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हादसों का शहर बनती दिल्ली: आख़‍िर क्यों नहीं रुक रहे दर्दनाक हादसे?

सत्य निकेतन में 5 मंजिला इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत ने दिल्ली की इमारतों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर ज़‍िम्मेदार कौन?

दिल्‍ली में एक बार फि‍र हृदयविदारक घटना देखने कोहले मिली। आख़‍िर कब तक ज़‍िम्‍मेदार लोगों की लापरवाही आम लोग व छात्रों की जान लेता रहेगा। दिल्‍ली के सत्‍य निकेतन में 5 मंजिला इमारत जिस तरह से ढह गई, यह हमारे सिस्‍टम की नाकामी को दर्शाता है। सोचने वाली बात यह है, कि पिछले कई वर्षों में दिल्‍ली ने कई दर्दनाक हादसे देखे, लेकिन हमारा सिस्‍टम कभी चौकन्‍ना नहीं हुआ। अगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) समय रहते जाग गया होता, तो सत्‍य निकेतन में 5 मंजिला इमारत के मलबे में दबकर छात्र समेत 7 लोगों की जान नहीं गई होती।

यह भी पढ़ें: सत्य निकेतन हादसा: 7 मौतों के बाद पकड़ा गया इमारत का मालिक हरिराम गुप्ता

पहला हादसा नहीं, दि‍ल्‍ली में लापरवाही के हादसे देखे गए हैं

यह कोई पहला हादसा नहीं है, इससे पहले भी दि‍ल्‍ली में लापरवाही के दर्दनाक हादसे देखे गए हैं, जिसमें कई बेकसूर लोग अपनी जान गवां चुके हैं। इसके अंतर्गत मालवीय नगर के होटल का वो अग्‍निकांड कैसे भूल सकता है कोई, जिसमें एक ही परिवार के 9 सदस्‍यों सहित 26 लोगों की आग में झुलसने से मौत हो गई थी। इसी तरह दिल्‍ली के साकेत इलाक़े में 5 मंजिला और वेलकम इलाक़े में 4 मंजिला बिल्‍डिंग ढह गई थी। इसके अलावा ओल्ड राजेंदर नगर स्थित ‘राऊ IAS स्टडी सर्कल’ के बेसमेंट में पानी भरने से तैयारी कर रहे छात्रों की मौत हो गई थी। इन हादसों को देखकर यही सवाल उठता है, कि क्‍या दिल्‍ली सुरक्षि‍त है?

New Delhi: Satya Niketan (Photo: IANS/Wasim Sarvar)

इमारत में दबकर रह गए सपने

सत्‍य निकेतन की इमारत गिरने से छात्रों समेत 12 लोग बूरी तरह घायल हो गए थे, जिसमें से रिपोर्ट के अनुसार 5 छात्रों सहित 7 लोगों की मौत हो चुकी है। आज उन परिवारों पर क्‍या बीत रही होगी, जिन्‍होंने अपना चिराग खोया है। ये छात्र अपने उज्‍जवल भविष्‍य के लिए दिल्‍ली में रह कर पढ़ाई कर रहे थे और इसी PG (हॉस्‍टल) में रह रहे थे, लेकिन उन्‍हें क्‍या पता था, कि उनका सपना एक दिन इस लापरवाही के इमारत में दबकर ख़त्‍म हो जाएगा। उन माता-पिता को क्‍या पता था, कि हादसे का शहर बन चुका दिल्‍ली एक दिन उनका सबकुछ छीन लेगा।

आख़ि‍र क्‍यों नहीं कराई गई इमारत खाली ?

बताया जा रहा है, कि इस 5 मंजिला जर्जर इमारत के बेसमेंट में कई दिनों से काम चल रहा था, यानी की इसकी नींव काफ़ी कमजोर हो चुकी थी। कहा जा रहा है, कि इस इमारत को नोटिस दिया गया था, लेकिन बावजूद उसके इसमें हॉस्‍टल का संचालन किया जा रहा था। सोचने वाली बात है, कि अगर मालिक को पता था, कि बिल्‍डिंग की नींव कमजोर है, तो इसे खाली क्‍यों नहीं कराया गया। पहले इसे खाली करवा दिया जाता और तब इसमें मरम्‍मत का काम कराया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और लोगों को मरने के लिए छोड़ दिया गया। यहां दिखाई देता है किराये लालच, जो छात्रों को मौत के मुंह में डालकर लिया जाता है।

New Delhi: Satya Niketan (Photo: IANS/Video Grab)

जब खुली MCD की आंख, तबतक 7 लोगों की मौत

इतने दिनों से MCD सोई हुई थी और इमारत जब मलबे में तबदील हो गई, तो MCD की आंंख खुली और नियम-कनून समझाने लगे, लेकिन जब सरकार व प्रशासन की आंख खुली तब तक 7 लोगों की इस दर्दनाक हादसे में मौत हो चुकी थी। क्‍या प्रशासन के पास इसका जवाब है। अगर समय रहते इसका जवाब ढूंड लिया जाता, तो आज दिल्‍ली में मौत का मंजर नहीं देखने को मिलता। घटना घट जाने के बाद हम जागते हैं और मामला ठंडा होने के बाद फ‍िर वही होता है, जो हो रहा था। इसका नतीजा यह है, कि आज दिल्‍ली हादसों का शहर बन कर रह गया है, जहां अब हर समय डर लगता है।

क्‍या हमारा सिस्‍टम ज़िम्‍मेदार नहीं?

सत्‍य निकेतन जैसी दिल्‍ली में नाजाने कितनी बहुमंजिला इमारते हैं, जो जंर्जर हो चुकी हैं, लेकिन उनका संचालन नियमों की धज्‍ज‍ियां उड़ाते हुए कि‍या जा रहा है और प्रशासन किसी हादसे का इंतज़ार करता है। क्‍या इन हादसों का ज़‍िम्‍मेदार MCD नहीं है। अगर यह हादसे बार-बार हो रहे हैं और लोगों की जानें जा रही हैं, तो इसका ज‍़ि‍म्‍मेदार हमारा सिस्‍टम है, जो हादसों के बाद ही उठता है। इसकी क़ीमत हमेंशा आम आदमी को अपना सबकुछ खोकर चुकानी पड़ती है।

पत्‍नी और बेटे के साथ गिरफ़्तार हुआ इमारत का मालिक

इस मामले में भी हादसे के बाद दिल्‍ली पुलिस ने एक्‍शन लेते हुए इस इमारत के मालिक हरिराम गुप्‍ता, उसकी पत्‍नी उर्मिला और बेटे महेश गुप्‍ता को गिरफ़्तार कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, इमारत का बिजली कनेक्शन हरिराम के नाम था, जबकि उसका मैनेजमेंट बेटा महेश देख रहा था। संपत्ति उर्मिला के नाम दर्ज थी। तीनों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत, वहीं महेश को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

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