- कोर्ट ने किया उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष योजना
- कहा 10 दिन के अंदर मिले मुआवजा
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पॉक्सो (POCSO) अधिनियम को लेकर कड़े फ़ैसले सुनाए हैं। न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की बेंच ने कहा, कि यौन उत्पीड़न के पीड़ितों को केवल इस आधार पर मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता, कि उसकी मेडिकल रिपोर्ट में किसी शारीरिक चोट का उल्लेख नहीं है।
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10 दिन के अंदर मिले मुआवजा
अदालत ने POCSO एक्ट में प्रशासन को साफ़ निर्देश दिया है, कि पीड़ितों को उत्तर प्रदेश रानी लक्ष्मीबाई सम्मान कोष योजना के अंतर्गत आदेश की प्रमाणित प्रति जमा करने के 10 दिन के अंदर नाबालिग को 3 लाख रुपये दिए जाएं। साथ ही अदालत ने यह भी कहा, कि मुआवजा पीड़ितों के सदमे और पीड़ा को कम करने के उद्देश्य से बनाई गई है।
ज़िला संचालन समिति का फ़ैसला रद्द
बता दें, कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़िला संचालन समिति के मुआवजा रोकने के फैसले को गैरकानूनी बताते हुए रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया, कि POCSO अधिनियम की धारा 3 के तहत यौन उत्पीड़न को साबित करने के लिए शारीरिक चोट होना जरूरी नहीं है।
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जब FIR में अपराध का उल्लेख हो
कोर्ट ने यह भी कहा, कि जब FIR और चार्जशीट में अधिनियम की धारा 4 के तहत अपराध का ज़िक्र हो, तो सिर्फ़ ऐसी मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा देने से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसमें किसी चोट का उल्लेख नहीं है।





