- स्नैच में 121 किलोग्राम भार उठाकर बनाया रिकॉर्ड
- कुल 264 किलोग्राम का उठाया वजन
करोड़ो युवाओं के लिए प्रेरणा बने ऋषिकांत सिंह
ऋषिकांत सिंह आज देश के उन करोड़ो युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए हैं, जो अपना जीवन हर दिन संघर्ष और किसी न किसी चुनौती के साथ बिताते हैं, क्योंकि ऋषिकांत सिंह ने यूंही नहीं कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता है, बल्कि इसके पीछे कई वर्षों की मेहनत छिपी है। ऐसा संघर्ष जहां अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को भी संभालना था और अपने हुनर को मुक़ाम तक भी पहुंचाना था।
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ढाबे से लेकर कंस्ट्रक्शन साइट पर किया काम
ऋषिकांत सिंह की यह यात्रा आसान नहीं रही। पिता टेक्सी ड्राइवर थे, वहीं ऋषिकांत ने ढाबे में बरतन धोने से लेकर कंस्ट्रक्शन साइट पर मजदूरी की, जिससे घर चलता था। वो कहते हैं ना, कि एक विश्वास के साथ लगातार प्रयास करते रहने से एक दिन सबका समय आता है, वैसे ही हुआ ऋषिकांत सिंह के साथ। पारिवारिक समस्याओं के बावजूद लगातार प्रैक्टिस करने का ही यह नतीजा है, कि वेटलिफ़्टिंग में वह दूसरे स्थान पर रहे, जो बहुत बड़ी उपलब्धि है।
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60 किलोग्राम वर्ग में जीता रजत पदक
ऋषिकांत सिंह ने 60 किलोग्राम वेटलिफ़्टिंग वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन से देश का नाम रौशन किया। उन्होंने स्नैच के अंतर्गत पहली कोशिश में 116, दूसरी कोशिश में 119 और आख़िरी प्रयास में 121 किलोग्राम का भार उठाकर नया रिकॉर्ड भी क़ायम कर दिया। इसके बाद क्लीन एंड जर्क में ऋषिकांत सिंह ने 143 किलोग्राम का वजन उठाया। इस तरह से उन्होंने स्नैच व क्लीन एंड जर्क को मिलाकर कुल 264 किलोग्राम का भार उठाकर सिल्वर अपने नाम कर दिया।





