- 2,500 से ज़्यादा लोग लापता
- क़रीब 300 भारतीय अब भी लापता
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के चलते मौतों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। अब यह आंकड़ा बढ़कर 900 के ऊपर पहुंंच गया है, वहीं 2,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी लापता हैं, जिनकी संख्या 300 के क़रीब बताई जा रही है। पिछले 5 दिनों में मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। दरअसल फ़्लैश फ़्लड इतनी तेज़ी से आया, कि लोगों को भागने का मौक़ा ही नहीं मिला।
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8,000 से ज़्यादा लोगों बचाया गया, दोबारा अलर्ट जारी
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) ने बताया, कि अब तक प्रभावित इलाक़ो से 8,000 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें 227 विदेशी नागरिक शामिल हैं। नेपाल सरकार ने भोटेकोशी नदी में बाढ़ को लेकर फिर अलर्ट जारी किया है। NDRRMA के अनुसार, नदी में पानी का बहाव बढ़ रहा है। प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग ज़िलों में भोटेकोशी नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
160 भारतीयों का रेस्क्यू
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, कि बाढ़ के बाद नेपाल में अब तक 160 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। उन्होंने बताया, कि पहले लापता क़रीब 50 भारतीय नागरिकों से दोबारा संपर्क हो गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक़, 300 से अधिक भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं, जबकि दूसरे देशों की नागरिकता रखने वाले क़रीब 128 भारतीय मूल के लोग भी लापता हैं।

चीन में 900 भारतीय सुरक्षित
पिछले 2 दिनों में 598 भारतीय नागरिक चीन से नेपाल पहुंचे हैं और 900 भारतीय नागरिक चीन में सुरक्षित बताए जा रहे हैं। बीजिंग में स्थित भारतीय दूतावास उनसे सीधे और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से संपर्क में है। विदेश मंत्रालय ने कहा, कि भारत सरकार प्रभावित लोगों के बचाव और राहत के लिए नेपाल और चीन के अधिकारियों के साथ समन्वय कर रही है।
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भारत की चौथी उड़ान काठमांडू पहुंची
भारत बाढ़ प्रभावित नेपाल में लगातार राहत और बचाव के कार्यों में जुटा है और नेपल की हर संभव मदद कर रहा है। इसके अंतर्गत 11 टन राहत सामग्री लेकर चौथी उड़ान काठमांडू पहुंच गई है, जिसे नेपाल सरकार को सौंप दिया गया है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा, कि इस उड़ान में बचाव और राहत कार्यों के लिए ज़रूरी सामान और तकनीकी संसाधन नेपाल भेजे गए हैं।

57 टन से अधिक राहत सामग्री भेज चुका है भारत
इससे पहले भारत 3 उड़ानों के जरिए 57 टन से अधिक आपातकालीन राहत सामग्री पहले ही नेपाल भेज चुका है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर टूटने से हिमस्खलन हुआ, जिसके बाद पानी, कीचड़ और मलबा तेज़ी से नीचे की ओर बहने लगा। इसके बाद नेपाल में तबाही का मंजर देखने को मिला। इस आपदा में नेपाल के कई कस्बों और गांवों को भारी नुकसान पहुंचा हैं। पुल, सड़कें और इमारत सब पानी में टूट कर बह गए।






