- ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर किए हवाई हमले
- अमेरिका ने कहा, ईरान ने किया समझौते का उल्लंघन
60 दिन का युद्ध विराम कागज़ो तक रहा सीमित
यूं तो अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन युद्ध न करने का समझौता हुआ था, लेकिन यह महज कागज़ तक ही सीमित रह गया है। कहा जा रहा था, कि इन 60 दिनों में अमेरिका व ईरान युद्ध से जुड़े अहम मुद्दों और शर्तों पर बातचीत करेंगे और शांति स्थापित करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। दोनों देशों के बीच जो भी शांति वार्ता होनी थी, सभी स्थगित कर दिए गए हैं। अमेरिका का कहना है, कि ईरान ने समझौते का उल्लंघन किया है, इसलिए उससे बातचीत करना बेकार है।
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ईरान के हमलों से नाख़ुश अमेरिका ने किए हमले
दरअसल ईरान ने स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों पर हमले किए, जिसकी वजह से अमेरिका ने इन हमलों पर नाराज़गी जाताई और इसे समझौते का उल्लंघन बताया। ईरान के इस हमले से नाख़ुश अमेरिका ने ईरान के 80 से ज़्यादा ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। हमले के बाद अमरीका की केंद्रीय कमान ‘सेंटकॉम’ ने कहा, कि अमेरिकी हवाई हमलों में ईरानी वायु रक्षा प्रणाली, कमान व नियंत्रण केंद्रों, तटीय रडार स्थलों, जहाज-रोधी मिसाइल प्रणालियों और स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ व उसके आसपास के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर की 60 से अधिक नौकाओं को टारगेट किया गया।
ईरान की तेल छूट पर लगाई रोक, तो ईरान ने भी दी चेतावनी
इसके बाद अमेरिका ने सख्त रुख दिखाते हुए अंतरिम समझौते के तहत ईरान के तेल बेचने की छूट रद्द कर दिया है। दोबारा शुरू हुए हमलों के बाद कई जहाज स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से गुजरने से पहले ही वापस लौट गए। अब दोबारा से कच्चे तेल के दाम बढ़ने लगे है और इसमें 5 प्रतिशत का इज़ाफ़ा होता दिख रहा है। ऐसे में विश्व जो इस समझौते के बाद ठंडा पड़ गया था, इन हमलों से दोबारा आने वाले संकट को महसूस करने लगा है। इस बीच ईरान के उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी का बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने इन अमेरिकी हमलों की निंदा करते हुए इसे द्विपक्षीय समझौतों का गंभीर उल्लंघन बताया है। साथ ही ईरान के सैन्य कमान ने इसे आक्रामकता और आतंकवाद का कृत्य बताते हुए जवाबी हमले की चेतावनी दे डाली है।
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ईरान का जवाबी हमला, कहा होर्मुज़ पर किसी और का नियंत्रण नहीं
ईरान ने बंदर अब्बास, केशम और सिरिक में अमेरिकी हमलों की पुष्टि की है। अमेरिकी हमलों के बाद ईरान भी कहां चुप बैठने वाला था और उसने बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके बाद कुवैत ने वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय करली है। जवाबी हमले के बाद ईरान ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ में किसी भी तरह के हस्तक्षेप और न ही किसी को इस पर नियंत्रण करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
विश्व फिर हुआ चिंतित
जबसे यह युद्ध शुरू हुआ है, तबसे पूरा विश्व तेल के संकट से जूझ रहा है। 60 दिन के शांति समझौते की ख़बर आते ही कच्चे तेल की क़ीमत 70 से 75 डॉलर तक पहुंच गई थी और विश्व ने राहत सांस ली थी, लेकिन यह महज कागज़ का टुकड़ा बनकर रह गया। इस युद्ध से लगातर दुनिया को नुक़सान हो रहा है और महंगाई हर रोज़ बढ़ती जा रही है। ऐसे में दोबारा हमलों को देखते हुए चिंता करना लाज़मी है, क्योंकि अगर होर्मुज़ से दोबारा जहाजों का आना-जाना बंद हुआ, तो इसका खामियाज़ा हम सब को भुगतना होगा, जो महंगाई के रूप में हम सब के सामने चुनौती बनकर आने वाली है।







