छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) घोटाले में प्रवर्तन निदेषालय (ED) ने बलरामपुर में छापा मारकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तत्कालीन ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार कर लिया। ED की टीम उन्हें कल रात रायपुर लेकर पहुंची और विशेष अदालत में पेश किया। अदालत ने ED को पूछताछ के लिए 6 दिन की अनुमति दी है।
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PMLA के तहत चेतन बोरघरिया गिरफ़्तार
ED ने चेतन बोरघरिया को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ़्तार किया है। PMLA 1 जुलाई 2005 को देश में मनी लॉन्ड्रिंग यानी अवैध रूप से कमाये गए रुपयों को वैध बनाने से रोकने के लिए और इन रुपयों को जब्त करने के लिए बनाया गया था। अदालत ने CGPSC में हुए घोटालों के आरोप में इस कानून के तहत चेतन बोरघरिया को 6 दिन पुलिस रिमांड पर भेजा है।
करोड़ो का किया था घोटाला
वर्ष 2019 से 2022 के बीच चेतन बोरघरिया कांग्रेस सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेष बघेल के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी-ओएसडी के पद पर कार्यरत थे। बताया जाता है, कि इसी दौरान चेतन बोरघरिया ने CGPSC की परीक्षाओं में करोड़ो का घोटाला किया था। आरोप है, कि बोरघरिया ने कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर और मेडिकल ऑफ़िसर विकास चंद्राकर के साथ मिलकर CGPSC के पेपर लीक किए थे और अयोग्य उम्मीदवारों को सरकारी नौकरी दिलाने का पूरा खेल रचा था।
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अपने पद का उठाया था फ़ायदा
कहा जाता है, कि चेतन बोरघरिया ने उस समय अपने पोज़िशन का फ़ायदा उठाते हुए, अभ्यर्थियों से लाखों रुपये ऐंठ लिए थे। इसकी वजह से सही उम्मीदवार पीछे रह गए। उनपर यह भी आरोप लगा था, कि पद का फ़ायदा उठाकर चेतन बोरघरिया ने अपने नजदीकी और जान-पहचान वाले लोगों को बड़े पद पर चयन करवाया था। इससे पहले भी इस मामले में कई उच्च पउ पर बैठे लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है। हमारे देश में योग्य उम्मीदवार इन्हीं घटिया कारनामों की वजह से पीछे रह जाते हैं और जिनके पास पैसे हैं, वो अयोग्य होते हुए भी आगे हैं।





