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NTA पर फिर उठे सवाल, UGC-NET के 3 विषयों की परीक्षा रद्द; सितंबर में दोबारा होगी परीक्षा

NTA की लापरवाही पर फिर उठे सवाल! UGC-NET जून 2026 के अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के पेपर गंभीर खामियों के चलते रद्द कर दिए गए हैं। जानिए पूरी वजह।
  • UGC-NET अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र की परीक्षा रद्द
  • 9 और 10 सितंबर को री-एग्जाम का फ़ैसला

नेशनल टेस्‍टिंग एजेंसी (NTA) की गड़बड़‍ियां थमने का नाम नहीं ले रही। NTA अब हर रोज़ किसी ना किसी विवाद से घि‍रा हुआ है, जो पेपर लीक, परीक्षा रद्द  प्रश्‍नपत्र में ख़ामियों की वजह से छात्रों का भविष्‍य ख़राब करने में लगा हुआ है। हाल ही में सबने देखा, कि NEET पेपर लीक कैसे देश का सबसे बड़ा मुद्दा बना और जंतर-मंतर पर छात्रों का हुजूम उमड़ पड़ा, जिसके बाद पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्‍तीफ़ा तक देना पड़ा था।

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क्‍या NTA ज़ि‍म्‍मेदार नहीं?

दुख की बात यह है, कि कई छात्रों ने NEET पेपर रद्द होने की वजह से आत्‍महत्‍या कर ली थी, तो क्‍या यह कहना ग़लत होगा, कि इन छात्रों की मौत का ज़ि‍म्‍मेदार NTA नहीं है? क्‍या NTA ये कबूल करेगा? यह हमारे देश के लिए बेहद शर्म की बात है, कि आज पैसे से शि‍क्षा, पद, नौकरी आसनी से ख़रीद ली जा रही है और दिन-रात मेहनत करने वाले छात्र अपने एक मौक़े के लिए तरस जा रहे हैं। नतीजा बेरोजगारी में बदलता हुआ दिखाई देता है। जिस पद पर सही उम्‍मीदवार को होना चाहिए, वहां ग़ैर ज़‍िम्‍मेदार लोग बैठे हुए हैं। सही उम्‍मीदवार किसी तरह अपनी रोज़ी-रोटी चलाने के लिए जो काम वो नहीं करना चाहता, वही करने के लिए मजबूर है।

अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र की परीक्षा होगी दोबारा

अब एक बार फ‍िर NTA ने UGC-NET जून 2026 की परीक्षा को लेकर बड़ा फ़ैसला लेते हुए अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र, इन तीन विषयों की परीक्षा को रद्द कर दिया और अब तीनों विष्‍यों की परीक्षा दोबारा आयोजित की जाएगी। इसका कारण बताते हुए NTA ने कहा, कि इन तीनों विषयों के प्रश्‍नपत्रों में ऐसी ख़ामियां पाई गई हैं, जिन्‍हें सिर्फ कुछ सवाल हटाकर व आंसर-की में सुधार करके ठीक करना संभव नहीं था।

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पेपर में कौन-कौन सी ग़लतियां पाई गई

मिली जानकारी के अनुसार अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के प्रश्‍नपत्रों को जांचने के बाद तथ्यात्मक, टाइपिंग और अनुवाद से जुड़ी कई ग़लति‍यां मिली। इसके अंतर्गत कई किताबों के शीर्षक बिगड़े हुए थे, प्रश्नों के मूल कथन में ग़लतियां थीं। साथ ही ग्रामर (व्‍याकरण) में भी गड़बड़‍ियां थी। लिंग और वचन के बीच कोई तालमेल नहीं था। विराम-चिह्नों का भी ग़लत इस्‍तेमाल किया गया था। इसके अलावा स्‍थापित विचारधारा के लिए अपरंपरागत व गढ़े हुए शब्दों का प्रयोग किया गया था। बा यहीं तक नहीं थमती, बल्‍कि इन प्रश्‍नपत्रों में बड़ी संख्‍या में ऐसे प्रश्‍न भी पूछे गए थे, जो पिछले वर्षों में पहले ही पूछे जा चुके थे।

आंसर की जारी करने के बाद जागा NTA

अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के पेपर रद्द होने के जो कारण सामने आए, अब उसे क्‍या कहेंगे। इतने बड़े मंच पर आयोजित परीक्षा में ऐसी गड़बड़‍ियां लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। आख़‍िर परीक्षा कराने से पहले इन प्रश्‍नपत्रों को क्‍यों नहीं जांचा गया? आप परीक्षा लेते हैं, आंसर की भी जारी करते हैं, ताकि उम्‍मीदवार प्रश्‍नों को चुनौती दे सकें। इतना होने के बाद NTA की आंख खुलती है और 2 महीने बाद यह ऐलान कर दिया जाता है, कि पेपर रद्द किया जा रहा है। यानी जो छात्र 2 महीने से रिजल्‍ट का इंतज़ार कर रहे थे, उन्‍हें परीक्षा रद्द होने की ख़़बर मिलती है और वो निराश हो जाते हैं।  

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कितना टूट जाते होंगे छात्र!

ग़लतियां पकड़े जाने के बाद NTA ने अंग्रेजी, कॉमर्स और समाजशास्त्र के पेपर 9 और 10 सितंबर 2026 को दोबारा कराने का फ़ैसला लिया है। बता दें, कि इन तीन विषयों की पहले परीक्षा दे चुके उम्मीदवारों से दोबारा परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। दोबारा परीक्षा हो तो रही है, लेकिन इससे छात्र अंदर से कितना टूट जाते होंगे, इसे बयां नहीं किया जा सकता।

आख़‍िर कब तक गड़बड़ी करता रहेगा NTA?

NTA ने जूनियर रिसर्च फेलोशिप, सहायक प्रोफेसर पद की पात्रता और PhD कार्यक्रमों में प्रवेश के लिए कुल 87 विषयों में UGC-NET जून 2026 परीक्षा का आयोजन 22 से 30 जून 2026 के बीच किया था, लेकिन NTA इसे भी पूर्ण रूप से कराने में असफल रहा। सवाल उठता है, कि आख़‍िर कब तक NTA परीक्षाओं में गड़बड़‍ियां करता रहेगा और छात्रों के भविष्‍य के साथ खेलता रहेगा। आज यही वजह है, कि छात्र अंदोलन अब तेज़ी से भारत में विकसित हो रहा है।        

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