चित्रकूट में मंदाकिनी नदी ने 23 वर्ष का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। अधिक वर्षा के बाद मंदाकिनी नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया। ख़तरे के निशान से क़रीब 8 मीटर ऊपर बह रही नदी की जलधारा ने रामघाट सहित नदी किनारे बसे गांवों में भारी तबाही मचाई है। यूपी-एमपी मार्ग और झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कर्वी स्थित पुल के ऊपर पानी आने से घंटों आवागमन बाधित रहा।
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मंदाकिनी नदी का जलस्तर 146.74 मीटर
28 और 29 अगस्त को रात में हुई मूसलाधार बारिश के बाद सतना जिले में 73.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जिसका सबसे ज़्यादा असर चित्रकूट में दिखाई दिया। इसके बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर 146.74 मीटर तक बढ़ गया, जबकि मंदाकिनी का सामान्य अधिकतम स्तर 139.60 मीटर है। अधिकतम स्तर को भी पार करने के बाद की वजह से चित्रकूट के निचले इलाकों में घरों और सड़कों पर पानी भर गया। इसके बाद लोगों के सामने बड़ा संकट पैदा हो गया है।
अब तक की यह सबसे भयानक बाढ़
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चित्रकूट में अब तक की यह सबसे भयानक बाढ़ है। बाढ़ के चलते गोबरिया गांव में क़रीब एक दर्जन फंसे लोगों को SDRF की टीम ने रेस्क्यू कर सुरक्षित बाहर निकाला। वहीं, मध्य प्रदेश क्षेत्र में फंसे लोगों को हेलीकॉप्टर की मदद से सुरक्षित निकाला जा रहा है। विस्थापित लोगों के लिए प्रशासन की ओर से भोजन और ठहरने की व्यवस्था की गई है।
चारों तरफ़ भरा पानी
नदी का जलस्तर खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर पहुंचने के बाद निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया। कई परिवार घरों की छतों पर फंस गए। सड़क संपर्क बाधित होने पर जिला प्रशासन ने सेना और वायुसेना की मदद ली। सेना की बचाव टुकड़ी और वायुसेना के दो हेलीकॉप्टरों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश
इस बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बारिश, जलभराव और बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। इसके बाद उन्होंने सतना कलेक्टर को निर्देश दिए, कि प्रभावित लोगों, चित्रकूट में रुके श्रद्धालुओं और रहवासियों के लिए भोजन, वस्त्र और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर राहत राशि उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा, कि बारिश के कारण किसी भी तरह की जनहानि और पशुहानि न हो, इसके लिए अधिकारी पूरी सतर्कता बरतें।






