दिल्ली में छात्र आंदोलन के बाद झारखंंड में छात्रों ने सरकार के ख़िलाफ़ JPSC-JSSC में कथित गड़बड़ियों को लेकर मोर्चा खोल दिया था। कई दिनों तक चले इस आंदोलन में छात्रों ने सरकार के सामने JPSC/ JSSC की परीक्षाओं में हुई कथित धांधली, OMR शीट में गड़बड़ी और पेपर लीक के चलते इन परीक्षाओं को रद्द कर दोबारा परीक्षा लेने और मामले की जांच CBI को सौंपने जैसी मांग रखी थी।
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आंदोलन के बाद झारखंड सरकार ने रद्द कर दी थी परीक्षाएं
मामले की गंंभीरता को देखते हुए सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने और 2014 से अभी तक की सभी परीक्षाओं की जांच करने और 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा को रद्द करने का फ़ैसला लिया। मामला यहीं नहीं रुका और इन परीक्षाओं को पास कर नौकरी पा चुके युवा सरकार के इस फैसले से नाराज़ हुए और सड़कों पर उतर गए। ऐसे में मामला झारखंंड हाइकोर्ट पहुंचा, जहां न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने JSSC-CGL और CDPO परीक्षा से जुड़ी नियुक्ति रद्द करने और 11वीं से 13वीं JPSSC व FSO परीक्षा को रद्द करने के सरकार के फ़ैसले पर स्टे लगा दिया। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद नौकरी कर रहे अभ्यर्थियों ने राहत महसूस की।
दोषी अभ्यर्थियों को राहत नहीं
अब कई महीनों के बाद झारखंड हाईकोर्ट का JSSC-CGL परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला आया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने 18 अगस्त 2026 की उस अधिसूचना को रद्द करते हुए JSSC-CGL परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके बाद 1,932 सफल अभ्यर्थियों में जश्न की लहर दौड़ गई और इनकी नौकरी अब बरकरार रहेगी, लेकिन होईकोर्ट ने यह साफ कर दिया है, कि परीक्षा में धांधली कर नौकरी पाने वाले चिह्नित दोषी अभ्यर्थी नौकरी से बाहर रहेंगे।
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JPSC-JSSC परीक्षाओं में लगे थे भ्रष्टाचार के आरोप
बता दें, कि JPSC-JSSC परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने के आरोप लगे थे। यह भी ओराप लगे थे, कि इन परीक्षाओं में कई अभ्यर्थियों ने पैसे देकर नौकरी पाई थी। इसके बाद छात्रों ने इन परीक्षाओं को रद्द करने के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन किया और क़रीब 24 दिन के आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेने ने इन परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया। अब हाईकोर्ट ने सरकार फैसले को निरस्त कर दिया है।




