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क्‍या यह साजिश थी, नोएडा का हिंसक श्रमिक आंदोलन?

आंदोलन करना ठीक है और अगर हम किसी चीज़ से असंतुष्‍ठ हैं, तो हमे अपनी बात रखने का पूरा हक़ है, लेकिन नुक़सान पहुंचाने का हक़ हमें कौन देता है, गाड़‍ियों में आग लगाने का क्‍या मतलब निकलता है?
  • डिजिटल साजिश का हुआ ख़ुलासा
  • 62 लोगों की हो चुकी है गिरफ़्तारी

आंदोलन करना ठीक है, मगर इस तरह नहीं

हाल ही में नोएडा में पगार में बढ़ोतरी को लेकर मजदूरों ने जमकर हिंसा प्रदर्शन किया था। उन्‍होंने पत्‍थरबाजी से लेकर आगजनी तक की। आंदोलन करना ठीक है और अगर हम किसी चीज़ से असंतुष्‍ठ हैं, तो हमे अपनी बात रखने का पूरा हक़ है, लेकिन नुक़सान पहुंचाने का हक़ हमें कौन देता है, गाड़‍ियों में आग लगाने का क्‍या मतलब निकलता है। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने मंच से मजदूरों को शांत औश्र संयम बरतने के लिए कहा था और विश्‍वास भी दिलाया था, कि मजदूरों की न्‍यूनतम वेतन को लेकर जो मांगे है उसे पूरा किया जाएगा और इसे किया भी और श्रमिकों की सहूलियत के लिए वेतन बोर्ड के गठन का भी फ़ैसला लिया गया है। बावजूद इसके श्रमिकों ने शहर में तोड़फ़ोड और दहशत का माहौल बनाने की कोशिश की आख़िर ऐसा क्‍यों।

यह भी पढ़ें: नोएडा श्रमिक आंदोलन: क्‍या है योगी सरकार की नई न्यूनतम मजदूरी दर?

Lakshmi Singh, Police Commissioner, Gautam Buddha Nagar: Source PBSHABD

मजदूर से ज़्यादा बाहरी लोग

जांच में यह भी पता चला था, कि इस हिंसक आंदोलन में मजदूर से ज़्यादा बाहरी लोग और तत्‍व काम कर रहे थे। आख़‍िर ये लोग कौन थे और इनका मक़सद क्‍या हो सकता है। एक मजदूर, जो अपना गांव छोड़कर दूसरे शहर में चार पैसे कमाने के लिए जाता है, ताक़ि‍ उसका परिवार चल सके, क्‍योंकि उसके ऊपर अपने परिवार के भरन पोषण की बहुत बड़ी ज़‍िम्‍मेदारी होती है। ऐसे में उसका हिंसक आंदोलन में क़ूदना तर्कपूर्ण नहीं लगता। इसके पीछे ज़रूर कोई तीसरी ताक़त होती है, जो आंदोलन के नाम पर मजदूरों को बदनाम करते हैं।

यह कॉम्‍पिटिशन का दौर है

अब वो दौर चला गया जब फ़ैक्‍ट्र‍ियों और मीलों में हड़ताल कर दी जाती थी। आज यह सब यथार्थ नहीं लगता, क्‍योंकि कॉम्‍पिटिशन इतना बढ़ गया है, कि आज हर जगह हर स्‍तर पर काम के लिए मारामारी है और काम पाना आज की तारिख़ में आसान भी नहीं। ऐसे में एक कामकाजी व्‍यक्‍ति उस जगह से ख़तरा क्‍यों मोल लेगा, जहां से उसकी रोज़ी रोटी चलती है, घर-परिवार चलता है, इसलिए इस आंदोलन में बाहरी ताक़तों के शामिल होने के सबूत पक्‍के साबित होते हैं।  

कहीं ये चुनावी मामला तो नहीं?

अगली साल यूपी में विधानसभा चुनाव भी है। वर्तमान में बीजेपी के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेत़ृत्‍व में पिछले 10 वर्षों में उत्‍तर प्रदेश का कायाकल्‍प किया है। उत्‍तर प्रदेश को देश-विदेश में पहचान दिलाई। डर के माहौल को ख़त्‍म किया। प्रशासन सख्‍़त हुए। नहीं तो एक समय था, जब विदेश तो छोड़ दीजिए, अपने भारत देश में ही यूपी को हीन भावना से देखा जाता था। हो सकता है, कि अगले साल होने वाले यूपी चुनाव के मद्देनज़र एक नेरेटिव भी सेट करने की कोशिश हो सकती है।

‘डिजिटल साजिश’ का पता चला

नोएडा में श्रमिक हिंसा को लेकर अब एक बड़ा खुलासा हुआ है। गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया, कि इस हिंसक आंदोलन के पीछे एक सुनियोजित “डिजिटल साजिश” थी, जिसका कनेक्शन पाकिस्तान से जुड़ा पाया गया है। पुलिस के मुताबिक़, 13 तारीख को स्थिति नियंत्रित होने के बाद दो X (ट्विटर) हैंडल—‘MEER ILYASI’ और ‘AYUSHI TIWARI’—के माध्‍यम से फ़र्जी नैरेटिव फ़ैलाया गया, जो पिछले तीन महीनों से सक्रिय थे।

पकड़े गए तीन आरोपी

जांच में ‘राष्ट्रवादी वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया’ के तीन मुख्य आरोपियों का नाम‍ सामने आए हैं, जिसमें से दो आरोपी रुपेश रॉय और मनीषा चौहान को गिरफ़्तार कर लिया गया है, जबकि आदित्य आनंद फ़रार है। ये तीनों आरोपी हिंसा के दौरान नोएडा में मौजूद थे और भड़काऊ भाषण दे रहे थे।

हिंसा फ़ैलाने के लिए बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप

मजदूर आंदोलन में हिंसा फ़ैलाने के लिए QR कोड के भी बनाए गए थे और VPN का इस्तेमाल कर पहचान छिपाई गई। पुलिस ने अब तक इस हिंसा में 13 मामले दर्ज कर 62 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। बता दें, कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में स्थिति सामान्य है और सुरक्षा के लिए लगातार फ्लैग मार्च किया जा रहा है।

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