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नोएडा श्रमिक आंदोलन: क्‍या है योगी सरकार की नई न्यूनतम मजदूरी दर?

श्रमिक आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा क़दम उठाते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन का फ़ैसला लिया।
  • तीन श्रेणियों में तय किए गए वेतन
  • साल 2019 और 2024 में नहीं हो पाया था संशोधन

न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन

हाली में नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बड़ा क़दम उठाते हुए न्यूनतम मजदूरी दरों में संशोधन का फ़ैसला लिया। सरकार के फ़ैसले के बाद प्रदेश की राज्यपाल ने भी इस न्यूनतम मजदूरी दरों अपनी मुहर लगाते हुए नोटिफिकेशन जारी कर दिया, जिसके बाद सरकार द्वारा तय की गई नई न्यूनतम मजदूरी दरें कानूनी रूप से प्रभावी हो गई। अब यह पूरे प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू हो जाएंगी।

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तीन श्रेणियों में बांटे गए वेतन

मजदूर आंदोलन के बाद श्रमिकों और नियोक्ताओं (Employer) के बीच वेतन में बढ़ोतरी को लेकर राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। उन्‍होंने अपनी सिफ़ारिश में तीन श्रेणियां में वेतन की दरें तय की हैं और इन्‍हीं के आधार पर राज्य सरकार ने अंतरिम राहत देते हुए नई मजदूरी दरें लागू करते हुए प्रदेश को भी तीन श्रेणियों में बांटा हैं।

प्रथम श्रेणी

प्रथम श्रेणी में गौतमबुद्धनगर और गाज़‍ियाबाद को रखा गया, जहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,690 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,868 रुपये मासिक न्यूनतम मजदूरी तय की गई है।

दूसरी श्रेणी

दूसरी श्रेणी में अन्य जिलों के नगर निगम वाले श्रमिक शामिल हैं, जहां अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये निर्धारित किए गए हैं।

तीसरी श्रेणी

तीसरी श्रेणी में शेष जिलों को रखा गया है, जहां अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये, अर्द्धकुशल के लिए 13,590 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये न्‍यूनतम वेतन के रूप में तय किए गए हैं। इन सभी दरों में मूल वेतन के साथ परिवर्तनीय महंगाई भत्ता (VDA) शामिल है।

2019 और 2024 में मजदूरी में नहीं हुआ संशोधन

बता दें, कि वर्ष 2019 और 2024 में प्रस्तावित मजदूरी संशोधन लागू नहीं हो पाए थे, जिसके चलते यह अंतर लगातार बढ़ता जा रहा था। अब कंज्यूमर प्राइस इंडेक्‍स के आधार पर न्‍यूनतम वेतन को रिविज़न किया गया है। इसके बाद सरकार का कहना है, कि यह निर्णय न केवल श्रमिकों को राहत देने के लिए है, बल्कि औद्योगिक शांति बनाए रखने और उत्पादन चक्र को सुचारु रखने के लिए भी आवश्यक है।

सरकार ने कहा अनियमितता पर होगी कार्रवाई

हालांकि‍ सरकार ने इस वेतन में बइलाव के बाद कहा, कि नई दरें लागू होने के बाद श्रमिकों के हितों में किसी प्रकार की कटौती या अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बता दें, कि हाल में श्रमिकों का न्‍यूनतम वेतन को लेकर आंदोलन हुआ था, जिसने कुछ बाहरी ताक़तों की वजह से हिंसक रूप ले लिया था। इसके बाद इसे रोकने के लिए सरकार ने कड़े क़दम उठाए थे। उधर मजदरों का कहना था, कि बढ़ती महंगाई और किराये में हो रहे इज़ाफ़े के कारण कम वेतन में जीवनयापन कर पाना कठिन हो गया है। इसके जवाब में नियोक्ताओं ने वैश्विक आर्थिक दबाव, बढ़ती लागत और सप्‍लाई में रुकावट का हवाला दिया।

टीम गठित की गई

नोएडा में भड़के आंदोलन के बाद स्थिति को काबू करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार को सौंपी गई। समिति ने मौक़े पर जाकर श्रमिकों, उद्योग प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से चर्चा की और संतुलित समाधान का प्रस्ताव तैयार किया।

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