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पेपर लीक पर सख्त होगा क़ानून, दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान

पेपर लीक पर सख्त कानून लाने की तैयारी। पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन विधेयक, 2026 में दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान।
  • प्रधानमंत्री ने फ़ास्‍ट ट्रैक कोर्ट बनाने का किया ऐलान
  • परीक्षा में धांधली को रोकने के लिए नया विधेयक

परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक से नाख़ुश छात्रो ने नई दिल्‍ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से ऊपर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया, जिसका असर पूरे देश के छात्रों और युवाओं पर पड़ा और देखते ही देखते आंदोलन ने व्‍यापक रूप ले लिया। पेपर लीक से जुड़े मामले पहले भी होते रहे हैं, लेकिन NEET पेपर लीक ने युवाओं में आक्रोश को भर दिया और शि‍क्षा को लेकर सरकार को घेर कर आंदोलन छेड़ दिया।

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फ़ास्‍ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान

छात्रों के आंदोलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो जारी कर फ़ास्‍ट ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया, जिससे दोषि‍यों पर तुरंत कार्रवाई हो और कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। फ़ास्‍ट ट्रैक कोर्ट के अंतर्गत चार्जशीट दाख़‍िल होने के बाद 90 दिनों में मामले का निपटारा करने का प्रावधान है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। 

पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन विधेयक, 2026

पेपर लीक मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली पर रोक लगाने के लिए बड़ा क़दम उठाते हुए संसद में पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई, जिसे केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह पेश कि‍या। प्रस्तावित संशोधन में सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और दूसरी गड़बड़ियों में शामिल लोगों के खिलाफ़ कड़ी सजा देने वाले क़ानून बनाए जाएंगे। इस बिल में दोषियों को न्‍यूनतम 5 साल और अधिकतम 10 साल तक की सजा और 1 करोड़ रुपये से लेकर 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।

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छात्र आंदोलन के बाद शिक्षा मंत्री का इस्‍तीफ़ा

देशभर के छात्रों ने बता दिया, कि अब परीक्षाओं में धांधली और भविष्‍य के साथ खिलवाड़ को बर्दास्‍त नहीं किया जाएगा। यहीं कारण था, कि छात्रों की मांग को देखते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्‍काल अपने पद से इस्‍तीफ़ा देना पड़ा। इसके बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रल्‍हाद जोशी को शि‍क्षा मंत्रालय की बागडोर सौंप दी गई। देखना होगा, कि संसद में पब्लिक एग्जामिनेशन संशोधन बिल पर चर्चा में विपक्षी दल कितना सहयोग देते हैं?  

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