- 19,324 वोटों के अंतर से जीती जन सुराज
- भाजपा प्रत्याशी को मिले 44,827 वोट
हाल में हुए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के प्रत्याशी व संस्थापक प्रशांत किशोर ने भाजपा के प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को क़रीब 19,324 मतों के अंतर से हरा दिया। इससे पहले बांकीपुर में भाजपा के नितिन नवीन विधायक थे, जो अब भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष हैं। उनके जाने से यह सीट खाली हो गई थी, जिस पर हुए उपचुनाव में जनता ने जन सुराज पार्टी को अपना मत दिया। जीत के बाद निर्वाचन पदाधिकारी ने प्रशांत किशोर को विजयी होने का प्रमाणपत्र भी प्रदान किया।
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विधानसभा चुनाव में मिली थी बड़ी हार
बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र से अब प्रशांत किशोर विधायक बन गए हैं। बिहार के विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज काफ़ी मेहनत से लड़ी थी, लेकिन अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी। जनता ने भाजपा और JDU वाली गंठबंधन की सरकार को भारी बहुमत से विजयी बनाया था। इसी परिणाम को ध्यान में रखते हुए भाजपा को उम्मीद थी, कि उसे बांकीपुर उपचुनाव में भी जनता का समर्थन मिलेगा, लेकिन इसका उलटा हुआ और जनता ने इस बार जन सुराज पर अपना विश्वास जताया।
प्रशांत किशोर को मिले 64,151 वोट
प्रशांत किशोर को इस उपचुनाव में कुल 64,151 वोट मिले, वहीं भाजपा के प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा को 44,827 मत मिले और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की रेखा कुमारी को 14,273 वोट मिले। प्रशांत किशोर और नीरज कुमार के बीच 19,324 वोटों का अंतर रहा, जो यह बताता है, कि बांकीपुर की जनता को उपचुनाव में प्रशांत किशोर के उठाए गए मुद्दे सही लगे और उन पर भरोसा दिखाया।
प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को घेरा
जब से नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री का पद छोड़ा और भाजपा ने अपने मंत्री सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाया है, तब से विपक्षी खेमा बिहार सरकार पर हमलावर है। इसी मुद्दे को भी प्रशांत कुमार ने जमकर उठाया। उन्होंने कहा, कि आज बिहार में ऐसा मुख्यमंत्री है, जिन पर हत्या से लेकर कई मामले दर्ज़ हैं। बिहार में यह भी एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है, जिसको लेकर विपक्षी खेमा भाजपा को लगातार घेर रही है।
यह तो वक़्त ही बताएगा
इससे पहले विधापसभा चुनाव में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के चेहरे पर एनडीए की सरकार को पूर्ण बहुमत मिला था, लेकिन नीतीश कुमार के राज्यसभा में जाने के बाद भाजपा ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने का फ़ैसला किया। अब यह तो वक़्त ही बताएगा, कि भारतीय जनता पार्टी का यह निर्णय कितना सही साबित होता है।
रोजगार, शिक्षा और विकास को बनाया मुद्दा
उपचुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, युवाओं के लिए रोजगार, पलायन रोकना और सम्पूर्ण विकास जैसे मुद्दे उठाए थे, जिसमें जनता ने सहमती जताई है। बिहार में रोजगार, शिक्षा और विकास पर अभी भी बहुत काम किया जाना बाक़ी है। यही कारण है, कि प्रशांत किशोर ने इन मूलभूत समस्याओं को उठाया और जनता ने इस पर सहमती भी जताई। चुनाव जीतने के बाद प्रशांत किशोर ने बांकीपुर की जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा, कि लोकतंत्र में हार-जीत स्वाभाविक प्रक्रिया है। उन्होंने कहा, कि जिन्होंने उन्हें मत और विश्वास दिया, वे उनके प्रति कृतज्ञ हैं और बिना किसी भेदभाव के सभी लोगों के हित में कार्य करेंगे। उन्होंने उन मतदाताओं का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने दूसरे उम्मीदवारों को समर्थन दिया।
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बिहार की राजनीति में बदलाव के संकेत
दूसरी तरफ़ भारतीय जनता पार्टी उपचुनाव हारने के बाद हार की समीक्षा करने में लगी हुई है। हार की समीक्षा के लिए बिहार सरकार के मंत्री और संगठन के पदाधिकारी लगातार बैठक कर रहे हैं। भाजपा एक तरफ़ हार की समीक्षा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ़ जन सुराज के समर्थक प्रशांत किशोर की जीत पर खुशियां मना रहे हैं। इसे बिहार की राजनीति में नए बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। नीतीश कुमार जनता से जुड़े हुए मुख्यमंत्री थे। बिहार में उनकी छवि इतनी बड़ी थी, कि आज भी लगता है, कि नीतीश कुमार ही बिहार के मुख्यमंत्री हैं। उनके हटने से बिहार में मुख्यमंत्री जैसे पद पर खालीपन सा देखा जा रहा है।






