- मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा था ‘मोदी का बाप भी जाएगा’
- लगातार चुनाव हारती कांग्रेस को विचार करना चाहिए
हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान की पूरे देश में चर्चा हुई और हो रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बयान देते हुए कहा था, कि ‘मोदी का बाप भी जाएगा’। दरअसल बिहार के पटना में एक कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कार्यकर्ताओं को संभोदित कर रहे थे, तभी किसी की आवाज़ आई, कि मोटी कहीं नहीं जाने वाले, ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष के मूंह से निकल गया, कि ‘मोदी का बाप भी जाएगा’।
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बदलते दौर में राजनीति का गिरता स्तर
पहले के ज़माने में राजनीति में भी शिष्टाचार दिखता था और प्रेम की बोलियां सुनाई देती थी। पहले भी पक्ष और विपक्ष हुआ करते थे, लेकिन भाषा की मर्यादा बनी रहती थी। सब एक-दूसरे को सुनते थे और इतने झगड़े नहीं हुआ करते थे। सदन में पक्ष-विपक्ष मिलकर किसी विषय पर चर्चा किया करते थे। बदलते दौर के साथ राजनीति का स्तर भी गिरता गया। आज सियासत में गाली-गलौज, मारपीट, अभद्र भाषा, सदन के अंदर प्रदर्शन कर सदन को स्थगित करना, जैसे कृत्य देखने को मिलते हैं। आज पक्ष-विपक्ष एक दूसरे के दुश्मन नज़र आते हैं। यही वजह है, कि राजनीति की परिभाषा लगातार धूमिल होती जा रही है और खरगे का बयान ‘मोदी का बाप भी जाएगा’, इसका बड़ा उदाहरण है।
सियासत में बढ़ता अहंकार
सियासत में विचार व नीतियां भले ही न मिले, लेकिन राजनीति की गरिमा बनी रहे इसके लिए एक-दूसरे के प्रति सम्मान होना व करना बेहद ज़रूरी है, लेकिन अब यह सब नदारद है। इसके जगह पर आरोप-प्रत्यारोप, जलन व अहंकार ने अपनी जगह बख़ूबी बना ली है। अब सियासत में न तो प्रधानमंत्री पद के प्रति गरिमा नज़र आती है, न ही राष्ट्रपति पद का सम्मान। देश की इतनी बड़ी पार्टी कांग्रेस, जिसने आज़ादी के बाद दशकों तक देश पर शासन किया, उस पार्टी के नेताओं से ऐसी उम्मीद नहीं की जा सकती।
देश की सबसे बड़ी पार्टी का हाल
हम याद करते हैं, जिनको पढ़कर हम सभी बड़े हुए हैं, आज उस कांग्रेस पार्टी का हाल देखकर बूरा लगता है। आज जिस तरह से उनके कार्यकर्ता सड़क पर उतरकर वोट बैंक के लिए लोगों को आकर्षित करते नज़र आते है और ग़लत भाषा का प्रयोग करते हैं, उसे देखकर यह साबित हो जाता है, कि देश की इतनी बड़ी पार्टी आज सच में एक-एक वोट के लए जद्दोजहद कर रही है। ये उनके गिरते स्तर को बयां करता है।
क्या ये लगातार चुनाव हराने का असर तो नहीं
कांग्रेस वर्ष 2014 के बाद से सरकार बनाने में दोबारा कामयाब नहीं हुई। वर्ष 2014, 2019 और 2024 में लगातार तीन बार लोकसभा चुनाव हार चुकी है। कांग्रेस को आज सत्ता में आए एक दशक से भी ऊपर का दौर बीत चुका है। सोचने वाली बात है, कि आख़िर लंबे समय तक देश की सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी अब वापस सरकार बनाने के लिए तरस रही है। यही कारण है, कि अब यह हार धीरे-धीरे गुस्से, अहंकार और चिढ़ में परिवर्तित होता दिखाई देता है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बयान ‘मोदी का बाप भी जाएगा’ इसी का हिस्सा नज़र आता है।
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पहले भी होते रहे हैं अभद्र भाषा से वार
इससे पहले भी प्रधानमंत्री पर भाषा जैसे ‘मोदी तेरी कब्र खुदेगी’ से कई वार किए गए हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, बल्कि इन अभद्र भाषाओं को प्ररेणा में बदलकर वो जनता के बीच अलग अंदाज में खड़े होकर विपक्षियों पर भारी पड़ते रहे। हम यह नहीं कहते, कि भाजपा देश में हर काम अच्छा कर रही है। बीजेपी में भी कई खामियां हैं, जिसे सुधारने की आवश्यकता है, लेकिन उनके बड़े नेताओं को विपक्षी दलों पर अभद्र भाषा का प्रयोग करते नहीं देखा गया और यही वजह है, कि जनता के मन में उनकी अलग छवि बनी हुई है।
क्या अहंकार और अभद्रता से मिलगा जनता का विश्वास
कांग्रेस को यह समझना होगा, कि इस तरह की बयानबाजी से वो जनता का दिल नहीं जीत सकते, बल्कि पार्टी का स्तर गिरता ही है और जनता के सामने पार्टी की छवि ख़राब ही होती है। आप सरकार के काम से नाख़ुश होकर प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन सरकार के प्रति अभद्र भाषा और अहंकार को दिखाकर अपने प्रदर्शन को सफल नहीं बना सकते। कांग्रेस और इंडिया गठबंधन को यह समझना होगा, कि जनता का विश्वास चिल्लाकर, सरकार की कमियां निकालकर नहीं, बल्कि समस्या का समाधान कैसे हो और अपनी भविष्य की योजनाओं को साझा करना होगा।





