- कई दिनों से 9 छात्र बैठे थे आमरन अनशन पर
- विधानसभा मार्च में हुई थी छात्रो पर लाठीचार्ज, नहीं टूटी हिम्मत
झारखंड में JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फ़ैसला 24 दिनों के छात्र आंदोलन के बाद आख़िरकार हेमंत सोरेन की सरकार ने छात्रों की मांगों को मान लिया है। 24 दिन का ये संघर्ष इन छात्रों के लिए आसान नहीं था। वो इसलिए भी आसान नहीं था, क्योंकि इस आंदोलन में कोई बड़ा चेहरा नहीं था। जंतर-मंतर पर जिस तरह विपक्षी नेताओं और कॉकरोच जनता पार्टी के समर्थकों का हुजूम था, यहां ऐसा कुछ नहीं था। रांची मे छात्र ही आंदोलन कर रहे थे और अपने भविष्य की लड़ाई खुद लड़ रहे थे।
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TDPL की सभी परीक्षा रद्द
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 24 दिनों के छात्र आंदोलन के बाद कहा, कि मंत्रिमंडल ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग-संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा (JSSC-CGL) रद्द करने का फ़ैसला किया है। झारखंड सरकार ने कहा है, कि TDPL द्वारा कराई गई सभी परीक्षाएं रद्द होंगी और वर्ष 2014 से अब तक अन्य सभी परीक्षाओं की जांच होगी। इसके बाद छात्रों में ख़ुशी की लहर दौड़ गई है।

ये 9 छात्र थे आमरन अनशन पर
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 9 छात्र आमरन अनशन पर रहे। तबीयत ज़्यादा ख़राब होने के बावजूद इन्होंने अपनी लड़ाई नहीं छोड़ी। इनमें देवेन्द्र नाथ महतो (छात्र नेता) महेन्द्र प्रसाद, ब्रह्मानंद कुमार, राहुल क्रांति, रुपेश पाल, सबिता कुमारी, हबीबा, प्रेम नायक और कुश महतो अनशन पर बैठे थे। पिछले 24 दिनों से अपनी मांगों को लेकर छात्र डटे हुए थे। उनकी मांग साफ़ थी, कि JPSC/ JSSC की परीक्षाओं में हुई कथित धांधली, OMR शीट में गड़बड़ी और पेपर लीक के चलते इन परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा परीक्षा ली जाए और मामले की जांच CBI को सौंप दी जाए।

नहीं हारी हिम्मत, सरकार को माननी पड़ी मांग
सच में यह कह सकते हैं, कि छात्रों की हिम्मत के आगे झारखंड की सरकार को झुकना पड़ा। ये हज़ारों छात्र यूंही नहीं अपने हक़ की लड़ाई लड़ रहे थे। वो उस हक़ की लड़ाई लड़ रहे थे, जो कुछ लोगों के लालच की वजह से उनसे छीन ली गई थी। आज यह हमारे देश की सबसे बड़ी विडंबना है, कि आज शिक्षा बहुत बड़ा व्यापार बन गया है, जिसे हज़ारों व लाखों रुपये में ख़रीद ली जाती है और एक विद्यार्थी पूरे जीवन परीक्षा की तैयारी करता रहता है और एक हदन संघर्ष करते-करते टूट जाता है और चंद पैसे वाले अयोग्य होते हुए भी उस पद पर बैठ जाते हैं, जिसके वो हक़दार नहीं है।
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छात्रों के मजबूत इरादे
ये छात्रों की बड़ी जीत है। इससे पता चलता है, कि यदि इरादे मजबूत हों, तो सरकार को झुकना पड़ता है और वही हुआ। सरकार को उनकी मांगों को मानना पड़ा। यह बताता है, परीक्षा में कुछ न कुछ धांधली हुई थी, जिसके लिए सरकार ज़िम्मेदार थी, लेकिन इस मामले को मनमाने ढंग से दबाया जाता रहा। ख़ैर यह सब जांच का विषय है। जांच पूरी होते ही इसका जवाब मिल जाएगा। ख़ुशी की बात है, कि आज झारखंड का हर छात्र बेहद खुश होगा, क्योंकि ये लड़ाई आसान नहीं थी।
विधानसभा घेराव में लाठीचार्ज
इससे पहले सरकार और छात्रों के बीच कई बार वार्ताएं हुई, लेकिन सभी बेनतीजा निकली, क्योंकि सरकार छात्रों की मांगों को पूरी तरह से नहीं मान रही थी। इसके बाद 10 अगस्त को छात्रों विधानसभा घेराव का ऐलान किया। इसके बाद विधानसभा घेराव को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले चलाए गए, पानी की बौछार की गई और आख़िर में बड़े पैमाने पर लाठी चार्ज किया गया। बावजूद इसके छात्र मैदान में डटे रहे और उनकी इसी हिम्मत के आगे सरकार को पेपर रद्द करने का फ़ैसला लेना पड़ा।
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ऐसी राजनीति मत कीजिए
एक बात तो तय है, कि हमारे देश को राजनीति ने बड़ा नुक़सान पहुंचाया है। जहां जिसकी सरकार वहां वो ख़ामोश बैठा है और जहां वो विपक्ष में है, वहां आंदोलन चलने लगता है। एक ही मुद्दे पर अलग-अलग विचारधारा नहीं होनी चाहिए। एक जगह तो, वो अन्याय के लिए लड़ते हैं, लेकिन जहां उनकी सरकार है, वहां अन्याय बेमतलब की चीज़े बन जाती हैं। राजनीति करिए, लेकिन बांट कर नहीं।






