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JPSC-JSSC विवाद: छात्रों के साथ ‘खेला’ या सरकार की बड़ी चूक? हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद बढ़ा विवाद

JPSC-JSSC विवाद में हाईकोर्ट के फैसले के बाद झारखंड में सियासी घमासान बढ़ गया है। छात्रों और सफल अभ्यर्थियों के बीच टकराव के बीच सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं।
  • सरकार ने 44 परीक्षाओं को रद्द करने का किया था ऐलान
  • 24 दिनों के बाद सरकार का आया था फ़ैसला

झारखंड में हाईकोर्ट के फ़ैसले के बाद सियासी गर्मी पहले से ज़्यादा बढ़ गई है। दरअसल लंबे छात्र आंदोलन के बाद मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और 2014 से अभी तक की सभी परीक्षाओं की जांच करने का ऐलान किया था। इसके बाद 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा  को भी रद्द करने का फ़ैसला लिया गया। इसके बाद आंदोलन कर रहे छात्र तो खुश हो गए, लेकिन इन परीक्षाओं को पास कर नौकरी पा चुके युवाओं में इस फ़ैसले के ख़ि‍लाफ़ आक्रोश देखा गया और सरकार के फ़ैसले का विरोध करते हुए आंदोलन करने का ऐलान कर दिया।

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झारखंड हाईकोर्ट ने परीक्षा रद्द पर लगाई रोक

झारखंड सरकार की ओर से नोटिफ़‍िकेशन जारी कर नियुक्त कर्मियों को हटाए जाने के आदेश को चुनौती देने वाली 4 अलग-अलग याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मामले में हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने JSSC-CGL और CDPO परीक्षा से जुड़ी नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSSC व FSO परीक्षा को रद्द करने के सरकार के फ़ैसले पर स्टे लगा दिया है।

परीक्षा पास कर चुके अभ्यर्थी खुश, सरकार को घेरा

इस फ़ैसले के बाद JSSC CGL, CDPO परीक्षा से जुड़े सफल अभ्यर्थियों के बीच खुशियो की लहर दौड़ गई और हाईकोर्ट का धन्‍यवाद करते हुए सरकार पर निशाना साधा और उनके फ़ैसले को छात्र आंदोलन के दबाव में लिया गया फ़ैसला बताया। दरअसल सरकार के 44 परीक्षाओं को रद्द करने के बाद नौकरी पेशा लोगों की नौकरी पर ख़तरा मंडरा रहा था। हज़ारों की संख्‍या में नौकारी पेशा लोगों को मंत्रालय के बाहर खड़ा देखा गया था।

दो खेमो में बंटा झारखंड, अगली सुनवाई 15 सितंबर को  

इस फ़ैसले के बाद झारखंड दो भागों में बंटता नज़र आ रहा है। एक खेमा वो है, जो छात्रों के साथ हैं, जो लगातार परीक्षाओं में हो रही धांधली का आरोप लगा रहे हैं, वहीं दूसरा खेमा, इन परीक्षाओं को पास कर नौकरी पा चुके युवाओं के साथ हैं। अब दोनों एक दूसरे के ख़‍िलाफ़ हैं और बयानबाजी का दौर चल पड़ा है। यह मामले की गंभीरता को देखते हुए, यह मामला इतनी जल्‍दी समाप्‍त होता नहीं दिखाई देता। कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 7 सितंबर तक का समय दिया है। वहीं याचिकाकर्ताओं को 14 सितंबर तक अपना प्रति उत्तर देने का आदेश दिया है। इसके बाद हाईकोर्ट 15 सितंबर मामले की अगली सुनवाई करेगी।

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छात्र सरकार के रवैये से नाखुश

वहीं भाजपा नेताओं का कहना है, कि झारखंड में सरकार ने छात्रों को ठगने का काम किया है। छात्र आंदोलन में शामिल सभी छात्रों में अब सरकार के ख़‍िलाफ़ रोष है और प्रदर्शन भी तेज़ हो गए हैं। मुख्‍यमंत्री का पुतना फुंका जा रहा है, जि‍सपर छात्रों पर लाठीचार्च हुई। अब राजनीति के बीच छात्र पिसते नज़र आ रहे हैं। मुख्‍यमंत्री हेमंत सोरेन के सामने भी अब बड़ी चुनौमी आकर खडी़ हो गई है और इनको अब समाधान ढूंडना ही होगा, नहीं तो यह आंदोलन कहां तक पहुंचेगा कहना मुश्‍क़‍िल है।

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11वीं-13वीं JPSC में पैसे देकर पाई थी नौकरी

यह मामला इसलिए भी बना गंभरी हुआ है, क्‍योंकि हाल में CID की जांच में परीक्षा से जुड़े महत्‍वपूर्ण तथ्‍य सामने आए थे, जिसमें पूछताछ के बाद आरोप लगाए गए थे, कि 11वीं-13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा में कई अभ्यर्थियों ने पैसे देकर नौकरी पाई थी। इसके बाद लाज़मी है, कि छात्र शांत नहीं बैठने वाले, वो अपने न्‍याय के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। सरकार ने आंदोलन को शांत कराने के लिए छात्रों के हक़ में फ़ैसला तो सुना दिया, लेकिन हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। इससे ऐसा प्रतीत होता है, कि सरकार अब छात्रों के साथ राजनीति कर रही है और उनको छात्रों का हित नहीं दिखा दे रहा।

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