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महिलाओं का सपना रह गया अधूरा, नारी शक्‍ति वंदन को नहीं मिली गति

पूरे देश में एक ही चर्चा चल रही है और वो है लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण। लोकसभा में पिछले 2 दिनों से नारी शक्‍ति वंदन अधि‍नियम की चर्चा ने जोर पकड़ लिया था।
  • 528 वोट में से ज़रूरी थे 352 वोट, मिले 298
  • विपक्ष ने परिसीमन का किया विरोध

एक ही चर्चा नारी वंदन

पूरे देश में एक ही चर्चा चल रही है और वो है लोकसभा में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण। लोकसभा में पिछले 2 दिनों से नारी शक्‍ति वंदन अधि‍नियम की चर्चा ने जोर पकड़ लिया था, वहीं 5 राज्‍यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भी असम से लेकर बंगाल और दक्षि‍ण राज्‍यों में ये मुद्दे की तरह छाया हुआ है। आज के दौर में चुनाव हो और महिलाओं की चर्चा ना हो ऐसा हो नहीं सकता।

यह भी पढ़ें: ‘नारी वंदन अधि‍नियम’ को बहुमत ना देकर विपक्ष ने खोया ऐतिहासिक मौक़ा- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

अब वो दौर चला गया

अब वो दौर चला गया जब देश में पुरुष को ही प्रथम माना जाता था और हर निर्णय में उसका फ़ैसला ही सर्वोच्‍च होता था और महिलाएं सिर्फ़ घर के अंदर बंद रह जाया करती थी। पिछले एक दशक में महिलाएं जिस तरह से आगे आई हैं, वैसा पहले नहीं हुआ। इसका श्रेय किसी एक को नहीं दिया जा सकता। इसके पीछे सरकार की योजना, हमारी शि‍क्षा और बदलती सोच को जाता है। यह कहना ग़लत नहीं होगा, कि अगर मुखिया सही हो और उसका साथ मिले, तो हमें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता और यही कारण है, कि ग्रामीण से लेकर शहर तक आज महिलाओं का बोलबाला दिखाई देता है।

आत्‍मनिर्भर बनती महिलाएं

महिलाओं की सुरक्षा हमारे देश में एक बड़ी चुनौती रही है, जिस पर केंद्र सरकार ने नए क़ानून पारित कर और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए यह बताया, कि जुर्म करने वाले अब बक्‍़शे नहीं जाएंगे, जिससे जुर्म करने वालों के अंदर डर बैठा। सरकार आज बेटियों और महिलाओं को आत्‍मनिर्भर बनाने पर जोर दे रही है, जिसमें लखपति दीदी व स्‍वंय सहायता समूह बड़ा उदाहरण है। यहां तक घर की रसोईघर में भी सरकार ने महिलाओं को उज्‍जवला योजना से जोड़कर आत्‍मनिर्भर की नई पहल शुरू की और यही नहीं, हर महीने उनके खाते में भेजे जाने वाली रक़म ने घर के अंदर सम्‍मान देने और दूसरों पर निर्भरता को ख़त्‍म करने का काम किया।  

महिला वोट बैंक

केंद्र सरकार महिलाओं के हक़ के लिए जब देश के संसद (लोकसभा) पहुंचती है, तो उसे महिला आरक्षण के लिए पूर्ण बहुमत नहीं मिला पता। यह विडंबना ही है, हमारे देश की, जहां महिलाओ को वोट बैंक तो माना जाता है, लेकिन जब कुछ करने की बारी आती है, तो कोई उस पर बात नहीं करना चाहता। ऐसा माना जाने लगता है, कि अगर ऐसा हुआ, तो इससे मौजूदा सरकार को फ़ायदा होगा।

सरकार ने क्‍या तर्क दिया?

सत्‍तापक्ष का कहना था, कि राज्‍यों की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की वृद्धि‍ करके महिलाओं को वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव की सीटों में 33 प्रतिशत आरक्षण मिले। केंद्र ने कहा, कि अगर यह सीटे नहीं बढ़ाई गई, तो महिला आरक्षण देना मुश्‍क़िल हो जाएगा।  

विपक्षी दलों ने इस पर संदेह जताते हुए ख़ारिज कर दिया। विपक्ष ने इस 131वें संशोधन बिल को पास ना होने देने के कई तर्क पेश किए:

1) परिसीमन और जनगणना को बड़ी वजह बताया। उन्‍होंने क‍हा, कि इसे परिसीमन और जनगणना से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। विपक्ष ने कहा, कि अगर सरकार 543 लोकसभा सीटों पर ही महिला आरक्षण लेकर आती है, तो हम अभी इस बिल को पास करने के लिए तैयार हैं, लेकिन परिसीमन पर नहीं।

2) इसके अलावा विपक्ष ने इस आरक्षण में महिलाओं के लिए अलग-अलग वर्ग की हिसाब से आरक्षण की बात भी उठाई।

3) उन्‍होंने कहा, कि इस महिला आरक्षण से दक्षि‍ण जैसे राज्‍यों को नुक़सान पहुंचेगा।   

कुल कितने पड़े वोट?

नारी शक्‍ति वंदन अधि‍नियम संशोधन के लिए लोकसभा में कुल 528 वोट पड़े, जिसमें पक्ष में 298 और इसके विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इस महिला आरक्षण बिल को पास कराने के लिए कुल 352 वोटों की ज़रूरत थी। इस तरह से यह महिला आरक्षण विधेयक विपक्ष के विरोध की भेंट चढ़ गया।

नहीं मिला दो तिहाई बहुमत

जिस तरह से नारी शक्‍ति वंदन अधि‍नियम संशोधन और परिसीमन पर चर्चा होने के बाद महिला आरक्षण को दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाना कई सवाल खड़े कर देती है। केंद्र में भारतीय जनता पार्टी चाहती थी, कि यह विधेयक पारित हो, लेकिन विपक्षी खेमा इसको लेकर असमंजस में था और उन्‍होंने 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को लेकर बहुमत नहीं दिया और यह विधेयक पास नहीं हो पाया।

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