पहले पुलिस ने कोर्ट में इन 3 आरोपियों के लिए 7 दिन की हिरासत की मांग की थी, लेकिन अदालत ने सिर्फ़ 40 घंटे की कस्टडी की अनुमति दी। इसके बाद SIT ने इन तीनों आरोपियों को जेल से निकालकर अपनी हिरासत में लेकर दान की गई राशि के ग़बन, चोरी हुए धन के इस्तेमाल और इससे जुड़े पूरे नेटवर्क की पूछताछ की, जिसके बाद कई बड़े ख़ुलासे हुए, जिसे सुनकर दंग रहना स्वभाविक है।
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तीनों आरोपियों ने स्वीकारा कि बांटे जाते थे रुपये
इस दौरान तीनों आरोपियों अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडे ने चढ़ावा चोरी की बात क़बूल की है और यह भी बताया है, कि पैसों का बंटवारा होता था। यह बात सामने आने के बाद इसके पीछे कई राज़ अब धीरे-धीरे सामने आने लगे हैं। इन तीनों ने यह भी बताया, कि इस चोरी में आरोपी सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव (टिन्नू) का सहयोग मिला। उन्होंने बताया, कि ‘टिन्नू’ पहले भी चोरी करते पकड़े गए हैं, लेकिन यह बात मालूम होते हुए भी उनकों ट्रस्ट से हटाया नहीं गया। इस बात का ख़ुलासा होने के बाद ट्रस्ट के पूर्व महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा घिरते नज़र आ रहे हैं।
मिली कार, सोना और लाखों रुपये
40 घंटे की पूछताछ के दौरान इन तीनों आरोपियों ने जो भी बताया है, उसका मिलान SIT पहले से गिरफ़्तार आरोपी अविनाश शुक्ला के दिए गए बयानों से कर रही है। ख़ुलासा हुआ है, कि मंदिर में जो भी चोरी हुई, उन सभी पैसों का बंटवारा 14 कोसी परिक्रमा मार्ग पर हुआ था। इसके बाद जांच एजेंसी इन तीनों को उस इलाक़े पर भी ले गई जहां यह कृत्य किया जाता था। इसके बाद इनके पास से एक डिज़ायर कार, 1 लाख रुपए से ज़्यादा की नक़दी और भारी मात्रा में सोना मिला है। यह भी पता चला है, कि यह चोरी के पैसो को शेयर बाज़ार में निवेश करते थे और अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों में रुपये जमा कर, उन्हें अपने खातों में ट्रासफ़र करा लिया करते थे, जिससे की किसी को शक ना हो। इनके घरों की भी तलाशी ली गई, जहां उन्हें रुपये मिले हैं। बता दें, कि गिरफ़्तार लवकुश मिश्रा आरोपी अनुकल्प मिश्रा का बहनोई है।
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सोने को गलाने का होता था काम
पूछताछ में यह भी पता चला, कि यह लोग चुराए गए आभूषणों को पिघलाने का काम किया करते थे, जिससे की इसके बारे में किसी को पता ना चल सके। ये लोग आभूषणों को पिघलाकर दूसरी चीजों में बदल देते थे। आभूषणों को पिघलाने का काम करने में सराफ़ा कारोबारी भी जांच एजेंसी के गिरफ़्त में है। 40 घंटे की रिमांड में अयोध्या राम मंदिर में हुई चोरी को नया मोड़ दिया है और कई ऐसे ख़ुलासे हुए हैं, जिसमें कई लोगों के नाम धीरे-धीरे सामने आने वाले हैं।
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क्या ये मुद्दा राजनीति बन चुका है?
यह सब सुनकर भी शर्म सी आती है, कि राम के नाम पर हमारे देश में कितने लुटेरे बैठे हैं, जो जनता का पैसा लुटकर करोड़पति बनना चाहते हैं। इन्हें यह काम करते हुए जरा भी शर्म नहीं आती, कि वो ईश्वर से ही धोखा कर रहे हैं। यह वहीं लोग हैं, जिन्होंने आस्था के नाम पर पाखंड का आतंक मचा रखा है। इसके बाद धर्म और आस्था के नाम पर राजनीति खेली जाती है, जिसे वोट बैंक कहना ग़लत नहीं होगा। इस समय उत्तर प्रदेश में राम मंदिर को लेकर कितने बयान जारी किए जा रहे हैं, क्योंकि अगले साल यूपी में चुनाव है, जिसका फ़ायदा राजनीति रोटियां सेकने के लिए किया जा रहा है। ऐसा लगता है, कि यह चढ़ावा चोरी मात्र एक राजनीति मुद्दा है, जिसे भुनाकर पार्टियां अगले साल होने वाले चुनाव में वोट हथियाना चाहती हैं।








