- महिला आरक्षण ना पारित होने पर जगह जगह आंदोलन
- परिसीमन के मुद्दे पर विपक्ष सहमत नहीं
नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत
हाल ही में महिला आरक्षण बिल पारित ना होने से देशभर में बीजेपी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों द्वारा आक्रोश देखने को मिल रहा है। ‘नारी वंदन अधिनियम’ और परिसीमन को संसद के लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत नहीं मिला है। कुल 528 वोट पड़े, जिसके अंतर्गत इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि महिला आरक्षण बिल पारित करने के लिए कुल 352 वोटो की ज़रूरत थी।
यह भी पढ़ें: महिलाओं का सपना रह गया अधूरा, नारी शक्ति वंदन को नहीं मिली गति
50 प्रतिशत शीट बढ़ाने पर विपक्ष सहमत नहीं
विपक्ष का कहना है, कि इस आरक्षण को परिसीमन के आधार पर ना लागू किया जाए। उन्होंने इसे राजनीति रोटी सेकने जैसा बताया। विपक्ष ने लोकसभा में 50 प्रतिशत सीट बढ़ाए जाने के बाद 33 प्रतिशत महिला आरक्षण देने वाली बात को नकार दिया। वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, कि अगर सभी राज्यों में लोकसभा की सीटें नहीं बढ़ाई जाएंगी, तो वर्ष 2029 में महिला आरक्षण देना मुश्क़लि होगा, क्योंकि सीटों का बढ़ना ज़रूरी। देश की जनसंख्या तेज़ी से बढ़ी है और इसलिए इतनी बड़ी आबादी के लिए सीटों को बढ़ाना ज़रूरी है। हम पुराने जनगणना के आधार पर महिला आरक्षण नहीं दे सकते।
महिलाएं माफ़ नहीं करेंगी
विपक्ष इसके विरोध में अडिग रहा और इस बिल को पारित होने से रोक दिया। विपक्ष जहां महिला आरक्षण पास न होने का जश्न मना रहा था, वहीं सत्तापक्ष का कहना है, कि विपक्ष ने महिलाओं के साथ धोखा किया है और महिलाओं के आक्रोश के लिए उन्हें तैयार रहना होगा। देश की महिलाएं उन्हें माफ़ नहीं करेंगी।
प्रधानमंत्री ने कहा महिला आरक्षण समय की मांग
इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण को लेकर देश को संबोधित किया और कहा, कि बिल पास होता तो ऐतिहासिक होता, लेकिन कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (SP), TMC और DMK ने यह ऐतिहासिक मौका गंवा दिया है। उन्होंने कहा, कि ‘नारी शक्ति वंदन संशोधन अधिनियम’ आज के समय की मांग बताते हुए विकसित भारत के लिए संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी ज़रूरी है।
विपक्ष को श्रेय देने के लिए थे तैयार
प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया, कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, TMC और DMK जैसी परिवारवादी पार्टियों के कारण यह संशोधन अधिनियम आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर पाया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस उपलब्धि का श्रेय विपक्ष को देने के लिए भी तैयार थी।
कांग्रेस हर पहल का करती है विरोध
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को महिलाओं के दशकों के संघर्ष को देखते हुए अपना रुख बदलना चाहिए और अपनी गलतियों को सुधारना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर यह भी आरोप लगाया, कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ हो या GST, कांग्रेस ने हर पहल का विरोध किया है। कांग्रेस एक अनिर्णय वाली पार्टी है, जो फैसलों को लटकाने, अटकाने और भटकाने में विश्वास करती है।
परिसीमन पर भ्रम फैलाया जा रहा है
परिसीमन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा, कि सभी राज्यों को वर्तमान दर के अनुसार प्रतिनिधित्व मिलता, लेकिन कांग्रेस ने इस पर भ्रम फैलाया और ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति अपनाई।



