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संभल हिंसा रिपोर्ट में बड़े खुलासे, समाजवादी पार्टी के नेताओं की भूमिका पर उठे सवाल

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे पहले से तैयार की गई साजिश थी।
  • संभल हिंसा में गठित न्यायिक आयोग की रिपोर्ट पेश
  • हिंसा में 4 लोगों की हुई थी मौत

उत्‍तर प्रदेश के संभल हिंसा की रिपोर्ट न्यायिक आयोग ने पेश कर दी है। इस रिपोर्ट में ऐसे तथ्‍य सामने आए हैं, जिसने समाजवादी पार्टी को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। इस रिपोर्ट से यह भी पता चलता है, कि कैसे हमारे समाज को गुमराह करके बांटने की कोशि‍श की जा रही है। अपने राजनीतिक फ़ायदे के लिए एक धर्म को दूसरे धर्म से लड़वाने की साजिश आज भी हमारे समाज में पनप रही है और देश की आम जनता इसका शिकार बनती है।

Image: PBSHABD

फ़ैलाई गई थी ग़लत जानकारी

24 नवंबर 2024 को संभल की जामा मस्‍जिद में सर्वे के दौरान अचानक मस्‍जिद के बाहर जमा भीड़ में हिंसा भड़क उठी थी। दरअसल ऐसा माना जाता है, कि यहां जामा मस्‍जिद के पहले हरिहर मंदिर था और इसी विवाद को लेकर 19 नवंबर 2024 को सिविल जज ने जामा मस्‍जिद में सर्वे के आदेश दिए थे। आयोग ने अपने रिपोर्ट में बताया है, कि सर्वे को लेकर मुस्लिम समुदाय में ग़लत जानकारी फ़ैलाई गई, जिससे हिंसा ने भयानक रूप ले लिया।

पुलिस की गोलियों से नही मरे थे लोग

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है, कि 24 नवंबर 2024 की सुबह भारी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास एकत्र हुए थे। इसके बाद नारेबाजी, पथराव, गोलीबारी और आगजनी की घटनाएं हुईं। साथ ही भीड़ में शामिल कई लोगों ने अपने चेहरे ढक रखे थे। इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 28 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इन 28 मे से 7 पुलिसकर्मियों को गोली लग गई थी। रिपोर्ट में एक और चौकाने वाला तथ्‍य सामने आया है, जिसमें कहा गया है, कि हिंसा के दौरान जो लोग गोली लगने से मारे गए थे, वो गोलियां पुलिस की तरफ़ से नहीं चलाई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, उपद्रवियों ने पुलिस के हथियार और दूसरे सामानों को लूटने की भी कोशिश की थी।

Image: PBSHABD

हिंसा में सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क

आयोग की रिपोर्ट में समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर रहमान बर्क घिरते हुए दिखाई दे रहे हैं। जिया उर रहमान संभल लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से सांसद हैं और जामा मस्‍जिद में हिंसा को भड़काने के पीछे शुरू से ही इन पर आरोप लगते आए हैं और रिपोर्ट में भी इनके नाम का जि‍क्र किया गया है। इसके अलावा हिंसा में समाजवादी पार्टी के विधायक इक़बाल महमूद के बेटे सुहेल इक़बाल समेत कई लोगों के नाम सामने आएं हैं। इससे अब समाजवादी पार्टी की मुश्‍क़‍िले बढ़ती हुई नज़र आ रही हैं। ख़ासकर अगले वर्ष होने वाले उत्‍तर प्रदेश चुनाव को ध्‍यान में रखते हुए यह अखि‍लेश यादव के लिए बड़ा झटका है।

यह भी पढ़ें: क्‍या यह साजिश थी, नोएडा का हिंसक श्रमिक आंदोलन?

राजनीति ने पैदा की धर्म और जाति की राजनीति

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हिंसा अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे पहले पहले से साजिश रचि गई थी। भीड़ का उकसाया गया, जिससे हिंसा भड़क सके। सवाल उठता है, कि यह सब आख़‍िर किसलिए? क्‍या हमारी देश की राजनीति का स्‍तर इतना गिर गया है, कि हिंदु-मुस्‍लिम को खुश करने के लिए हम कुछ भी करने को तैयार हैं। राजनीति ने इस देश को हमेशा धर्म और जाति में बांटने की कोशिश की है और संभल हिंसा इसका प्रत्‍यक्ष उदाहरण है।  

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