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“नीट छात्रा की मौत एक रहस्‍य: अदालत ने कहा, जांच में है गड़बड़ी“

अदालत में आरोपी मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई, लेकिन अदालत ने जांच प्रक्र‍िया में दिख रहे ढीलेपन की वजह से फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है और अब इसकी दोबरा सुनवाई होगी।
  • हॉस्‍टल मालिक़ मनीष रंजन की जमानत याचिका पर कोई फ़ैसला नहीं
  • 11 जनवरी को नीट छात्रा की हो गइ थी मौत

43 दिनों से जेल में बंद है मनीष रंजन

बिहार में नीट छात्रा की मौत की गुत्‍थी अभी तक सुलझ नहीं पाई है। हालांकि जिस हॉस्‍टल (शंभू गर्ल्‍स हॉस्‍टल) में छात्रा अचेत पाई गई और और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, उस हॉस्‍टल के मालिक़ मनीष रंजन को हिरासत में ले लिया गया और वो पिछले 43 दिनों से जेल में बंद है। अदालत ने आरोपी मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई की, लेकिन अदालत ने जांच प्रक्र‍िया में दिख रहे ढीलेपन की वजह से फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है और अब इसकी दोबरा सुनवाई होगी।

दूसरी तरफ़ नीट छात्रा की मां ने क़ानून पर सवाल उठाते हुए कहा, कि सीबीआई मामले को दबाने की कोशिश कर रही है और मामले की लीपापोती कर रही है। अदालत ने भी माना है, कि ने सीबीआई और एसआईटी की जांच प्रक्रि‍या सही नहीं है। अदालत ने सीबीआई और एसआईटी की जांच पर कई सवाल उठाए। न्यायाधीश ने कहा, कि दोनों जांच एजेंसियों के बयानों में साफ़ अंतर देखा जा सकता है और जांच प्रक्रिया में कई ख़ामियां भी सामने आई हैं। अदालत ने सीबीआई से सवाल करते हुए पूछा, कि अब तक मामले की जांच में क्या प्रगति हुई है और आगे की जांच के लिए उनकी क्या योजना है?

Video: PBSHABD

इसी बीच सीबीआई ने अदालत में कहा, कि मनीष रंजन के ख़‍िलाफ़ हमारे पास पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, इसलिए जमानत नहीं दी जानी चाहिए। सीबीआई का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और इस चरण में जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है।

क्‍या कोई बड़ी ताक़त है इसके पीछे?

अदालत ने जब कहा, कि सीबीआई और एसआईटी की जांच प्रक्रि‍या में कई गड़बड़‍ियां है, तो इससे क़ानून व्‍यवस्‍था पर सवाल तो उठते ही है, वहीं इससे यह भी पता चलता है, कि इस मामले को किस तरह दबाने की कोशिश की जा रही है, यानी कोई बड़ी ताक़त इसके पीछे छिपी बैठी है, जो पीछे से इस मामले को लेकर क़ानून को अपने अनुसार नंचा रही है। यह बड़ा ही दुर्भाग्‍य है हमारे देश का, जहां हम एक तरफ़ विकसित भारत की बात करते तो हैं, लेकिन यहां क़ानून कुछ ताक़तवर लोगों के हिसाब से ही चलता है, वहीं एक ग़रीब जीवनभर अदालत के चक्‍कर काटता रहता है और एक दिन सबूत के अभाव में वो हार जाता है या उसे रास्‍ते से ही हटा दिया जाता है।

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छात्रा की मां कहा हम ग़रीब हैं

छात्रा की मां ने भी यही कहा, कि हम ग़रीब हैं, इसलिए हमारे साथ ऐसा हो रहा है और जांच एजेंसियां सही से जांच नहीं कर रही हैं। इससे हमारे समाज में अमीर और ग़रीब का अंतर साफ़ झलकता है। यह भी पता चलता है, कि अमीर पैसों के दम पर अपनी बात मनवा लेता है। उसके लिए सच को झूठ साबित करना कोई बड़ी चीज़ नहीं है और ग़रीब सच जानते हुए भी साबित नहीं कर पाता। अब सवाल उठता है, कि हम किसके भरोसे रहें? किससे इंसाफ़ मांगे? अदालत सबूतों से चलता है और सीबीआई ही जब जांच करने में लापरवाही बरतेगी, तो नीट छात्रा को इंसाफ़ कैसे मिलेगा?

छात्रा की मां ने कहा, कि मेरी बेटी तो अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन मै चाहती हूं, कि और किसी बेटी के साथ ऐसा ना हो, इसलिए यह लड़ाई जारी रहेगी।

क्‍या है नीट छात्रा की मौत का मामला?

छात्रा पटना के चि‍त्रगुप्‍त नगर में स्‍थि‍त शंभू गर्ल्‍स हॉस्‍टल में रह कर नीट की तैयारी कर रही थी, जहां 6 जनवरी की सुबह वह अपने कमरे में अचेत पाई गई। उसे जल्‍दी-जल्‍दी में अस्‍पताल पहुंचाया गया, लेकिन छात्रा की हालत इतनी गंभीर थी, कि उसे एक के बाद एक अस्‍पताल में रेफ़र किया गया। तीन अस्‍पतालों में छात्रा का इलाज़ चलने के बाद 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई। ख़बर होते हुए भी पुलिस ने इस मामले में दिलचस्‍पी नहीं दिखाई और इसे ख़ुदकुशी बता दिया। इससे बिहार पुलिस पर लापरवाही साफ़ झलकती है।

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